हावड़ा स्टेशन पर NSG-RPF की संयुक्त मॉक ड्रिल, वंदे भारत एक्सप्रेस में आपात निकासी की तैयारी जाँची
सारांश
मुख्य बातें
हावड़ा स्टेशन पर 28 सितंबर 2026 की रात नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने संयुक्त मॉक ड्रिल आयोजित की, जिसमें वंदे भारत एक्सप्रेस को केंद्र में रखकर किसी बड़ी आपदा या आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने की क्षमता परखी गई। प्रतिदिन लगभग 10 लाख यात्रियों की आवाजाही वाला यह स्टेशन देश के सबसे व्यस्त रेलवे केंद्रों में से एक है, और यह अभ्यास उसकी सुरक्षा-तैयारी को व्यावहारिक धरातल पर परखने का प्रयास था।
मॉक ड्रिल का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
हावड़ा डिवीजन के डीआरएम विशाल कपूर ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि इस अभ्यास का मुख्य मकसद यह जाँचना था कि किसी अचानक घटित होने वाली बड़ी घटना या प्राकृतिक व मानवीय आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य कितनी तेज़ी और सटीकता से संचालित किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह के अभ्यास सुरक्षा-ढाँचे की कमज़ोरियाँ उजागर करने और उन्हें दूर करने में सहायक होते हैं।
वंदे भारत को क्यों चुना गया
अभ्यास के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस को विशेष रूप से इसलिए चुना गया, क्योंकि इसकी संरचना पारंपरिक ट्रेनों से भिन्न है। इसके डिब्बों की बनावट, दरवाज़ों की प्रणाली और यात्री-क्षमता को देखते हुए आपात निकासी के लिए अलग रणनीति की आवश्यकता होती है। अभ्यास के दौरान यह व्यावहारिक रूप से प्रदर्शित किया गया कि किस प्रकार बचाव दलों को तैनात किया जाए, यात्रियों को कैसे सुरक्षित बाहर निकाला जाए और मौके पर राहत कार्य कैसे चलाया जाए।
मुख्य घटनाक्रम और भागीदारी
इस संयुक्त अभ्यास में NSG कमांडो और RPF जवान दोनों शामिल रहे। गौरतलब है कि इससे पहले राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की ओर से भी ट्रेन दुर्घटना की स्थिति में राहत-बचाव अभियान को लेकर एक मॉक ड्रिल आयोजित की जा चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों और प्रीमियम ट्रेनों की सुरक्षा को उच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
हावड़ा स्टेशन की रणनीतिक अहमियत
हावड़ा स्टेशन पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वी भारत का सबसे बड़ा रेलवे जंक्शन है। यहाँ से प्रतिदिन लगभग 10 लाख यात्री गुज़रते हैं, जो इसे किसी भी सुरक्षा चूक की स्थिति में अत्यंत संवेदनशील बनाता है। यह अभ्यास यह भी सुनिश्चित करता है कि विभिन्न सुरक्षा एजेंसियाँ वास्तविक संकट के समय एक-दूसरे के साथ समन्वित होकर काम कर सकें।
आगे की दिशा
इस तरह की संयुक्त मॉक ड्रिल से मिले अनुभव के आधार पर सुरक्षा प्रोटोकॉल में आवश्यक सुधार किए जाने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित अंतराल पर ऐसे अभ्यास न केवल सुरक्षाकर्मियों को तैयार रखते हैं, बल्कि यात्रियों का भरोसा भी बनाए रखते हैं।