31 जुलाई 2026
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आईएमए अध्यक्ष डॉ. नायक ने नीट-यूजी काउंसलिंग सुधार और एंटी-पेपर लीक कानून को बताया ऐतिहासिक कदम

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आईएमए अध्यक्ष डॉ. नायक ने नीट-यूजी काउंसलिंग सुधार और एंटी-पेपर लीक कानून को बताया ऐतिहासिक कदम

सारांश

IMA अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार नायक ने नीट-यूजी काउंसलिंग को 1-2 महीने में पूरा करने वाली नई तकनीकी प्रणाली और एंटी-पेपर लीक कानून का स्वागत किया। साथ ही एच1एन1 फ्लू को लेकर घबराने से मना किया और बिना प्रिस्क्रिप्शन एंटीबायोटिक लेने को AMR के लिए खतरनाक बताया।

मुख्य बातें

IMA के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.
अनिल कुमार नायक ने 31 जुलाई को नीट-यूजी काउंसलिंग सुधार और एंटी-पेपर लीक कानून का स्वागत किया।
नई काउंसलिंग प्रणाली से प्रवेश प्रक्रिया 5-6 महीने से घटकर 1-2 महीने में पूरी होगी।
एंटी-पेपर लीक कानून में प्रश्नपत्र एजेंसियाँ और जिम्मेदार अधिकारी भी दायरे में; फास्ट ट्रैक कोर्ट से शीघ्र सुनवाई का प्रावधान।
मानसून सीजन में एच1एन1 इन्फ्लूएंजा के मामलों पर डॉ.
नायक ने घबराने से मना किया; डॉक्टर की सलाह पर इलाज की अपील।
लगभग 90% वायरल बीमारियों में एंटीबायोटिक अनावश्यक; बिना प्रिस्क्रिप्शन दवा लेने से एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) का खतरा।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार नायक ने 31 जुलाई को नीट-यूजी काउंसलिंग प्रक्रिया में हुए सुधारों, एंटी-पेपर लीक कानून और देश में बढ़ते एच1एन1 इन्फ्लूएंजा के मामलों पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने नई काउंसलिंग व्यवस्था और पेपर लीक विरोधी कानून दोनों का स्वागत करते हुए कहा कि ये कदम मेडिकल शिक्षा में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में निर्णायक बदलाव हैं।

नीट-यूजी काउंसलिंग में क्या बदला

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के नेतृत्व में शुरू की गई नई काउंसलिंग व्यवस्था को डॉ. नायक ने स्वागत योग्य बताया। उनके अनुसार, ऑल इंडिया कोटा, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) और राज्य कोटा की सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया अब तकनीक-सक्षम, मेरिट-आधारित और अधिक पारदर्शी होगी। नई ऑनलाइन प्रणाली के ज़रिए छात्र सीटों की उपलब्धता, अपनी पसंद और काउंसलिंग की स्थिति सीधे देख सकेंगे — जिससे बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटने की ज़रूरत समाप्त होगी।

डॉ. नायक ने बताया कि पहले मेडिकल एडमिशन की पूरी प्रक्रिया में पाँच से छह महीने का समय लग जाता था, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह प्रक्रिया एक से दो महीने में पूरी की जा सकेगी। सरकार ने यह भी आश्वस्त किया है कि सिस्टम को हैकिंग और दुरुपयोग से सुरक्षित रखा जाएगा। IMA ने इस पहल का पूर्ण समर्थन किया है।

एंटी-पेपर लीक कानून पर IMA का रुख

पेपर लीक विरोधी कानून और इस विषय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्पष्ट चेतावनी का उल्लेख करते हुए डॉ. नायक ने कहा कि यह सख्त कानून पूरी तरह स्वागत योग्य है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री की मंशा साफ है — देश का कोई भी छात्र पेपर लीक जैसी अनैतिक घटनाओं का शिकार न बने।

उन्होंने बताया कि इस कानून के दायरे में केवल पेपर लीक करने वाले व्यक्ति ही नहीं, बल्कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाली एजेंसियाँ और पूरी प्रक्रिया से जुड़े जिम्मेदार लोग भी आते हैं। सरकार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के ज़रिए ऐसे मामलों में शीघ्र सुनवाई का आश्वासन दिया है। चूँकि यह कानून संसद के दोनों सदनों में चर्चा के बाद पारित हुआ है, इसलिए डॉ. नायक ने इसकी प्रभावशीलता पर विश्वास जताया।

छात्रों और अभिभावकों को संदेश देते हुए डॉ. नायक ने कहा कि जीवन में कठिन परिस्थितियाँ आती हैं, लेकिन उनसे टूटने के बजाय आगे बढ़ने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर मेहनत करते रहने की अपील की।

