ईडी ने भूषण स्टील प्रमोटर नीरज सिंघल की पत्नी की ₹58.34 करोड़ की संपत्ति जब्त की
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्ववर्ती भूषण स्टील लिमिटेड (बीएसएल) के प्रमोटर नीरज सिंघल की पत्नी रितु सिंघल की ₹58.34 करोड़ की चल और अचल संपत्तियाँ 24 जून 2026 को जब्त कर ली हैं। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है और वित्तीय संस्थानों को हुए ₹11,446.73 करोड़ के कथित नुकसान से जुड़े बड़े मामले का हिस्सा है।
जब्त संपत्तियों का ब्यौरा
ईडी के अनुसार, जब्त की गई संपत्तियों में मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित भूमि और आवासीय संपत्ति के रूप में अचल संपत्तियाँ शामिल हैं। इसके अलावा रितु सिंघल के नाम पर धारित इक्विटी शेयर और बैंक बैलेंस के रूप में चल संपत्तियाँ भी इसमें शामिल हैं। ईडी का कहना है कि ये संपत्तियाँ पूर्ववर्ती बीएसएल से वैध लेनदेन की आड़ में किए गए धन के हेरफेर से अर्जित की गई थीं।
मामले की पृष्ठभूमि और जाँच का आधार
ईडी ने यह जाँच गंभीर धोखाधड़ी जाँच कार्यालय (एसएफआईओ) द्वारा पूर्व भूषण स्टील लिमिटेड, नीरज सिंघल और अन्य के विरुद्ध दायर आपराधिक शिकायत के आधार पर शुरू की थी। जाँच में सामने आया कि नीरज सिंघल और उनके सहयोगियों ने वैध व्यावसायिक लेनदेन की आड़ में कंपनी से धनराशि का गबन किया, जिससे वित्तीय संस्थानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
गौरतलब है कि जाँच में यह भी उजागर हुआ कि हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड से खरीदी गई जस्ता सिल्लियाँ आरोपियों द्वारा खुले बाज़ार में कथित तौर पर अवैध रूप से बेची गईं, जिससे प्राप्त नकदी का उपयोग विभिन्न पेनी स्टॉक कंपनियों के माध्यम से फर्जी दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) के रूप में दिखाया गया।
पूर्व में हुई जब्ती की कार्रवाइयाँ
यह पहली बार नहीं है जब ईडी ने इस मामले में कार्रवाई की है। इससे पहले 8 नवंबर 2021 को ₹61.38 करोड़ और 6 मार्च 2024 को ₹367 करोड़ की संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त की जा चुकी हैं। ताज़ा जब्ती के साथ इस मामले में कुल संलग्न संपत्तियों का आँकड़ा अब काफी बड़ा हो गया है।
अदालती कार्यवाही की स्थिति
ईडी ने नीरज सिंघल, रितु सिंघल और अन्य आरोपियों के खिलाफ 8 अगस्त 2023 को एक अभियोग शिकायत और 7 मार्च 2024 को एक पूरक अभियोग शिकायत दर्ज की है। पीएमएलए कोर्ट ने दोनों शिकायतों का संज्ञान ले लिया है, और मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।
आगे क्या होगा
यह मामला उन बड़े कॉर्पोरेट धोखाधड़ी प्रकरणों में से एक है जिनमें ईडी वर्षों से जाँच जारी रखे हुए है। ताज़ा जब्ती से स्पष्ट है कि प्रवर्तन एजेंसी मामले के सभी आरोपियों और उनसे जुड़े व्यक्तियों की संपत्तियों की बारीकी से पड़ताल कर रही है। अदालत में आगे की सुनवाई से यह तय होगा कि जब्त संपत्तियाँ स्थायी रूप से राजसात की जाएंगी या नहीं।