शीर्ष 500 सूचीबद्ध कंपनियों में केवल 9 महिला सीईओ और 25 एमडी: सरकारी आंकड़े
सारांश
मुख्य बातें
भारत की शीर्ष 500 सूचीबद्ध कंपनियों में महिला नेतृत्व की स्थिति चिंताजनक रूप से सीमित है — कारोबार के आधार पर चुनी गई इन कंपनियों में मात्र 9 महिला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और 25 महिला प्रबंध निदेशक (एमडी) कार्यरत हैं। यह जानकारी 12 अगस्त 2026 को लोकसभा में कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा द्वारा एक प्रश्न के लिखित उत्तर में सामने आई, जो MCA21 डेटाबेस के आंकड़ों पर आधारित है।
शीर्ष पदों पर महिलाओं की स्थिति
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, शीर्ष 500 सूचीबद्ध कंपनियों में कुल मिलाकर 860 महिला निदेशक और बोर्ड सदस्य हैं। इनमें 738 निदेशक, 67 पूर्णकालिक निदेशक, 25 प्रबंध निदेशक, 18 अतिरिक्त निदेशक और 12 मनोनीत निदेशक शामिल हैं। इसके अलावा, 22 महिला मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) की भी जानकारी इन कंपनियों ने दी है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर कॉर्पोरेट विविधता को लेकर दबाव बढ़ रहा है और भारत में भी बोर्ड स्तर पर लैंगिक समानता की चर्चा तेज़ हो रही है।
व्यापक कॉर्पोरेट तस्वीर
शीर्ष पदों पर प्रतिनिधित्व भले ही सीमित हो, लेकिन व्यापक कॉर्पोरेट परिदृश्य में महिलाओं की भागीदारी अपेक्षाकृत बेहतर है। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के अनुसार, देशभर में 39 लाख कुल निदेशकों में से लगभग 11 लाख महिलाएं वर्तमान में सक्रिय कंपनियों में निदेशक के रूप में जुड़ी हुई हैं।
गौरतलब है कि भारत में इस समय लगभग 21.4 लाख सक्रिय कंपनियाँ और 5.06 लाख से अधिक सक्रिय सीमित देयता भागीदारी (LLP) पंजीकृत हैं। पिछले एक दशक में लगभग 15.5 लाख नई कंपनियाँ पंजीकृत हुई हैं।
नीतिगत रुख और सरकार की प्रतिक्रिया
मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने अपने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि मंत्रालय ने उन बाधाओं का कोई विशिष्ट अध्ययन नहीं किया है जो महिला निदेशकों को वरिष्ठ नेतृत्व भूमिकाओं में आगे बढ़ने से रोकती हैं। साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि वर्तमान में कोई नए नीतिगत उपाय, प्रोत्साहन या विविधता लक्ष्य विचाराधीन नहीं हैं।
मंत्री ने यह भी बताया कि कंपनी अधिनियम, 2013 में 'चेयरपर्सन' या 'चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर' जैसे पदों को परिभाषित नहीं किया गया है, इसलिए मंत्रालय इन पदों से संबंधित आंकड़े नहीं रखता।
अनुपालन उल्लंघन और जुर्माना
कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) ने यह भी खुलासा किया कि जो कंपनियाँ महिला निदेशक की अनिवार्य नियुक्ति के नियम का पालन करने में विफल रहीं, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। 2021-22 से 2025-26 के बीच कंपनी रजिस्ट्रारों ने ऐसे उल्लंघनों के लिए 50 न्यायनिर्णय आदेश पारित किए और कुल ₹71.01 लाख का जुर्माना लगाया।
न्यायनिर्णय आदेशों की संख्या 2021-22 में मात्र 2 से बढ़कर 2023-24 में 19 के शिखर पर पहुँची, जिसके बाद 2024-25 में 11 और 2025-26 में 8 रह गई।
आगे की राह
आलोचकों का कहना है कि महज़ बोर्ड में एक महिला निदेशक की अनिवार्यता पर्याप्त नहीं है — असली बदलाव तब आएगा जब सीईओ और एमडी जैसे निर्णायक पदों पर महिलाओं की संख्या बढ़ेगी। जब तक सरकार इस अंतर के कारणों का अध्ययन नहीं करती और लक्षित नीतियाँ नहीं बनाती, शीर्ष नेतृत्व में लैंगिक विविधता की यह खाई बनी रहने की आशंका है।