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भारतीय वायुसेना के लिए ₹1 लाख करोड़ में 60 मध्यम परिवहन विमान: AN-32 की जगह लेगा नया बेड़ा

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भारतीय वायुसेना के लिए ₹1 लाख करोड़ में 60 मध्यम परिवहन विमान: AN-32 की जगह लेगा नया बेड़ा

सारांश

सोवियत-युगीन AN-32 विमानों को विदाई देने का वक्त आ गया है। ₹1 लाख करोड़ के इस कार्यक्रम में 60 में से 48 विमान भारत में बनेंगे — यह सैन्य आधुनिकीकरण के साथ-साथ घरेलू एयरोस्पेस उद्योग के लिए भी ऐतिहासिक मोड़ हो सकता है।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्रालय कथित तौर पर ₹1 लाख करोड़ की लागत से 60 मध्यम परिवहन विमान खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
ये विमान भारतीय वायुसेना के पुराने एंटोनोव AN-32 बेड़े की जगह लेंगे और 18–30 टन तक भार वहन करने में सक्षम होंगे।
60 में से 12 विमान फ्लाईअवे अवस्था में मिलेंगे, जबकि 48 विमानों का निर्माण भारत में होगा।
संभावित दावेदारों में लॉकहीड मार्टिन C-130J-30 और एम्ब्रेयर C-390 मिलेनियम शामिल हैं।
एम्ब्रेयर ने भारतीय कार्यक्रम के लिए महिंद्रा डिफेंस के साथ साझेदारी की है।
जून 2026 के 'ऑपरेशन अमिस्ताद' में IAF के C-17 ग्लोबमास्टर III ने वेनेजुएला में राहत कार्यों में अहम भूमिका निभाई थी।

रक्षा मंत्रालय कथित तौर पर भारतीय वायुसेना (IAF) के पुराने पड़ चुके सोवियत-युगीन एंटोनोव AN-32 विमानों की जगह 60 मध्यम परिवहन विमान (Medium Transport Aircraft) खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, लगभग ₹1 लाख करोड़ के इस कार्यक्रम से न केवल वायुसेना की एयरलिफ्ट क्षमता आधुनिक होगी, बल्कि घरेलू एयरोस्पेस विनिर्माण को भी नई गति मिलेगी।

योजना का ढाँचा और स्वदेशीकरण

रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित खरीद में 60 विमानों में से 12 विमान पूर्णतः तैयार (फ्लाईअवे) अवस्था में प्राप्त किए जाएंगे, जबकि शेष 48 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इनमें उच्च स्तर की स्वदेशी सामग्री के उपयोग की अपेक्षा भी की गई है। गौरतलब है कि यह परियोजना केवल सैन्य आधुनिकीकरण तक सीमित नहीं रहेगी — यह देश में एक समृद्ध विमानन विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र की नींव भी रखेगी।

संभावित दावेदार विमान

नए विमानों में 18 से 30 टन तक की भार वहन क्षमता अपेक्षित है, जो AN-32 से अधिक है। लॉकहीड मार्टिन C-130J सुपर हरक्यूलिस, जिसे IAF पहले से संचालित करती है, इस श्रेणी में एक परिचित नाम है। इसके विस्तारित C-130J-30 संस्करण की अधिकतम पेलोड क्षमता लगभग 20 टन है।

दूसरा प्रमुख दावेदार ब्राज़ील की एयरोस्पेस कंपनी एम्ब्रेयर (Embraer) का C-390 मिलेनियम है — एक जेट इंजन-चालित नई पीढ़ी का सैन्य परिवहन विमान, जिसकी अधिकतम भार वहन क्षमता 26 टन है। C-390 की विशेषता यह है कि यह अस्थायी या कच्चे रनवे पर भी संचालन करने में सक्षम है। यह विमान सैन्य रसद के अलावा मेडिकल निकासी, खोज-बचाव अभियान, अग्निशमन और मानवीय सहायता मिशनों में भी काम आ सकता है। कई NATO सदस्य देश इसे पहले ही अपना चुके हैं।

एम्ब्रेयर-महिंद्रा की साझेदारी

औद्योगिक दृष्टि से यह परियोजना विशेष महत्व रखती है। रिपोर्ट के अनुसार, एम्ब्रेयर ने इस भारतीय कार्यक्रम के लिए महिंद्रा डिफेंस के साथ साझेदारी की है। प्रस्ताव में भारत में विनिर्माण और रखरखाव सुविधाएं विकसित करने की योजना भी शामिल है, जो 'मेक इन इंडिया' रक्षा पहल के अनुरूप है।

