हिंदू, हिंदुत्व और सनातन विमर्श ने बदला चुनावी समीकरण, बंगाल-असम में भाजपा की प्रचंड जीत
सारांश
राम मंदिर और धार्मिक आस्था का चुनावी असर
गौरतलब है कि 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा हुई और उससे पहले व बाद में कांग्रेस के कई नेताओं ने इसे BJP का प्रायोजित कार्यक्रम बताया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इसने एक बड़े वर्ग की धार्मिक आस्था पर चोट पहुँचाने का काम किया। बिहार में भी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता शिवानंद तिवारी समेत अन्य नेताओं के बयानों को लेकर विवाद उठे, जिन्हें BJP और उसके सहयोगियों ने राजनीतिक मुद्दा बनाया। राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बनने के पीछे गठबंधन और राजनीतिक समीकरण के साथ ही तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 'सुशासन बाबू' की छवि भी मददगार बनी।
आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्षी दल इस धार्मिक-सांस्कृतिक विमर्श के मुकाबले अपनी रणनीति कैसे तय करते हैं और क्या वे मतदाताओं की धार्मिक संवेदनाओं के प्रति अधिक सतर्क रुख अपनाते हैं।
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल और असम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को प्रचंड बहुमत मिला है, जबकि तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) को करारी हार का सामना करना पड़ा है। 5 मई 2026 को सामने आए इन चुनावी नतीजों के विश्लेषण में राजनीतिक विशेषज्ञों ने माना है कि 'हिंदू', 'हिंदुत्व' और 'सनातन' को लेकर विपक्षी नेताओं द्वारा दिए गए विवादित बयानों ने मतदाताओं के एक बड़े वर्ग की धार्मिक भावनाओं को प्रभावित किया और चुनावी परिणामों पर इसकी छाप स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
धार्मिक विमर्श का चुनावी नैरेटिव पर असर
देश के विभिन्न राज्यों में चुनाव से पूर्व 'हिंदू' और 'सनातन' को लेकर दिए गए विवादित बयानों ने सियासी विमर्श को गहराई से प्रभावित किया। BJP ने इन बयानों को अपने चुनावी नैरेटिव का केंद्रीय हिस्सा बनाया और इन्हें मतदाताओं तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि इन टिप्पणियों ने मतदाताओं के रुझान को निर्णायक रूप से प्रभावित किया।
पश्चिम बंगाल: ध्रुवीकरण और TMC का बैकफुट
पश्चिम बंगाल में चुनावी मुकाबले के दौरान हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण का मुद्दा प्रमुखता से उभरा, जिसे BJP ने अपने चुनावी अभियान का अहम हिस्सा बनाया। दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं के मक्का-मदीना से जुड़े बयानों ने पार्टी को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इसने मतदाताओं के एक वर्ग को प्रभावित किया और BJP को चुनावी बढ़त हासिल करने में सहायता मिली।
तमिलनाडु: उदयनिधि का 'सनातन' बयान और राष्ट्रीय विवाद
तमिलनाडु में DMK नेता उदयनिधि स्टालिन द्वारा 2023 में 'सनातन धर्म' पर की गई टिप्पणी ने देशभर में राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था। BJP ने इस बयान को लगातार