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जुबीन गर्ग के 200 दुर्लभ गीत डिजिटल रूप में सुरक्षित, असम के चिन्मय सैकिया की अनूठी पहल

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जुबीन गर्ग के 200 दुर्लभ गीत डिजिटल रूप में सुरक्षित, असम के चिन्मय सैकिया की अनूठी पहल

सारांश

असम के नगांव के चिन्मय सैकिया ने जुबीन गर्ग के 200 से अधिक दुर्लभ गीतों को पुराने कैसेट से डिजिटल रूप में सहेजा है — वे गीत जो यूट्यूब पर भी नहीं मिलते। यह एक संगीत-प्रेमी की निजी कोशिश है जो पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक धरोहर को विस्मृति से बचा रही है।

मुख्य बातें

चिन्मय सैकिया ( नगांव, असम ) ने जुबीन गर्ग के 200 से अधिक दुर्लभ गीत डिजिटल रूप में सुरक्षित किए हैं।
इनमें से कई गीत यूट्यूब और प्रमुख ऑनलाइन म्यूजिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं हैं।
संग्रह में पुराने ऑडियो और वीडियो कैसेट शामिल हैं जो समय के साथ नष्ट होने के कगार पर थे।
जुबीन गर्ग पूर्वोत्तर भारत के सर्वाधिक प्रभावशाली असमिया गायकों में गिने जाते हैं।
यह पहल सरकारी संस्थागत सहयोग के अभाव में क्षेत्रीय संगीत धरोहर के संरक्षण की ज़रूरत को उजागर करती है।

असम के नगांव जिले के कुंवारिटोल निवासी चिन्मय सैकिया ने दिवंगत असमिया गायक जुबीन गर्ग के 200 से अधिक दुर्लभ गीतों को डिजिटल रूप में संरक्षित कर एक उल्लेखनीय सांस्कृतिक पहल को अंजाम दिया है। इनमें से अनेक गीत यूट्यूब और प्रमुख ऑनलाइन संगीत प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं हैं। यह पहल ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण हो जाती है जब पुराने ऑडियो-वीडियो कैसेट के नष्ट होने से क्षेत्रीय संगीत धरोहर के स्थायी रूप से खो जाने का खतरा बना हुआ है।

संरक्षण की यह यात्रा कैसे शुरू हुई

चिन्मय सैकिया पिछले कई वर्षों से जुबीन गर्ग के पुराने ऑडियो और वीडियो कैसेट जुटाने में लगे हैं। उनका कहना है कि जो गीत सीमित संख्या में जारी कैसेट में बंद थे और बाद में डिजिटल माध्यमों पर नहीं आए, वे धीरे-धीरे लोगों की पहुँच से दूर होते जा रहे थे। इसी को देखते हुए उन्होंने इन रिकॉर्डिंग को डिजिटल आर्काइव करने का बीड़ा उठाया।

सैकिया ने बताया कि उन्होंने अब तक 200 से ज़्यादा गीतों को डिजिटल प्रारूप में सुरक्षित कर लिया है। उनके अनुसार, इनमें से कई गीत बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खोजने पर भी नहीं मिलते, जिससे इन्हें आकाईव करना अनिवार्य हो गया था।

कैसेट युग की धरोहर खतरे में

सैकिया का यह संग्रह उस दौर की याद दिलाता है जब संगीत का एकमात्र माध्यम कैसेट हुआ करती थी। उस समय श्रोता अपने प्रिय गायकों की कैसेट खरीदकर घरों में बजाते थे। ऑडियो के साथ-साथ वीडियो कैसेट भी काफी प्रचलित थे।

समय बीतने के साथ इन कैसेट का क्षरण होने लगा — टेप टूटने, आवाज़ में विकृति और रिकॉर्डिंग के पूरी तरह नष्ट होने की समस्याएँ सामने आईं। ऐसे में समय रहते इन रिकॉर्डिंग को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित न किया गया तो ये हमेशा के लिए लुप्त हो सकती हैं।

जुबीन गर्ग की संगीत विरासत

जुबीन गर्ग असम के सर्वाधिक लोकप्रिय और प्रभावशाली गायकों तथा संगीतकारों में शुमार किए जाते हैं। उन्होंने असमिया के अलावा अनेक भारतीय भाषाओं में गीत गाए और पूर्वोत्तर भारत के संगीत एवं सांस्कृतिक जीवन में एक विशेष स्थान बनाया। उनके गीत आज भी लाखों श्रोताओं के दिलों में जीवित हैं।

गौरतलब है कि उनके कई लोकप्रिय गीत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं, किंतु प्रारंभिक दौर की रचनाएँ — विशेषकर सीमित संस्करण में जारी कैसेट — अभी भी ऑनलाइन जगत से बाहर हैं। यही वह रिक्तता है जिसे सैकिया की पहल भरने की कोशिश कर रही है।

