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हजरत सैयद जानबाज वली दरगाह का पुनर्निर्माण करेगा जेके वक्फ बोर्ड, चेयरपर्सन डॉ. दरख्शां अंद्राबी ने बारामूला में किया निरीक्षण

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हजरत सैयद जानबाज वली दरगाह का पुनर्निर्माण करेगा जेके वक्फ बोर्ड, चेयरपर्सन डॉ. दरख्शां अंद्राबी ने बारामूला में किया निरीक्षण

सारांश

जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड चेयरपर्सन डॉ. दरख्शां अंद्राबी ने बारामूला के खानपोरा में हजरत सैयद जानबाज वली दरगाह का निरीक्षण किया और अधूरे पड़े संरक्षण कार्यों को जल्द पूरा करने का वादा किया — स्थानीय समुदाय की लंबे समय से चली आ रही माँगों पर यह सीधी प्रतिक्रिया है।

मुख्य बातें

जेके वक्फ बोर्ड चेयरपर्सन डॉ.
दरख्शां अंद्राबी ने 20 जून को बारामूला के खानपोरा स्थित हजरत सैयद जानबाज वली दरगाह का दौरा किया।
उन्होंने घोषणा की कि दरगाह के मुख्य स्थल के पुनर्निर्माण के साथ अधूरे पड़े सभी संरक्षण कार्य भी पूरे किए जाएंगे।
पुनर्निर्माण में दरगाह की धार्मिक पवित्रता , ऐतिहासिक विरासत और आध्यात्मिक महत्व को बनाए रखने का आश्वासन दिया गया।
बारामूला जिला उपायुक्त कार्यालय में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई, जिसमें अतिरिक्त उपायुक्त सैयद अल्ताफ हुसैन मुसवी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।
स्थानीय समुदाय और श्रद्धालुओं ने इस घोषणा का स्वागत किया और इसे विरासत संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन डॉ. सैयद दरख्शां अंद्राबी ने शनिवार, 20 जून को बारामूला जिले के खानपोरा स्थित हजरत सैयद जानबाज वली की ऐतिहासिक दरगाह का दौरा किया और घोषणा की कि वक्फ बोर्ड इस धरोहर स्थल के पुनर्निर्माण एवं अधूरे संरक्षण कार्यों को जल्द पूरा करेगा। यह दौरा स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं की लगातार उठ रही माँगों के बाद आयोजित किया गया, जो दरगाह की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर चिंतित थे।

निरीक्षण का पृष्ठभूमि और उद्देश्य

स्थानीय समुदाय का कहना था कि जम्मू-कश्मीर अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की विरासत संरक्षण और पुनर्स्थापन परियोजना में कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल नहीं किया गया था। इससे इस सदियों पुरानी दरगाह के समग्र संरक्षण को लेकर आशंकाएँ बनी हुई थीं। श्रद्धालुओं ने डॉ. अंद्राबी से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की अपील की थी, जिसके बाद यह दौरा संभव हुआ।

मुख्य घोषणाएँ और आश्वासन

डॉ. अंद्राबी ने मौके पर ही घोषणा की कि दरगाह के मुख्य स्थल के पुनर्निर्माण के साथ-साथ परियोजना के उन सभी हिस्सों पर भी कार्य किया जाएगा जो अब तक अधूरे रह गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुनर्निर्माण इस प्रकार किया जाएगा कि दरगाह की धार्मिक पवित्रता, ऐतिहासिक विरासत और आध्यात्मिक महत्व पूरी तरह सुरक्षित रहे। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि परियोजना में गुणवत्ता और पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा जाएगा और स्थानीय समुदाय की भावनाओं का सम्मान होगा।

उच्चस्तरीय बैठक और अधिकारियों की भागीदारी

दरगाह के निरीक्षण से पहले डॉ. अंद्राबी ने बारामूला जिला उपायुक्त कार्यालय में परियोजना की प्रगति की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त सैयद अल्ताफ हुसैन मुसवी, वक्फ बोर्ड के कार्यकारी मजिस्ट्रेट इश्तियाक मोहिउद्दीन, आरएंडबी विभाग के कार्यकारी अभियंता मोहम्मद यूनिस शाह सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में परियोजना की वर्तमान स्थिति और आगे की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।

