हैदराबाद: जुबली हिल्स थाना प्रभारी यौन शोषण, ब्लैकमेल के आरोप में निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
हैदराबाद के जुबली हिल्स थाने के प्रभारी निरीक्षक यू. श्रीनिवासुलु रेड्डी को 29 जुलाई 2026 को संगारेड्डी जिले की एक 31 वर्षीय महिला द्वारा यौन शोषण, जबरन गर्भपात, ब्लैकमेल और मारपीट के कथित आरोपों के बाद निलंबित कर दिया गया। हैदराबाद के पुलिस आयुक्त वीसी सज्जनार ने मंगलवार देर रात यह निलंबन आदेश जारी किया।
मामले का घटनाक्रम
महिला की शिकायत के अनुसार, यह मामला 2021 का है, जब वह एक पारिवारिक विवाद के संदर्भ में अमीनपुर थाने गई थीं। उस समय यू. श्रीनिवासुलु वहाँ निरीक्षक के पद पर तैनात थे। महिला का आरोप है कि बाद में अधिकारी ने उसी मामले का बहाना बनाकर उससे संपर्क साधा और धीरे-धीरे यौन संबंध बनाने का दबाव डालने लगा।
महिला ने आगे आरोप लगाया कि अधिकारी ने उसे केपीएचबी स्थित अपने आवास पर बुलाया और मना करने पर घर आने की धमकी दी। कथित तौर पर अधिकारी ने उसके घर पर उसका यौन शोषण किया। महिला का यह भी दावा है कि गर्भवती होने पर अधिकारी उसे अस्पताल ले गया, जहाँ उसका जबरन गर्भपात कराया गया।
ब्लैकमेल और धन उगाही के आरोप
महिला का आरोप है कि यू. श्रीनिवासुलु उसके निजी वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर उससे ₹2 करोड़ की माँग कर रहा था। महिला ने दावा किया कि उसने अलग-अलग अवसरों पर अधिकारी को कई हजार रुपये भी दिए। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारी ने जुबली हिल्स थाने में प्रभारी पद पाने के लिए ₹25 लाख की रिश्वत दी थी।
पुलिस महानिदेशक से शिकायत और निलंबन
महिला ने पुलिस महानिदेशक सी.वी. आनंद से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें यौन शोषण, जबरन गर्भपात, मारपीट और धमकी के आरोप शामिल थे। शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारी को पहले 'वैकेंसी रिजर्व' में भेजा गया। प्रारंभिक जाँच में आरोप गंभीर पाए जाने पर पुलिस आयुक्त वीसी सज्जनार ने विभागीय जाँच पूरी होने तक उन्हें निलंबित करने का आदेश जारी किया।
आरोपी अधिकारी का पक्ष
यू. श्रीनिवासुलु रेड्डी ने सभी आरोपों से इनकार किया है। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को बताया कि महिला ने उन्हें धमकाया और उनसे पैसे वसूले। दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावों के बीच जाँच एजेंसी शिकायतकर्ता महिला और निलंबित अधिकारी, दोनों के बयान दर्ज करेगी।
आगे की जाँच
विभागीय जाँच के तहत पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज करेगी और साक्ष्यों की समीक्षा करेगी। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पुलिस बल में आंतरिक जवाबदेही और महिला सुरक्षा को लेकर देशभर में बहस तेज है। जाँच के नतीजे अधिकारी के सेवा भविष्य और संभावित आपराधिक कार्यवाही की दिशा तय करेंगे।