23 जुलाई 2026
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पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत की चेतावनी: '100 दिन से जारी युद्ध अत्यंत चिंताजनक', तनाव कम करने की अपील

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पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत की चेतावनी: '100 दिन से जारी युद्ध अत्यंत चिंताजनक', तनाव कम करने की अपील

सारांश

पश्चिम एशिया में 100 दिन से जारी संघर्ष अब भारत की चिंता का केंद्र बन गया है। विदेश मंत्रालय के बयान, तेहरान दूतावास की ट्रैवल एडवाइजरी और IDF के महशहर हमले — ये सब मिलकर बताते हैं कि यह संकट वैश्विक स्थिरता के लिए कितना गंभीर मोड़ पर है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय ने 8 जून 2026 को पश्चिम एशिया में फिर से हुए हमलों पर गहरा खेद व्यक्त किया।
भारत ने सभी पक्षों से तत्काल तनाव कम करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।
संघर्ष 100 दिनों से अधिक समय से जारी है; वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव।
तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी।
IDF ने ईरान के महशहर पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमले की पुष्टि की; ईरानी कमांडर अली अब्दोल्लाही ने 'विनाशकारी जवाब' की चेतावनी दी।
8 अप्रैल का संघर्षविराम विफल; ईरान-अमेरिका के बीच नए समझौता ज्ञापन की कोशिशें जारी।

भारत के विदेश मंत्रालय ने 8 जून 2026 को पश्चिम एशिया में फिर से बढ़ते सैन्य हमलों पर गहरा खेद व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से तत्काल तनाव घटाने की अपील की। मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि यह संघर्ष अब 100 दिनों से अधिक समय से जारी है और इससे भारी मानवीय पीड़ा के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर असर पड़ा है।

भारत का आधिकारिक बयान

विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, 'भारत पश्चिम एशिया में फिर से हुए हमलों पर गहरा खेद व्यक्त करता है। ये घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अत्यंत चिंता का विषय हैं।' बयान में आगे जोड़ा गया कि 'हम सभी पक्षों से अपील करते हैं कि वे तुरंत तनाव कम करें, यह सुनिश्चित करें कि नागरिकों को कोई नुकसान न हो, और कूटनीतिक समाधान के लिए चल रही वार्ताओं को पूरा करें ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता लौट सके।'

गौरतलब है कि भारत की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब इज़रायल डिफेंस फोर्सेस (IDF) ने सोमवार को ईरान के महशहर क्षेत्र में एक पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर 'कई लक्ष्यों' को निशाना बनाने की पुष्टि की।

ईरान की जवाबी चेतावनी और मिसाइल हमले

इज़रायली सेना ने दावा किया कि सोमवार सुबह दागी गई सभी ईरानी मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक लिया गया। IDF के अनुसार, वेस्ट बैंक में खुले क्षेत्र में जो प्रभाव देखा गया, वह संभवतः इंटरसेप्शन के बाद गिरे बड़े मलबे के कारण था। 'द टाइम्स ऑफ इज़रायल' की रिपोर्ट के अनुसार, यरुशलम क्षेत्र में मिसाइल हमले की चेतावनी के बाद अलर्ट वापस ले लिया गया।

इस बीच, ईरान के खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रमुख कमांडर अली अब्दोल्लाही ने कड़ी चेतावनी दी कि अगर इज़रायल दक्षिणी लेबनान और बेरूत के दक्षिण स्थित दहियाह क्षेत्र में हमले बढ़ाता है, तो उसे और भी 'विनाशकारी हमलों' का सामना करना पड़ेगा जिसके लिए वो 'पछता सकता है।' उन्होंने इज़रायल पर अमेरिकी समर्थन और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की कथित चुप्पी की आड़ में फॉस्फोरस बम जैसे प्रतिबंधित हथियारों के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया।

