आईआईटी मद्रास का ₹600–1,000 करोड़ का डीप-टेक वीसी फंड लॉन्च, 24–30 स्टार्टअप्स को मिलेगा बूस्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) ने 26 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में आयोजित एलुमनाई सम्मेलन 'संगम 2026' के दौरान आईआईटी मद्रास यूनिकॉर्न फ्रंटियर फंड के शुभारंभ की घोषणा की — जिसका लक्ष्य ₹600 करोड़ से ₹1,000 करोड़ तक की पूंजी जुटाना है। यह फंड आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क और यूनिकॉर्न इंडिया वेंचर्स की साझेदारी में स्थापित किया गया है, और फंड के 'फर्स्ट क्लोज' तक पहुँचने की भी पुष्टि की गई है। अब तक पूर्व छात्रों की ओर से ₹150 करोड़ से अधिक का निवेश इस फंड में आ चुका है।
फंड का ढाँचा और निवेश रणनीति
आईआईटी मद्रास यूनिकॉर्न फ्रंटियर फंड का प्राथमिक फोकस इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी-आधारित और इंजीनियरिंग-केंद्रित डीप-टेक स्टार्टअप्स पर रहेगा। फंड की कुल राशि का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पोर्टफोलियो निर्माण में लगाया जाएगा, जबकि शेष 40 प्रतिशत भविष्य के निवेश राउंड के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। पोर्टफोलियो का एक बड़ा हिस्सा उन डीप-टेक कंपनियों का होगा जो टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल 3-4 तक पहुँच चुकी हैं — अर्थात जो प्रयोगशाला से व्यावसायिक रूप की ओर बढ़ रही हैं।
फंड कुल 24 से 30 कंपनियों को सहायता देने का लक्ष्य रखता है। निवेश के प्रमुख क्षेत्रों में रोबोटिक्स, स्पेस टेक्नोलॉजी, डिफेंस टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और अन्य रणनीतिक फ्रंटियर टेक्नोलॉजी शामिल हैं। अधिकांश स्टार्टअप्स आईआईटी मद्रास के इकोसिस्टम से आने की संभावना है, हालाँकि देश के अन्य हिस्सों से उभरने वाले संभावनाशील डीप-टेक उद्यमों को भी जगह दी जाएगी।
पेशेंट कैपिटल की ज़रूरत: फंड का मूल उद्देश्य
भारतीय डीप-टेक क्षेत्र में 'पेशेंट कैपिटल' — यानी ऐसी दीर्घकालिक पूंजी जो तकनीक के पूरी तरह व्यावसायिक रूप लेने तक इंतज़ार कर सके — की गंभीर कमी रही है। डीप-टेक स्टार्टअप्स को सामान्य उपभोक्ता-केंद्रित स्टार्टअप्स की तुलना में तकनीक विकसित करने, परीक्षण करने और बाज़ार तक पहुँचाने में कहीं अधिक समय लगता है। नया फंड इसी लंबे विकास चक्र के दौरान वित्तीय और तकनीकी दोनों तरह का सहयोग सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के तहत टेक्नोलॉजी-संचालित आर्थिक वृद्धि पर ज़ोर दे रही है। गौरतलब है कि यह पहल पिछले साल आईआईटी मद्रास के संगम कार्यक्रम में की गई घोषणा को अमलीजामा पहनाती है, जिसमें संस्थान के रिसर्च और इनोवेशन इकोसिस्टम को एक समर्पित निवेश तंत्र से जोड़ने की परिकल्पना की गई थी।
संस्थान के नेतृत्व की राय
आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क एंड इनक्यूबेशन सेल के ग्रुप सीईओ नटराजन मालुपिल्लई ने कहा कि संस्थान के पास आरएंडडी में काम करने वाली बड़ी कंपनियों से लेकर शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स तक का मजबूत इनोवेशन इकोसिस्टम मौजूद है। उनके अनुसार, यह फंड उन 24 से 30 कंपनियों को आगे बढ़ाने में मदद करेगा जो भारत की आर्थिक वृद्धि में योगदान देने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने में सक्षम हों।
आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटी ने संगम 2026 के दौरान फंडिंग के लिए चुने गए स्टार्टअप्स की सूची की घोषणा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की 'विकसित भारत 2047' की परिकल्पना में भारत एक स्टार्टअप नेशन होगा, और यह वीसी फंड उस दिशा में एक ठोस कदम है। डीन (एलुमनाई और कॉर्पोरेट संबंध) प्रोफेसर अश्विन महालिंगम ने रेखांकित किया कि यह फंड पूर्व छात्रों को महज़ संस्थान को दान देने से आगे बढ़कर उसके इनोवेशन इकोसिस्टम में सीधे निवेश करने का अवसर देता है।
पूर्व छात्रों की भूमिका और सम्मेलन का संदर्भ
फंड की घोषणा आईआईटी मद्रास एलुमनाई एसोसिएशन के सातवें वार्षिक सम्मेलन 'संगम 2026' के मंच पर की गई, जो 26 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में आयोजित हुआ। इस वर्ष सम्मेलन की थीम 'आत्मनिर्भर भारत' रखी गई थी। सम्मेलन में पूर्व छात्र, फैकल्टी, विद्यार्थी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और अन्य हितधारक एक मंच पर एकत्र हुए।
उल्लेखनीय है कि पूर्व छात्रों ने अब तक ₹150 करोड़ से अधिक का निवेश इस फंड में किया है — जो न केवल वित्तीय प्रतिबद्धता, बल्कि आईआईटी मद्रास के इकोसिस्टम में गहरे विश्वास को भी दर्शाता है। आगामी समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि फंड 'सेकंड क्लोज' तक कब और किस पैमाने पर पहुँचता है।