एच1एन1 और मौसमी फ्लू पर विशेषज्ञ की सलाह

देश में बढ़ते एच1एन1 इन्फ्लूएंजा और दिल्ली-एनसीआर सहित विभिन्न क्षेत्रों में मौसमी फ्लू के मामलों पर डॉ. नायक ने स्पष्ट किया कि यह समस्या केवल दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं है। मानसून और पोस्ट-मानसून सीजन में पूरे देश में फ्लू, डेंगू और चिकनगुनिया के मामले बढ़ते हैं। अधिकांश मामलों में यह संक्रमण स्व-सीमित (self-limited) होता है और उचित देखभाल से मरीज ठीक हो जाते हैं।

उन्होंने लोगों से अपील की कि बुखार, खाँसी, जुकाम या फ्लू जैसे लक्षण दिखने पर घबराने की बजाय अपने फैमिली फिजिशियन या योग्य डॉक्टर से परामर्श लें।

एंटीबायोटिक के अंधाधुंध इस्तेमाल पर चेतावनी

डॉ. नायक ने बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाएँ लेने के खिलाफ सख्त चेतावनी दी। उनके अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत वायरल बीमारियों में एंटीबायोटिक की कोई आवश्यकता नहीं होती, फिर भी लोग घबराकर मेडिकल स्टोर से खुद दवाएँ खरीद लेते हैं। इससे एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) जैसी गंभीर और दीर्घकालिक समस्या उत्पन्न हो रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इन्फ्लूएंजा का उपचार मुख्यतः लक्षणों के आधार पर होता है और डॉक्टर के परामर्श से ली गई दवा से बीमारी नियंत्रित हो जाती है। किसी भी दवा — विशेषकर एंटीबायोटिक — का सेवन केवल चिकित्सकीय प्रिस्क्रिप्शन पर ही किया जाना चाहिए। यह सावधानी भविष्य में दवा-प्रतिरोधक संक्रमणों से बचाव के लिए अनिवार्य है।

आगे की राह

IMA के राष्ट्रीय अध्यक्ष के इस बयान से स्पष्ट है कि चिकित्सा जगत सरकार के इन सुधारों को सकारात्मक दृष्टि से देख रहा है। नीट-यूजी काउंसलिंग की नई प्रणाली और एंटी-पेपर लीक कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर अब सबकी नज़रें टिकी हैं — क्योंकि इन कदमों की असली परीक्षा अगले प्रवेश चक्र में होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

व्यावसायिक समर्थन है — और यही इसकी विश्वसनीयता है। लेकिन असली सवाल यह है कि तकनीकी पारदर्शिता और कड़े कानून के बावजूद क्रियान्वयन की जिम्मेदारी किस पर होगी — क्योंकि पिछले वर्षों में नीट विवाद ने यह साबित किया कि कमज़ोरी प्रणाली में नहीं, निगरानी में थी। एच1एन1 पर डॉ. नायक की सलाह वैज्ञानिक रूप से सटीक है, परंतु AMR की बढ़ती समस्या के लिए केवल जन-जागरूकता पर्याप्त नहीं — दवा वितरण नियमों की सख्त निगरानी भी उतनी ही ज़रूरी है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट-यूजी काउंसलिंग में क्या नए सुधार किए गए हैं?
नई व्यवस्था के तहत ऑल इंडिया कोटा, DGHS और राज्य कोटा की सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया अब ऑनलाइन, मेरिट-आधारित और तकनीक-सक्षम होगी। IMA अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार नायक के अनुसार, काउंसलिंग की अवधि 5-6 महीने से घटकर 1-2 महीने हो जाएगी।
एंटी-पेपर लीक कानून में क्या प्रावधान हैं?
इस कानून के दायरे में पेपर लीक करने वाले व्यक्तियों के साथ-साथ प्रश्नपत्र तैयार करने वाली एजेंसियाँ और प्रक्रिया से जुड़े जिम्मेदार अधिकारी भी शामिल हैं। फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से ऐसे मामलों में शीघ्र सुनवाई और दोषियों को जल्दी सजा का प्रावधान है।
एच1एन1 इन्फ्लूएंजा से कैसे बचें और क्या करें?
IMA अध्यक्ष के अनुसार, बुखार, खाँसी या जुकाम जैसे लक्षण दिखने पर घबराने की बजाय फैमिली डॉक्टर से परामर्श लें। अधिकांश मामलों में यह संक्रमण स्व-सीमित होता है और उचित देखभाल से ठीक हो जाता है।
बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना क्यों खतरनाक है?
डॉ. नायक के अनुसार, लगभग 90% वायरल बीमारियों में एंटीबायोटिक की ज़रूरत नहीं होती। बिना प्रिस्क्रिप्शन दवा लेने से एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) की गंभीर समस्या बढ़ रही है, जो भविष्य में इलाज को और कठिन बना सकती है।
IMA ने नीट-यूजी सुधारों का समर्थन क्यों किया?
IMA का मानना है कि नई तकनीक-सक्षम प्रणाली प्रवेश प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज़ बनाएगी, जिससे छात्रों को सही और समय पर जानकारी मिलेगी। संगठन ने केंद्र सरकार को इस पहल के लिए बधाई दी और पूर्ण समर्थन की घोषणा की।
राष्ट्र प्रेस
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