आम जनता और संस्कृति पर असर

सैकिया जैसे संगीत-प्रेमियों की व्यक्तिगत कोशिशें क्षेत्रीय सांस्कृतिक धरोहर को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब सरकारी या संस्थागत अभिलेखागार इन दुर्लभ रिकॉर्डिंग को संरक्षित करने में पिछड़ जाते हैं, तब ऐसे समर्पित व्यक्तियों की निजी पहल ही सांस्कृतिक स्मृति की रक्षक बनती है।

यह पहल पूर्वोत्तर भारत की भाषाई और सांगीतिक विविधता के संरक्षण की व्यापक ज़रूरत को भी रेखांकित करती है। आने वाली पीढ़ियाँ इन दुर्लभ रचनाओं को सुन सकें, इसके लिए डिजिटल आर्काइविंग अब एक अनिवार्य सांस्कृतिक दायित्व बन चुकी है।

आगे की राह

चिन्मय सैकिया की यह पहल आने वाले समय में और विस्तार पा सकती है। यदि सरकारी सांस्कृतिक संस्थाएँ और संगीत अभिलेखागार इस तरह की व्यक्तिगत कोशिशों को संस्थागत समर्थन दें, तो जुबीन गर्ग समेत असम के अन्य दिग्गज कलाकारों की दुर्लभ धरोहर को स्थायी रूप से सुरक्षित किया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े संस्थागत शून्य को भी उजागर करती है — भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की क्षेत्रीय सांस्कृतिक धरोहर को डिजिटल रूप में सहेजने के लिए कोई मज़बूत सरकारी तंत्र अब तक नहीं बन पाया है। जब एक व्यक्ति की निजी लगन ही किसी बड़े कलाकार की विरासत का एकमात्र संरक्षक बन जाए, तो यह नीति-निर्माताओं के लिए चेतावनी है। संगीत नाटक अकादमी और असम सरकार के सांस्कृतिक विभाग को ऐसी व्यक्तिगत पहलों को संस्थागत ढाँचे में जोड़ना चाहिए, वरना कैसेट युग की अनेक अमूल्य रचनाएँ चुपचाप इतिहास में समा जाएँगी।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चिन्मय सैकिया ने जुबीन गर्ग के कितने गीत डिजिटल रूप में सुरक्षित किए हैं?
चिन्मय सैकिया ने जुबीन गर्ग के 200 से अधिक गीतों को डिजिटल रूप में संरक्षित किया है। इनमें से कई गीत यूट्यूब और अन्य प्रमुख ऑनलाइन म्यूजिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं हैं।
चिन्मय सैकिया कौन हैं और वे कहाँ के रहने वाले हैं?
चिन्मय सैकिया असम के नगांव जिले के कुंवारिटोल के निवासी हैं। वे एक संगीत-प्रेमी हैं जो कई वर्षों से जुबीन गर्ग के पुराने ऑडियो-वीडियो कैसेट एकत्र कर उन्हें डिजिटल रूप में सहेजने में लगे हैं।
जुबीन गर्ग के गाने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर क्यों उपलब्ध नहीं हैं?
जुबीन गर्ग के शुरुआती दौर की कई रिकॉर्डिंग सीमित संख्या में जारी कैसेट में ही मौजूद थीं और उन्हें बाद में डिजिटल प्रारूप में नहीं लाया गया। समय के साथ कैसेट टेप टूटने, आवाज़ में विकृति और रिकॉर्डिंग के क्षतिग्रस्त होने से ये गीत धीरे-धीरे लुप्त होते जा रहे हैं।
जुबीन गर्ग की संगीत विरासत क्या है?
जुबीन गर्ग असम के सर्वाधिक लोकप्रिय और प्रभावशाली गायक-संगीतकारों में गिने जाते हैं। उन्होंने असमिया के अलावा कई अन्य भारतीय भाषाओं में गीत गाए और पूर्वोत्तर भारत के संगीत एवं सांस्कृतिक जीवन में विशेष स्थान बनाया।
क्षेत्रीय संगीत धरोहर को डिजिटल रूप में संरक्षित करना क्यों ज़रूरी है?
पुराने कैसेट नष्ट होने के साथ उनमें दर्ज रिकॉर्डिंग भी हमेशा के लिए खो सकती हैं। डिजिटल आर्काइविंग यह सुनिश्चित करती है कि आने वाली पीढ़ियाँ भी इन दुर्लभ रचनाओं को सुन सकें और क्षेत्रीय सांस्कृतिक पहचान जीवित रहे।
राष्ट्र प्रेस
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