भारतीय न्याय संहिता से न्याय प्रक्रिया हुई तेज: गृह मंत्रालय ने लोकसभा में दी जानकारी
सारांश
मुख्य बातें
गृह मंत्रालय ने मंगलवार, 21 जुलाई को लोकसभा में बताया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) 2023 को औपनिवेशिक दौर के पुराने कानूनों की जगह इसलिए लागू किया गया ताकि आपराधिक न्याय प्रणाली को आधुनिक, तेज और पारदर्शी बनाया जा सके। ये तीनों कानून 1 जुलाई 2024 से प्रभाव में आए और इन्हें 25 दिसंबर 2023 को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया था।
मुख्य घटनाक्रम
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने सदन में एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि नए प्रावधानों से मामलों का तेज और निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित हुआ है, जिससे कानूनी प्रणाली में जनता का भरोसा बढ़ा है। उन्होंने बताया कि इन सुधारों की नींव विधि आयोग और आपराधिक न्याय प्रणाली में सुधार का प्रस्ताव देने वाली विभिन्न समितियों की सिफारिशों पर रखी गई है।
गौरतलब है कि गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने अपनी 111वीं (2005), 128वीं (2006) और 146वीं (2010) रिपोर्ट में यह सिफारिश की थी कि कानूनों में टुकड़ों-टुकड़ों में बदलाव की बजाय संसद के माध्यम से आपराधिक न्याय प्रणाली की व्यापक समीक्षा की जाए।
महिला एवं बाल सुरक्षा को प्राथमिकता
मंत्री ने बताया कि नए कानूनों में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की जांच को विशेष प्राथमिकता दी गई है। प्रावधान के अनुसार, सूचना दर्ज होने के दो महीने के भीतर जांच पूरी करना अनिवार्य है। इसके अलावा, मुकदमों में अनावश्यक देरी रोकने के लिए अधिकतम दो बार ही स्थगन देने का नियम बनाया गया है, जिससे समयबद्ध न्याय सुनिश्चित हो सके।
डिजिटल अनुप्रयोग: न्याय की नई तकनीक
न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए तीन प्रमुख डिजिटल उपकरण विकसित किए गए हैं। ई-साक्ष्य डिजिटल सबूतों को कानूनी, वैज्ञानिक और छेड़छाड़-रोधी तरीके से एकत्र करने, सुरक्षित रखने और इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रस्तुत करने में सहायक है। ई-समन के माध्यम से समन इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजे जा सकते हैं, जिससे प्रक्रिया तेज और आसानी से ट्रैक करने योग्य बनती है।
न्याय-श्रुति (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) प्रणाली के ज़रिए आरोपी व्यक्तियों, गवाहों, पुलिस अधिकारियों, सरकारी वकीलों, वैज्ञानिक विशेषज्ञों और कैदियों की वर्चुअल उपस्थिति सुनिश्चित की जा सकती है, जिससे अदालती कार्यवाही में भौगोलिक बाधाएं कम होती हैं।
समयबद्ध न्याय: मुख्य प्रावधान
नए कानूनों के तहत न्याय प्रक्रिया के अहम चरणों — जैसे प्रारंभिक जांच, आगे की जांच, पीड़ित और आरोपी को दस्तावेज उपलब्ध कराना, फैसला सुनाना और दया याचिका दाखिल करना — को सुव्यवस्थित करते हुए तय समय-सीमा के भीतर पूरा करना अनिवार्य किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या लंबे समय से चिंता का विषय रही है।
आगे की राह
BNS के कुछ विशेष प्रावधानों को छोड़कर शेष सभी प्रावधान और BSA 1 जुलाई 2024 से लागू हो चुके हैं। तकनीक-आधारित प्रक्रियाओं, तेज जांच और पीड़ित-केंद्रित व्यवस्थाओं के साथ यह सुधार भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि ज़मीनी स्तर पर इनका क्रियान्वयन कितनी तेज़ी से और कितने प्रभावी ढंग से होता है।