सामरिक और मानवीय महत्व

भारत की उत्तरी और पूर्वोत्तर सीमाएँ दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण सैन्य परिचालन क्षेत्रों में गिनी जाती हैं। ऐसे इलाकों में सैनिकों, हथियारों, रसद और राहत सामग्री की त्वरित आपूर्ति के लिए आधुनिक परिवहन विमान अपरिहार्य हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी सीमाओं पर सामरिक लचीलेपन को मज़बूत करने में जुटा है।

मानवीय अभियानों में भी इन विमानों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। जून 2026 में वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद चलाए गए 'ऑपरेशन अमिस्ताद' के दौरान IAF के C-17 ग्लोबमास्टर III विमानों ने भारतीय सेना की 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल की 41 सदस्यीय मेडिकल टीम, चिकित्सा उपकरण, राहत सामग्री और दो भीष्म क्यूब पोर्टेबल अस्पतालों को वेनेजुएला तक पहुँचाया था। नए विमान इस प्रकार की क्षमता को और विस्तार देंगे।

आगे क्या

यह कार्यक्रम अभी रिपोर्टों और रक्षा मंत्रालय की आंतरिक प्रक्रिया के स्तर पर है; औपचारिक खरीद अधिसूचना (RFP/RFI) अभी जारी नहीं हुई है। जो भी विमान चुना जाएगा, वह दशकों पुराने AN-32 बेड़े को सेवानिवृत्त कर IAF की परिवहन क्षमता को नई ऊँचाई देगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी। 48 विमानों के स्वदेशी निर्माण का दावा प्रभावशाली लगता है, मगर भारत के पिछले रक्षा निर्माण कार्यक्रमों में देरी और लागत वृद्धि की लंबी परंपरा रही है। एम्ब्रेयर-महिंद्रा साझेदारी संभावनाओं के द्वार खोलती है, परंतु यह भी देखना होगा कि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की शर्तें कितनी पारदर्शी हैं। उत्तरी और पूर्वोत्तर सीमाओं पर बढ़ते भार को देखते हुए यह खरीद विलंब का जोखिम नहीं उठा सकती।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय वायुसेना के 60 नए परिवहन विमान खरीद कार्यक्रम का उद्देश्य क्या है?
यह कार्यक्रम IAF के पुराने सोवियत-युगीन एंटोनोव AN-32 विमानों को आधुनिक मध्यम परिवहन विमानों से बदलने के लिए है। रिपोर्टों के अनुसार इसकी अनुमानित लागत ₹1 लाख करोड़ है।
इन 60 विमानों में से कितने भारत में बनेंगे?
रिपोर्ट के अनुसार, 60 में से 12 विमान फ्लाईअवे (पूर्णतः तैयार) अवस्था में मिलेंगे और शेष 48 विमानों का निर्माण भारत में उच्च स्वदेशी सामग्री के साथ किया जाएगा।
C-390 मिलेनियम विमान क्या है और यह भारत के लिए क्यों उपयुक्त माना जा रहा है?
C-390 मिलेनियम ब्राज़ीलियाई कंपनी एम्ब्रेयर का जेट-चालित नई पीढ़ी का सैन्य परिवहन विमान है, जिसकी अधिकतम पेलोड क्षमता 26 टन है। यह कच्चे रनवे पर उड़ान भरने में सक्षम है और कई NATO देश इसे अपना चुके हैं, जो इसे भारत की चुनौतीपूर्ण सीमाओं के लिए उपयुक्त बनाता है।
एम्ब्रेयर और महिंद्रा डिफेंस की साझेदारी का क्या स्वरूप है?
रिपोर्ट के अनुसार, एम्ब्रेयर ने इस भारतीय कार्यक्रम के लिए महिंद्रा डिफेंस के साथ साझेदारी की है। इस प्रस्ताव में भारत में विनिर्माण और रखरखाव सुविधाएं विकसित करने की योजना भी शामिल है।
भारत की सीमाओं पर आधुनिक परिवहन विमानों की आवश्यकता क्यों बढ़ी है?
भारत की उत्तरी और पूर्वोत्तर सीमाएँ विश्व के सबसे चुनौतीपूर्ण सैन्य परिचालन क्षेत्रों में गिनी जाती हैं, जहाँ सैनिकों, रसद और राहत सामग्री की त्वरित आपूर्ति अनिवार्य है। जून 2026 के 'ऑपरेशन अमिस्ताद' जैसे मानवीय अभियानों ने भी IAF की परिवहन क्षमता के विस्तार की ज़रूरत को रेखांकित किया है।
राष्ट्र प्रेस
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