भारतीय दूतावास की ट्रैवल एडवाइजरी

क्षेत्रीय स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने ट्रैवल एडवाइजरी जारी की। दूतावास ने भारतीय नागरिकों से ईरान की यात्रा से पूरी तरह बचने और वहाँ पहले से मौजूद लोगों को उपलब्ध सभी साधनों के माध्यम से जल्द से जल्द देश छोड़ने की सलाह दी।

संघर्ष की पृष्ठभूमि

यह संघर्ष 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिकी-इज़रायली संयुक्त हमलों के बाद भड़का था। जवाब में ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमलों के ज़रिए इज़रायल, अमेरिकी ठिकानों और क्षेत्रीय सहयोगियों को निशाना बनाया। 8 अप्रैल को संघर्षविराम लागू हुआ, लेकिन बाद में शांति वार्ताएँ विफल रहीं। हाल के हफ्तों में ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते के लिए नए प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ है और एक समझौता ज्ञापन तैयार करने की कोशिशें जारी हैं।

आगे की राह

कूटनीतिक मोर्चे पर वार्ताएँ जारी रहने के बावजूद ज़मीन पर हमले थमे नहीं हैं। भारत की यह अपील उन देशों की बढ़ती आवाज़ का हिस्सा है जो इस संघर्ष के वैश्विक आर्थिक और मानवीय नतीजों को लेकर चिंतित हैं। ऊर्जा बाज़ारों पर दबाव और क्षेत्रीय अस्थिरता को देखते हुए अगले कुछ दिन कूटनीतिक दृष्टि से निर्णायक साबित हो सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी सीमाएँ भी स्पष्ट हैं — न किसी पक्ष का नाम, न किसी कार्रवाई की निंदा। ऊर्जा आयात और पश्चिम एशिया में बसे लाखों भारतीयों की सुरक्षा को देखते हुए भारत की चुप्पी और सामान्य अपीलें पर्याप्त नहीं लगतीं। तेहरान दूतावास की ट्रैवल एडवाइजरी बताती है कि सरकार स्थिति की गंभीरता से वाकिफ है, लेकिन सार्वजनिक बयान में वह तीखापन नहीं जो इस स्तर के संकट की माँग करता है। असली सवाल यह है कि क्या भारत इस संघर्ष में एक सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा, या केवल 'चिंता' व्यक्त करता रहेगा।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत का रुख क्या है?
भारत ने सभी पक्षों से तत्काल तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कूटनीतिक वार्ताएँ पूरी करने की अपील की है। विदेश मंत्रालय ने इस संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए 'अत्यंत चिंता का विषय' बताया है।
भारत ने ईरान के लिए ट्रैवल एडवाइजरी क्यों जारी की?
तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने क्षेत्र में बढ़ते सैन्य हमलों और अस्थिरता को देखते हुए यह एडवाइजरी जारी की। भारतीय नागरिकों को ईरान की यात्रा से बचने और वहाँ मौजूद लोगों को जल्द से जल्द देश छोड़ने की सलाह दी गई है।
इज़रायल-ईरान के बीच यह संघर्ष कब और कैसे शुरू हुआ?
यह संघर्ष 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिकी-इज़रायली संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ। जवाब में ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमले किए। 8 अप्रैल को संघर्षविराम लागू हुआ, लेकिन शांति वार्ताएँ विफल रहीं और हमले फिर से शुरू हो गए।
IDF ने ईरान के महशहर पर हमला क्यों किया?
इज़रायल डिफेंस फोर्सेस ने सोमवार को ईरान के महशहर क्षेत्र में एक पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर 'कई लक्ष्यों' को निशाना बनाने की पुष्टि की। IDF ने यह भी दावा किया कि सोमवार सुबह दागी गई सभी ईरानी मिसाइलों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर लिया गया।
क्या इस संघर्ष को रोकने के लिए कोई कूटनीतिक प्रयास हो रहे हैं?
हाँ, हाल के हफ्तों में ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते के लिए नए प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ है और संघर्ष समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन तैयार करने की कोशिशें जारी हैं। हालाँकि ज़मीन पर हमले अभी भी जारी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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