पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद हिंसा: पहली बार जीतने वाली BJP भी बनी निशाना, शुभेंदु के सचिव की हत्या

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पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद हिंसा: पहली बार जीतने वाली BJP भी बनी निशाना, शुभेंदु के सचिव की हत्या

सारांश

पश्चिम बंगाल में इतिहास बदल गया — इस बार हिंसा का निशाना हारने वाला नहीं, जीतने वाला बना। 4 मई के नतीजों के बाद BJP के कई सदस्यों की हत्या हुई, जिनमें शुभेंदु अधिकारी के सचिव चंद्रनाथ रथ भी शामिल हैं। दशकों पुरानी बंगाल की राजनीतिक हिंसा की संस्कृति एक नए और खतरनाक मोड़ पर है।

मुख्य बातें

4 मई 2026 के चुनावी नतीजों के बाद पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा भड़की।
पहली बार चुनाव जीतने वाली पार्टी BJP के कई सदस्य हिंसा का शिकार बने।
शुभेंदु अधिकारी के निजी सचिव चंद्रनाथ रथ की बुधवार देर रात हत्या कर दी गई।
TMC प्रवक्ता रिजू दत्ता ने दावा किया कि उनकी अपनी पार्टी के सदस्य उन्हें परेशान कर रहे हैं।
अधिकारी ने चुनावी हिंसा से जुड़ी सभी फाइलें फिर से खोलने और पीड़ितों को न्याय दिलाने का संकल्प लिया।
बंगाल में कांग्रेस , वाम मोर्चा और TMC — तीनों के दौर में राजनीतिक हिंसा की संरचनात्मक निरंतरता देखी गई।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में 7 मई 2026 को एक अभूतपूर्व स्थिति सामने आई है — चुनाव जीतने वाली पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) खुद चुनाव के बाद की हिंसा का शिकार बन रही है। BJP के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सचिव चंद्रनाथ रथ की बुधवार देर रात बेरहमी से हत्या कर दी गई, जो इस हिंसा की सबसे गंभीर घटनाओं में से एक है। इतिहास में पहली बार बंगाल में विजयी दल को इस पैमाने पर चुनाव के बाद हिंसा झेलनी पड़ रही है।

बंगाल की राजनीतिक हिंसा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

'दम दम दवाई', 'शायस्ता कोरा' और 'चोमके देओआ' — ये महज मुहावरे नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की दशकों पुरानी राजनीतिक संस्कृति के प्रतीक हैं, जिनका अर्थ दबदबे से लेकर बदले तक कुछ भी हो सकता है। कांग्रेस, वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) — तीनों के शासनकाल में राजनीतिक हिंसा में बदलाव के बजाय निरंतरता ही अधिक देखी गई। हालाँकि, एक बात हमेशा एक जैसी रही — हिंसा का निशाना हमेशा हारने वाला पक्ष बनता था।

गौरतलब है कि 'दम दम दवाई' शब्द का चिकित्सा उपचार से कोई संबंध नहीं है। इसकी जड़ें 1960 के दशक के 'खाद्य आंदोलन' में हैं, जब सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में सुधार की माँग को लेकर बड़े पैमाने पर हिंसा भड़की थी। राजनीतिक शब्दावली में इसका अर्थ था — सरकार का विरोध करने वालों के लिए 'डायरेक्ट एक्शन' या कड़ी सजा।

कैडर-आधारित नियंत्रण और अपराधी-राजनीतिक गठजोड़

बंगाल की राजनीति में कैडर-आधारित क्षेत्रीय नियंत्रण, राजनीतिकृत स्थानीय प्रशासन और आपराधिक बिचौलियों का इस्तेमाल एक संरचनात्मक स्थिरांक रहा है। 'हाथकाटा', 'गालकाटा', 'काना', 'बाघा' जैसे उपनाम वाले स्थानीय 'दादाओं' और 'मस्तानों' का उपयोग चुनावों में बूथों, पंचायतों और विपक्ष पर वर्चस्व स्थापित करने के लिए किया जाता रहा।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने एक टीवी इंटरव्यू में राजनीति में हिंसा की भूमिका को स्वीकार किया था और कथित तौर पर अपनी संलिप्तता का भी उल्लेख किया था। उन्हें खुद वामपंथी गुंडों ने परेशान किया था, और वे मौत से बाल-बाल बचे, अंडरग्राउंड हुए और कोलकाता में कांग्रेस के एक वरिष्ठ राज्य नेता के घर पर छिपते रहे।

वाम मोर्चे की 'वैज्ञानिक धांधली' और नंदीग्राम का दंश

वाम मोर्चे के शासनकाल में 'वैज्ञानिक धांधली' शब्द ने मुख्यधारा में जगह बनाई। इसका अर्थ था — मतदाता सूची में हेरफेर, बूथ प्रबंधन, मतदान से पहले और मतदान के दिन डराना-धमकाना, और ऐसे 'कब्जे वाले' इलाके जहाँ विपक्ष प्रचार नहीं कर सकता था। 1970 के दशक की शुरुआत में कांग्रेस-समर्थित युवा गिरोहों और पुलिस की ज्यादतियों के आरोप लगे थे।

