हिमाचल में मानसून 2026: ₹1,000 करोड़ का नुकसान, 15 मौतें; 4 बादल फटे, 120 सड़कें बंद
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश में मानसून सीजन 2026 के दौरान भारी बारिश और प्राकृतिक आपदाओं ने भारी तबाही मचाई है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के विशेष सचिव पुष्पेंद्र राणा के अनुसार, अब तक का प्रारंभिक नुकसान लगभग ₹1,000 करोड़ आँका गया है और करीब 15 लोगों की जान जा चुकी है। कांगड़ा और पांगी घाटी में सबसे अधिक जनहानि दर्ज की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
विशेष सचिव पुष्पेंद्र राणा ने बताया कि इस मानसून सीजन में अब तक 19 अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) और 4 बादल फटने की घटनाएँ दर्ज की गई हैं। इसके अलावा 9 से 10 भूस्खलन की घटनाएँ भी सामने आई हैं। राज्य में आपदाओं की यह श्रृंखला मानसून के आरंभिक हफ्तों में ही प्रदेश की बुनियादी संरचना को गहरी चोट पहुँचा चुकी है।
वर्तमान में 120 से अधिक सड़कें अवरुद्ध हैं, 60 से अधिक पेयजल योजनाएँ प्रभावित हुई हैं और कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी बाधित है। राणा ने कहा, 'राज्य में अभी तक का नुकसान लगभग एक हजार करोड़ है। हम कोशिश कर रहे हैं कि पूरा रिकॉर्ड रखें।'
सरकार की प्रतिक्रिया
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण इन घटनाओं पर लगातार नज़र रख रहा है और तत्काल कार्रवाई की जा रही है। पुष्पेंद्र राणा ने बताया कि मौसम विभाग द्वारा जारी सभी अलर्ट को तत्काल जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों तक पहुँचाया जा रहा है, ताकि समय रहते राहत और बचाव कार्य संचालित किए जा सकें। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला प्रशासन की हेल्पलाइन सेवाएँ 24 घंटे सक्रिय रखी गई हैं।
आम जनता और पर्यटकों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब हिमाचल प्रदेश पर्यटन के लिहाज़ से अपने चरम सीजन में है। सड़कें बंद होने और भूस्खलन की आशंका के चलते हज़ारों पर्यटक और स्थानीय निवासी प्रभावित हुए हैं। पेयजल और बिजली व्यवस्था ठप होने से दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
विशेष सचिव ने प्रदेशवासियों और पर्यटकों से अपील की है कि मानसून के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, आपदा-प्रवण क्षेत्रों में न जाएँ और मौसम विभाग की सभी चेतावनियों एवं दिशानिर्देशों का पालन करें।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में हर मानसून सीजन में भूस्खलन और बादल फटने की घटनाएँ सामान्य हैं, परंतु इस वर्ष 19 फ्लैश फ्लड और 4 क्लाउडबर्स्ट की घटनाएँ सीजन के शुरुआती चरण में ही दर्ज होना, विशेषज्ञों के अनुसार चिंताजनक संकेत है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि पहाड़ी राज्यों में मानसून की तीव्रता बढ़ रही है, जो बुनियादी ढाँचे पर अतिरिक्त दबाव डालती है।
क्या होगा आगे
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का कहना है कि नुकसान का पूरा आकलन जारी है और अंतिम आँकड़े इससे अधिक हो सकते हैं। बंद सड़कों को खोलने और पेयजल व बिजली आपूर्ति बहाल करने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी भारी बारिश की संभावना बनी हुई है, जिससे स्थिति और जटिल हो सकती है।