चुनाव आयोग ने भवानीपुर मतगणना गड़बड़ी के ममता बनर्जी के आरोप खारिज किए, 15,000 वोटों से हुई थीं पराजित

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चुनाव आयोग ने भवानीपुर मतगणना गड़बड़ी के ममता बनर्जी के आरोप खारिज किए, 15,000 वोटों से हुई थीं पराजित

सारांश

पश्चिम बंगाल चुनाव में भवानीपुर से 15,000 से अधिक मतों से हारने के बाद ममता बनर्जी ने मतगणना में गड़बड़ी का आरोप लगाया — लेकिन चुनाव आयोग ने उनके हर दावे को 'निराधार और मनगढ़ंत' बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। सीसीटीवी बंद होने से लेकर धक्का-मुक्की तक, DEO ने एक-एक आरोप का खंडन किया।

मुख्य बातें

चुनाव आयोग ने 5 मई को ममता बनर्जी के भवानीपुर मतगणना गड़बड़ी के सभी आरोपों को "निराधार और मनगढ़ंत" बताकर खारिज किया।
ममता बनर्जी भवानीपुर विधानसभा से BJP नेता सुवेंदु अधिकारी से 15,000 से अधिक मतों के अंतर से हारीं।
DEO कार्यालय ने स्पष्ट किया कि सीसीटीवी कैमरे मतगणना के दौरान कभी बंद नहीं हुए।
बयान के अनुसार, सोमवार शाम मतगणना ममता बनर्जी के स्वयं के आग्रह पर कुछ देर के लिए रोकी गई थी।
सुवेंदु अधिकारी नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र से भी निर्वाचित हुए।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मंगलवार, 5 मई को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें उन्होंने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र की मतगणना में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। कोलकाता (दक्षिण) के जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) कार्यालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर ममता बनर्जी के सभी दावों को "निराधार और मनगढ़ंत" करार दिया। इस पराजय में ममता बनर्जी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और निवर्तमान विपक्ष नेता सुवेंदु अधिकारी से 15,000 से अधिक मतों के अंतर से हारी थीं।

ममता बनर्जी के आरोप क्या थे

ममता बनर्जी ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि दक्षिण कोलकाता के सखावत मेमोरियल गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज में स्थित मतगणना केंद्र पर प्रक्रिया में हेरफेर हुई। उन्होंने यह भी दावा किया कि मतगणना के दौरान केंद्रों में लगे सीसीटीवी कैमरे जानबूझकर बंद कर दिए गए थे और मतगणना कर्मियों द्वारा उनके साथ धक्का-मुक्की की गई। इसके अलावा, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतगणना प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी।

चुनाव आयोग का खंडन

DEO कार्यालय ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि मतगणना प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित सभी उचित प्रक्रियाओं, अधिनियमों, नियमों और विनियमों के अनुरूप "स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी" तरीके से संपन्न हुई। सीसीटीवी बंद होने के दावे को सीधे नकारते हुए बयान में कहा गया कि "सीसीटीवी कभी बंद नहीं किया गया था।" TMC उम्मीदवार और मुख्यमंत्री के साथ कथित धक्का-मुक्की की घटना को भी "निराधार और मनगढ़ंत कहानी" बताया गया।

मतगणना रोकने का विवाद

DEO कार्यालय ने यह भी उल्लेख किया कि सोमवार शाम को ममता बनर्जी के स्वयं के आग्रह पर कुछ समय के लिए मतगणना रोकी गई थी। बयान के अनुसार, दिशानिर्देशों के तहत उन्हें उचित सूचना दिए जाने के बाद ही मतगणना प्रक्रिया पुनः आरंभ की गई। यह तथ्य ममता बनर्जी के उस दावे को कमज़ोर करता है कि प्रक्रिया में उनकी पार्टी को नज़रअंदाज़ किया गया।

चुनाव परिणाम और राजनीतिक संदर्भ

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से सुवेंदु अधिकारी से 15,000 से अधिक मतों के अंतर से पराजित हुईं। गौरतलब है कि अधिकारी पूर्वी मिदनापुर जिले के अपने गृह क्षेत्र नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र से भी निर्वाचित हुए। यह ऐसे समय में आया है जब TMC पश्चिम बंगाल में सत्ता में वापसी की उम्मीद लगाए बैठी थी। ममता बनर्जी की इस पराजय को राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

आगे क्या होगा

चुनाव आयोग के इस स्पष्ट खंडन के बाद ममता बनर्जी के पास कानूनी विकल्पों की राह ही बचती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि TMC अपने आरोपों पर कायम रहती है, तो वह उच्च न्यायालय में चुनाव याचिका दायर कर सकती है। हालांकि, DEO के बयान ने इस मामले में चुनाव आयोग का रुख स्पष्ट कर दिया है, जिससे ऐसी याचिका की सफलता की संभावना सीमित मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ पराजित पक्ष संस्थागत प्रक्रिया पर सवाल उठाकर जनाधार को एकजुट रखने की कोशिश करता है। हालांकि, DEO के बयान ने न केवल आरोपों का खंडन किया, बल्कि यह भी उजागर किया कि मतगणना स्वयं ममता के आग्रह पर रोकी गई थी — जो उनके ही दावों को कमज़ोर करता है। 15,000 से अधिक मतों का अंतर किसी मामूली हेरफेर से नहीं पाटा जा सकता, और यह तथ्य TMC के आरोपों की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। असली सवाल यह है कि क्या यह पराजय TMC की संगठनात्मक कमज़ोरी को दर्शाती है, जिसे स्वीकार करने की बजाय बाहरी कारणों पर मढ़ा जा रहा है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के किन आरोपों को खारिज किया?
चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के उन सभी आरोपों को खारिज किया जिनमें भवानीपुर मतगणना में गड़बड़ी, सीसीटीवी कैमरे बंद करने और मतगणना कर्मियों द्वारा धक्का-मुक्की का उल्लेख था। DEO कार्यालय ने इन्हें 'निराधार और मनगढ़ंत' बताया।
भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी कितने मतों से हारीं?
ममता बनर्जी भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से BJP नेता सुवेंदु अधिकारी से 15,000 से अधिक मतों के अंतर से पराजित हुईं। यह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के सबसे चर्चित परिणामों में से एक रहा।
क्या भवानीपुर में सीसीटीवी कैमरे बंद हुए थे?
नहीं। DEO कार्यालय ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि मतगणना के दौरान सीसीटीवी कैमरे कभी बंद नहीं किए गए। ममता बनर्जी का यह दावा 'निराधार' पाया गया।
सुवेंदु अधिकारी ने किन-किन सीटों से जीत दर्ज की?
सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से ममता बनर्जी को 15,000 से अधिक मतों से हराया। इसके अलावा वे पूर्वी मिदनापुर जिले के अपने गृह क्षेत्र नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र से भी निर्वाचित हुए।
मतगणना के दौरान प्रक्रिया क्यों रोकी गई थी?
DEO कार्यालय के बयान के अनुसार, सोमवार शाम मतगणना ममता बनर्जी के स्वयं के आग्रह पर कुछ समय के लिए रोकी गई थी। दिशानिर्देशों के अनुसार उन्हें सूचना दिए जाने के बाद प्रक्रिया पुनः आरंभ की गई।
राष्ट्र प्रेस
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