भारत-इजरायल एफटीए: फरवरी 2027 तक बनेगी बात, दो और दौर की वार्ता बाकी — इजरायली राजदूत रूवेन अजार
सारांश
मुख्य बातें
भारत और इजरायल के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की वार्ता निर्णायक मोड़ पर है। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने 18 अगस्त 2026 को बताया कि दोनों देशों के बीच इस समझौते पर अभी दो और दौर की बातचीत होनी बाकी है — एक अक्टूबर 2026 में और दूसरा संभवतः फरवरी 2027 में — जिसके बाद स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
वार्ता की मौजूदा स्थिति
राजदूत अजार ने बताया कि पिछले वर्ष के अंत में दोनों देशों के बीच टर्म्स ऑफ रेफरेंस (टीओआर) पर सहमति बनी, जिसके बाद औपचारिक वार्ता प्रक्रिया शुरू हुई। दूसरा दौर पिछले महीने ही संपन्न हुआ है।
अजार ने कहा, "हम दो और दौर की बातचीत की उम्मीद कर रहे हैं, एक अक्टूबर में और अंतिम दौर संभवतः फरवरी में होगा। मुझे लगता है कि तब तक हमें स्पष्ट रूप से पता चल जाएगा कि हम किस स्थिति में हैं।"
वार्ता के मुख्य बिंदु और चुनौतियाँ
अब तक की वार्ता मुख्य रूप से बाज़ार पहुँच से जुड़े पारंपरिक मुद्दों पर केंद्रित रही है। हालाँकि इसका दायरा केवल शुल्क और व्यापार तक सीमित नहीं है — इसमें पारस्परिक खरीद और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के अवसर भी शामिल हैं।
अजार ने स्वीकार किया कि बाज़ार पहुँच के मामले में कुछ चुनौतियाँ हैं। इजरायल पहले ही कई क्षेत्रों में आयात शुल्क कम कर चुका है, और दोनों देशों के बाज़ारों का आकार भी काफी अलग है। ऐसे में व्यापारिक संतुलन और पहुँच से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनाना सरल नहीं होगा।
हाई-टेक सहयोग में सबसे बड़ी संभावना
इन चुनौतियों के बावजूद अजार ने कहा कि भारत-इजरायल आर्थिक संबंधों को नई ऊँचाई पर ले जाने की सबसे बड़ी संभावना उच्च प्रौद्योगिकी (हाई-टेक) सहयोग में है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि सबसे अधिक संभावना उच्च प्रौद्योगिकी सहयोग में है।"
उन्होंने तकनीकी नवाचार, स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, कृषि प्रौद्योगिकी और उन्नत विनिर्माण को प्रमुख अवसर क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया। उनके अनुसार, नवाचार-आधारित सहयोग बढ़ने से इजरायली कंपनियों के लिए भारतीय बाज़ार में अधिक सक्रियता से काम करना आसान होगा।
द्विपक्षीय संबंधों की पृष्ठभूमि
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत और इजरायल अपने आर्थिक और तकनीकी संबंधों को और मज़बूत बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, नवाचार और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में पहले से ही घनिष्ठ सहयोग रहा है।
गौरतलब है कि इस वर्ष मई में अजार ने भारत-इजरायल संबंधों की नींव के रूप में छह साझा मूल्यों का उल्लेख किया था — सभ्यतागत मज़बूती, आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष, लोकतांत्रिक मूल्य, नवाचार एवं प्रतिस्पर्धात्मकता, धार्मिक सहिष्णुता और समावेशी विकास। उन्होंने एक्स पर साझा एक वीडियो में कहा था कि दोनों देशों को अपने साझे मूल्यों को अधिक निवेश, व्यापार और रणनीतिक सहयोग में बदलना चाहिए।
आगे क्या होगा
अक्टूबर और फरवरी के वार्ता दौरों के नतीजे तय करेंगे कि एफटीए की रूपरेखा किस दिशा में जाती है। यदि फरवरी 2027 तक स्थिति स्पष्ट होती है, तो यह समझौता भारत के उन प्रमुख व्यापार साझेदारों के साथ चल रही एफटीए वार्ताओं की श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है।