भारत-पोलैंड रक्षा साझेदारी: 'मेक इन इंडिया' के तहत सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन पर बातचीत
सारांश
मुख्य बातें
भारत और पोलैंड के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग एक नए मोड़ पर है — दोनों देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' अभियान के अंतर्गत कुछ सैन्य प्लेटफॉर्म और रक्षा प्रणालियों के भारत में संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं पर सक्रिय रूप से विचार कर रहे हैं। पोलैंड के उप विदेश मंत्री एवं सेक्रेटरी ऑफ स्टेट व्लादिस्लाव थियोफिल बार्टोसजेव्स्की ने मंगलवार, 14 जुलाई को नई दिल्ली में यह जानकारी साझा की।
संयुक्त उत्पादन की रूपरेखा
बार्टोसजेव्स्की ने कहा, 'भारत उन खास रक्षा प्लेटफॉर्म में रुचि रखता है, जिन्हें हम बनाते हैं। हम इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि इन्हें भारत में कुछ भारतीय हिस्सेदारी के साथ कैसे बनाया जा सकता है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वार्ता केवल एकतरफा नहीं है — कुछ भारतीय रक्षा प्लेटफॉर्म को पोलैंड में जॉइंट वेंचर के माध्यम से पोलिश भागीदारी के साथ बनाने पर भी विचार हो रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह चर्चा महज उपकरण खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में उत्पादन के लिए संयुक्त कंपनियाँ स्थापित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। यह 'मेक इन इंडिया' के उस मूल उद्देश्य के अनुरूप है जिसमें विदेशी साझेदारों को भारतीय धरती पर निर्माण में भागीदार बनाया जाता है।
यूरोप की बदलती सुरक्षा स्थिति और भारत की भूमिका
बार्टोसजेव्स्की ने यूरोप में बदले सुरक्षा परिदृश्य का सीधा संदर्भ देते हुए कहा कि पोलैंड और शेष यूरोप में पिछले 30 वर्षों तक यह मान्यता रही कि युद्ध की संभावना नहीं है, इसलिए रक्षा उत्पादन क्षमता पर निवेश की आवश्यकता नहीं। 'अब स्थिति काफी बदल गई है' — यह उनके शब्द थे। उन्होंने कहा कि पोलैंड अब रक्षा प्रोजेक्ट्स में तेज़ी से काम कर रहा है और भारत निश्चित रूप से एक प्रमुख साझेदार होगा।
गौरतलब है कि भारत ने अपनी रक्षा औद्योगिक क्षमता को निरंतर बनाए रखा है — एक तथ्य जिसे बार्टोसजेव्स्की ने स्वयं स्वीकार किया। यह ऐसे समय में आया है जब यूरोपीय देश अपनी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को विविध और मज़बूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
रणनीतिक साझेदारी और भारत-EU व्यापार समझौता
मंत्री ने याद दिलाया कि लगभग दो वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री मोदी की पोलैंड यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी पर सहमति बनाई थी और अब उसे लागू करने की कार्य योजना तैयार है। उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को भी महत्वपूर्ण बताया, यह कहते हुए कि इससे दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
उच्चस्तरीय बैठक और आगे की योजना
सोमवार, 13 जुलाई को बार्टोसजेव्स्की ने विदेश मंत्रालय (MEA) में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज से मुलाकात की। इस बैठक में भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी की प्रगति, राजनीतिक एवं आर्थिक सहयोग, प्रौद्योगिकी, रक्षा, सांस्कृतिक संबंध और वैश्विक आतंकवाद से निपटने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
पोलैंड ने संकेत दिया है कि वह इस वर्ष के अंत तक कई हथियार निर्माता कंपनियों और रक्षा क्षेत्र की फर्मों के प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आने की योजना बना रहा है — जिनमें से कुछ पहले से भारत में कारोबार कर रही हैं। यह यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग को ठोस आकार देने की दिशा में एक अहम कदम होगी।