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भारत-पोलैंड रक्षा साझेदारी: 'मेक इन इंडिया' के तहत सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन पर बातचीत

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भारत-पोलैंड रक्षा साझेदारी: 'मेक इन इंडिया' के तहत सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन पर बातचीत

सारांश

भारत और पोलैंड केवल हथियार खरीद-बिक्री से आगे बढ़कर 'मेक इन इंडिया' के तहत सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। यूरोप की बदलती सुरक्षा स्थिति और भारत-EU FTA की पृष्ठभूमि में यह साझेदारी दोनों देशों की रणनीतिक ज़रूरतों को एक साथ पूरा करती है।

मुख्य बातें

भारत और पोलैंड 'मेक इन इंडिया' के तहत रक्षा प्लेटफॉर्म के संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं पर सक्रिय बातचीत कर रहे हैं।
पोलैंड के उप विदेश मंत्री व्लादिस्लाव थियोफिल बार्टोसजेव्स्की ने 14 जुलाई को नई दिल्ली में यह जानकारी दी।
वार्ता में भारत में पोलिश रक्षा प्लेटफॉर्म और पोलैंड में भारतीय प्लेटफॉर्म — दोनों के जॉइंट वेंचर के ज़रिए उत्पादन पर विचार हो रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की पोलैंड यात्रा के दौरान बनी रणनीतिक साझेदारी को लागू करने की कार्य योजना तैयार है।
पोलैंड 2025 के अंत तक रक्षा कंपनियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आने की योजना बना रहा है।
भारत-EU FTA से द्विपक्षीय व्यापार और रक्षा सहयोग को और बल मिलने की उम्मीद है।

भारत और पोलैंड के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग एक नए मोड़ पर है — दोनों देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' अभियान के अंतर्गत कुछ सैन्य प्लेटफॉर्म और रक्षा प्रणालियों के भारत में संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं पर सक्रिय रूप से विचार कर रहे हैं। पोलैंड के उप विदेश मंत्री एवं सेक्रेटरी ऑफ स्टेट व्लादिस्लाव थियोफिल बार्टोसजेव्स्की ने मंगलवार, 14 जुलाई को नई दिल्ली में यह जानकारी साझा की।

संयुक्त उत्पादन की रूपरेखा

बार्टोसजेव्स्की ने कहा, 'भारत उन खास रक्षा प्लेटफॉर्म में रुचि रखता है, जिन्हें हम बनाते हैं। हम इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि इन्हें भारत में कुछ भारतीय हिस्सेदारी के साथ कैसे बनाया जा सकता है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वार्ता केवल एकतरफा नहीं है — कुछ भारतीय रक्षा प्लेटफॉर्म को पोलैंड में जॉइंट वेंचर के माध्यम से पोलिश भागीदारी के साथ बनाने पर भी विचार हो रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह चर्चा महज उपकरण खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में उत्पादन के लिए संयुक्त कंपनियाँ स्थापित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। यह 'मेक इन इंडिया' के उस मूल उद्देश्य के अनुरूप है जिसमें विदेशी साझेदारों को भारतीय धरती पर निर्माण में भागीदार बनाया जाता है।

यूरोप की बदलती सुरक्षा स्थिति और भारत की भूमिका

बार्टोसजेव्स्की ने यूरोप में बदले सुरक्षा परिदृश्य का सीधा संदर्भ देते हुए कहा कि पोलैंड और शेष यूरोप में पिछले 30 वर्षों तक यह मान्यता रही कि युद्ध की संभावना नहीं है, इसलिए रक्षा उत्पादन क्षमता पर निवेश की आवश्यकता नहीं। 'अब स्थिति काफी बदल गई है' — यह उनके शब्द थे। उन्होंने कहा कि पोलैंड अब रक्षा प्रोजेक्ट्स में तेज़ी से काम कर रहा है और भारत निश्चित रूप से एक प्रमुख साझेदार होगा।

गौरतलब है कि भारत ने अपनी रक्षा औद्योगिक क्षमता को निरंतर बनाए रखा है — एक तथ्य जिसे बार्टोसजेव्स्की ने स्वयं स्वीकार किया। यह ऐसे समय में आया है जब यूरोपीय देश अपनी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को विविध और मज़बूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