नंदीग्राम की घटना ने वामपंथ की साख को गहरा नुकसान पहुँचाया। भूमि अधिग्रहण-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की गोलीबारी और झड़पें राज्य-समर्थित जबरदस्ती का प्रतीक बन गईं। सीपीआई (एम) आधिकारिक तौर पर वैचारिक अनुशासन का दावा करती थी, लेकिन 'यूनियनों' और 'स्थानीय समितियों' पर रंगदारी और डराने-धमकाने के आरोप लगते रहे।

TMC शासन: 'कट मनी' और विकेंद्रित बाहुबल

2011 में तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद आलोचकों ने कहा कि जबरदस्ती की संगठनात्मक मशीनरी खत्म नहीं हुई, उसने बस हाथ बदल लिए। TMC शासन में बाहुबलियों का प्रभाव विकेंद्रित हुआ और 'कट मनी' की राजनीति का बोलबाला हो गया — यह एक ऐसा सच है जिसकी आलोचना खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी की थी।

2018 के पंचायत चुनाव इसलिए बदनाम हुए क्योंकि खबरों के अनुसार ग्रामीण बंगाल के कुछ हिस्सों में विपक्ष के कई उम्मीदवार अपना नामांकन तक दाखिल नहीं कर पाए। बीरभूम के 'बेताज बादशाह' माने जाने वाले अनुब्रत मंडल पर खुले तौर पर भड़काऊ बयान देने और आक्रामक हथकंडों को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे।

4 मई के नतीजों के बाद की हिंसा और आगे का रास्ता

4 मई 2026 को आए चुनावी नतीजों के बाद BJP, कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों ने TMC कार्यकर्ताओं पर अपने विरोधियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। लेकिन इस बार अभूतपूर्व रूप से, चुनाव जीतने वाले BJP के कई सदस्यों की भी बेरहमी से हत्या कर दी गई।

TMC के प्रवक्ता रिजू दत्ता ने दावा किया कि 4 मई के नतीजों के बाद BJP नेताओं ने उनके साथ अच्छा बर्ताव किया, जबकि उनकी अपनी पार्टी के सदस्य उन्हें परेशान कर रहे हैं। वहीं कुछ अन्य लोगों ने पार्टी के पतन और हिंसा के लिए खुद TMC नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है।

शुभेंदु अधिकारी — जिन्होंने ममता बनर्जी को उनके गढ़ भवानीपुर में हराया — ने कहा है कि नया प्रशासन चुनाव के दौरान हुई हिंसा से जुड़ी सभी फाइलों को फिर से खोलने का इरादा रखता है, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके। यह देखना होगा कि क्या बंगाल की दशकों पुरानी राजनीतिक हिंसा की संस्कृति इस बार वास्तव में बदलती है या सत्ता के हस्तांतरण के साथ केवल निशाना बदलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा क्यों भड़की?
4 मई 2026 के चुनावी नतीजों के बाद BJP, TMC और वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं के बीच व्यापक हिंसा हुई। इस बार अभूतपूर्व रूप से चुनाव जीतने वाली BJP के कई सदस्य भी हिंसा का शिकार बने, जो बंगाल के राजनीतिक इतिहास में पहली बार हुआ है।
चंद्रनाथ रथ कौन थे और उनकी हत्या कैसे हुई?
चंद्रनाथ रथ BJP के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सचिव थे। उनकी हत्या बुधवार देर रात की गई, जो 4 मई के चुनावी नतीजों के बाद हुई हिंसा की सबसे गंभीर घटनाओं में से एक मानी जा रही है।
बंगाल में राजनीतिक हिंसा की परंपरा कब से है?
बंगाल में राजनीतिक हिंसा की जड़ें 1960 के दशक के 'खाद्य आंदोलन' तक जाती हैं। कांग्रेस, वाम मोर्चा और TMC — तीनों के शासनकाल में कैडर-आधारित क्षेत्रीय नियंत्रण और आपराधिक बिचौलियों का इस्तेमाल जारी रहा, हालाँकि हर बार हिंसा का निशाना हारने वाला पक्ष बनता था।
TMC प्रवक्ता रिजू दत्ता ने क्या दावा किया?
TMC प्रवक्ता रिजू दत्ता ने दावा किया कि 4 मई के नतीजों के बाद BJP नेताओं ने उनके साथ अच्छा बर्ताव किया, जबकि उनकी अपनी पार्टी के सदस्य उन्हें परेशान कर रहे हैं। कुछ अन्य लोगों ने पार्टी के पतन और हिंसा के लिए खुद TMC नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है।
शुभेंदु अधिकारी ने हिंसा पर क्या कहा?
शुभेंदु अधिकारी — जिन्होंने ममता बनर्जी को भवानीपुर में हराया — ने कहा कि नया प्रशासन चुनाव के दौरान हुई हिंसा से जुड़ी सभी फाइलों को फिर से खोलेगा ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके।
राष्ट्र प्रेस
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