पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत की चेतावनी: '100 दिन से जारी युद्ध अत्यंत चिंताजनक', तनाव कम करने की अपील
सारांश
मुख्य बातें
भारत के विदेश मंत्रालय ने 8 जून 2026 को पश्चिम एशिया में फिर से बढ़ते सैन्य हमलों पर गहरा खेद व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से तत्काल तनाव घटाने की अपील की। मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि यह संघर्ष अब 100 दिनों से अधिक समय से जारी है और इससे भारी मानवीय पीड़ा के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर असर पड़ा है।
भारत का आधिकारिक बयान
विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, 'भारत पश्चिम एशिया में फिर से हुए हमलों पर गहरा खेद व्यक्त करता है। ये घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अत्यंत चिंता का विषय हैं।' बयान में आगे जोड़ा गया कि 'हम सभी पक्षों से अपील करते हैं कि वे तुरंत तनाव कम करें, यह सुनिश्चित करें कि नागरिकों को कोई नुकसान न हो, और कूटनीतिक समाधान के लिए चल रही वार्ताओं को पूरा करें ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता लौट सके।'
गौरतलब है कि भारत की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब इज़रायल डिफेंस फोर्सेस (IDF) ने सोमवार को ईरान के महशहर क्षेत्र में एक पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर 'कई लक्ष्यों' को निशाना बनाने की पुष्टि की।
ईरान की जवाबी चेतावनी और मिसाइल हमले
इज़रायली सेना ने दावा किया कि सोमवार सुबह दागी गई सभी ईरानी मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक लिया गया। IDF के अनुसार, वेस्ट बैंक में खुले क्षेत्र में जो प्रभाव देखा गया, वह संभवतः इंटरसेप्शन के बाद गिरे बड़े मलबे के कारण था। 'द टाइम्स ऑफ इज़रायल' की रिपोर्ट के अनुसार, यरुशलम क्षेत्र में मिसाइल हमले की चेतावनी के बाद अलर्ट वापस ले लिया गया।
इस बीच, ईरान के खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रमुख कमांडर अली अब्दोल्लाही ने कड़ी चेतावनी दी कि अगर इज़रायल दक्षिणी लेबनान और बेरूत के दक्षिण स्थित दहियाह क्षेत्र में हमले बढ़ाता है, तो उसे और भी 'विनाशकारी हमलों' का सामना करना पड़ेगा जिसके लिए वो 'पछता सकता है।' उन्होंने इज़रायल पर अमेरिकी समर्थन और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की कथित चुप्पी की आड़ में फॉस्फोरस बम जैसे प्रतिबंधित हथियारों के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया।
भारतीय दूतावास की ट्रैवल एडवाइजरी
क्षेत्रीय स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने ट्रैवल एडवाइजरी जारी की। दूतावास ने भारतीय नागरिकों से ईरान की यात्रा से पूरी तरह बचने और वहाँ पहले से मौजूद लोगों को उपलब्ध सभी साधनों के माध्यम से जल्द से जल्द देश छोड़ने की सलाह दी।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
यह संघर्ष 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिकी-इज़रायली संयुक्त हमलों के बाद भड़का था। जवाब में ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमलों के ज़रिए इज़रायल, अमेरिकी ठिकानों और क्षेत्रीय सहयोगियों को निशाना बनाया। 8 अप्रैल को संघर्षविराम लागू हुआ, लेकिन बाद में शांति वार्ताएँ विफल रहीं। हाल के हफ्तों में ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते के लिए नए प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ है और एक समझौता ज्ञापन तैयार करने की कोशिशें जारी हैं।
आगे की राह
कूटनीतिक मोर्चे पर वार्ताएँ जारी रहने के बावजूद ज़मीन पर हमले थमे नहीं हैं। भारत की यह अपील उन देशों की बढ़ती आवाज़ का हिस्सा है जो इस संघर्ष के वैश्विक आर्थिक और मानवीय नतीजों को लेकर चिंतित हैं। ऊर्जा बाज़ारों पर दबाव और क्षेत्रीय अस्थिरता को देखते हुए अगले कुछ दिन कूटनीतिक दृष्टि से निर्णायक साबित हो सकते हैं।