रणनीतिक साझेदारी और भारत-EU व्यापार समझौता

मंत्री ने याद दिलाया कि लगभग दो वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री मोदी की पोलैंड यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी पर सहमति बनाई थी और अब उसे लागू करने की कार्य योजना तैयार है। उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को भी महत्वपूर्ण बताया, यह कहते हुए कि इससे दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

उच्चस्तरीय बैठक और आगे की योजना

सोमवार, 13 जुलाई को बार्टोसजेव्स्की ने विदेश मंत्रालय (MEA) में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज से मुलाकात की। इस बैठक में भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी की प्रगति, राजनीतिक एवं आर्थिक सहयोग, प्रौद्योगिकी, रक्षा, सांस्कृतिक संबंध और वैश्विक आतंकवाद से निपटने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

पोलैंड ने संकेत दिया है कि वह इस वर्ष के अंत तक कई हथियार निर्माता कंपनियों और रक्षा क्षेत्र की फर्मों के प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आने की योजना बना रहा है — जिनमें से कुछ पहले से भारत में कारोबार कर रही हैं। यह यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग को ठोस आकार देने की दिशा में एक अहम कदम होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह एक बड़े भू-रणनीतिक पुनर्गठन का हिस्सा है — यूरोप अपनी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को विविध बनाने की कोशिश में है और भारत उसके लिए एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में उभर रहा है। लेकिन 'मेक इन इंडिया' के तहत रक्षा उत्पादन का इतिहास बताता है कि घोषणाओं और वास्तविक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के बीच की खाई अक्सर चौड़ी रहती है। असली कसौटी यह होगी कि पोलैंड किस स्तर की तकनीक साझा करने को तैयार है — और भारत क्या केवल असेंबली हब बनेगा या वास्तविक डिज़ाइन साझेदार। भारत-EU FTA की पृष्ठभूमि में यह साझेदारी रणनीतिक रूप से समयोचित है, पर इसकी सफलता ठोस अनुबंधों पर निर्भर करेगी, न कि केवल राजनयिक बयानों पर।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और पोलैंड के बीच रक्षा सहयोग की नई पहल क्या है?
दोनों देश 'मेक इन इंडिया' अभियान के तहत सैन्य उपकरणों और रक्षा प्लेटफॉर्म के संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं पर बातचीत कर रहे हैं। इसमें भारत में पोलिश रक्षा प्लेटफॉर्म और पोलैंड में भारतीय प्लेटफॉर्म — दोनों के जॉइंट वेंचर के ज़रिए निर्माण पर विचार हो रहा है।
पोलैंड भारत के साथ रक्षा साझेदारी क्यों बढ़ाना चाहता है?
यूरोप में बदले सुरक्षा हालात के कारण पोलैंड अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता तेज़ी से बढ़ा रहा है और भरोसेमंद साझेदारों की तलाश में है। पोलिश उप विदेश मंत्री ने स्वीकार किया कि यूरोप ने पिछले 30 वर्षों में रक्षा उद्योग में निवेश कम किया था, जिसे अब तेज़ी से पूरा करना है और भारत इस प्रक्रिया में एक प्रमुख साझेदार होगा।
भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत कब हुई थी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोलैंड यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी पर सहमति बनाई थी। अब उसे लागू करने की कार्य योजना तैयार है और 14 जुलाई को हुई बैठकें उसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
भारत-EU FTA का इस रक्षा साझेदारी पर क्या असर होगा?
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से दोनों पक्षों के बीच व्यापार और औद्योगिक सहयोग को बल मिलेगा। पोलिश मंत्री ने इसे भारत-पोलैंड रक्षा एवं आर्थिक संबंधों के विस्तार के लिए एक अनुकूल आधार बताया।
पोलैंड की रक्षा कंपनियाँ भारत में कब आ सकती हैं?
पोलैंड ने संकेत दिया है कि वह 2025 के अंत तक कई हथियार निर्माता कंपनियों और रक्षा फर्मों के प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आने की योजना बना रहा है। इनमें से कुछ कंपनियाँ पहले से भारत में कारोबार कर रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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