स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रिया

डॉ. अंद्राबी की घोषणा का स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं ने स्वागत किया। लोगों ने इसे धार्मिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया और वक्फ बोर्ड की पहल की सराहना की। समुदाय के कई सदस्यों ने कहा कि यह निर्णय विरासत संरक्षण और जनभावनाओं के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास है।

आगे की राह

गौरतलब है कि हजरत सैयद जानबाज वली की दरगाह कश्मीर घाटी की उन महत्वपूर्ण सूफी धरोहरों में से एक है जो सदियों से श्रद्धा का केंद्र रही है। जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड के इस हस्तक्षेप से उम्मीद है कि न केवल दरगाह का भौतिक ढाँचा सुदृढ़ होगा, बल्कि इसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत भी आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रहेगी। अब सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि घोषित कार्य कितनी जल्दी और किस गुणवत्ता के साथ धरातल पर उतरते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जम्मू-कश्मीर अभिलेखागार विभाग की मौजूदा परियोजना में 'महत्वपूर्ण पहलू' क्यों छूट गए — और इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा। कश्मीर में सूफी दरगाहों के जीर्णोद्धार की परियोजनाओं में पारदर्शिता और समयसीमा का पालन अक्सर कमज़ोर कड़ी रही है। वक्फ बोर्ड का हस्तक्षेप तभी सार्थक होगा जब घोषित 'गुणवत्ता और पारदर्शिता' को मापने योग्य समयसीमा और सार्वजनिक निगरानी तंत्र से जोड़ा जाए — अन्यथा यह दौरा एक और आश्वासन बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हजरत सैयद जानबाज वली दरगाह कहाँ स्थित है और इसका क्या महत्व है?
यह दरगाह जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के खानपोरा में स्थित है और कश्मीर घाटी की महत्वपूर्ण सूफी धरोहरों में से एक है। यह सदियों से श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आध्यात्मिकता का केंद्र रही है।
जेके वक्फ बोर्ड दरगाह के पुनर्निर्माण में क्यों हस्तक्षेप कर रहा है?
स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं ने शिकायत की थी कि जम्मू-कश्मीर अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की मौजूदा पुनर्स्थापन परियोजना में कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल नहीं किए गए। इसके बाद वक्फ बोर्ड चेयरपर्सन डॉ. दरख्शां अंद्राबी ने व्यक्तिगत हस्तक्षेप किया।
डॉ. दरख्शां अंद्राबी ने दरगाह के पुनर्निर्माण को लेकर क्या घोषणा की?
उन्होंने 20 जून को मौके पर घोषणा की कि जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड दरगाह के मुख्य स्थल के पुनर्निर्माण के साथ-साथ परियोजना के सभी अधूरे हिस्सों पर भी कार्य करेगा। उन्होंने गुणवत्ता, पारदर्शिता और दरगाह की धार्मिक-ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखने का आश्वासन दिया।
बारामूला में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में कौन-कौन शामिल थे?
बैठक की अध्यक्षता डॉ. दरख्शां अंद्राबी ने की। इसमें अतिरिक्त उपायुक्त सैयद अल्ताफ हुसैन मुसवी, वक्फ बोर्ड के कार्यकारी मजिस्ट्रेट इश्तियाक मोहिउद्दीन, आरएंडबी विभाग के कार्यकारी अभियंता मोहम्मद यूनिस शाह और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
स्थानीय समुदाय ने इस घोषणा पर क्या प्रतिक्रिया दी?
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने इस घोषणा का स्वागत किया और इसे धार्मिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। समुदाय के सदस्यों ने कहा कि यह निर्णय विरासत संरक्षण और जनभावनाओं के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है।
राष्ट्र प्रेस
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