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भारत का 70% से अधिक टेक्सटाइल वेस्ट सर्कुलर इकॉनमी में, 40-45 लाख लोगों की आजीविका जुड़ी

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भारत का 70% से अधिक टेक्सटाइल वेस्ट सर्कुलर इकॉनमी में, 40-45 लाख लोगों की आजीविका जुड़ी

सारांश

भारत अपने सालाना 7.8 मिलियन टन टेक्सटाइल कचरे का 70% से अधिक सर्कुलर इकॉनमी में वापस ला रहा है। प्री-कंज्यूमर स्तर पर 95% रिकवरी दर और 40-45 लाख लोगों की आजीविका के साथ, यह क्षेत्र वैश्विक सस्टेनेबिलिटी मानकों की दौड़ में भारत को एक मज़बूत दावेदार बना रहा है।

मुख्य बातें

भारत अपने कुल टेक्सटाइल वेस्ट का 70% से अधिक रीसाइक्लिंग, अपसाइक्लिंग और पुनः उपयोग के ज़रिए सर्कुलर इकॉनमी में शामिल कर रहा है।
हर साल प्रबंधित 7.8 मिलियन टन टेक्सटाइल कचरे में से 90% से अधिक घरेलू प्री और पोस्ट-कंज्यूमर स्रोतों से आता है।
प्री-कंज्यूमर स्तर पर 95% और पोस्ट-कंज्यूमर स्तर पर 55% कचरा लैंडफिल से बचाया जा रहा है।
यह इकोसिस्टम 40-45 लाख लोगों की आजीविका का आधार है, जिनमें हाशिए के समुदायों की महिलाएँ प्रमुख हैं।
नवी मुंबई के बेलापुर में देश की पहली म्युनिसिपल टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी 1.14 लाख परिवारों तक पहुँच चुकी है।
भारत वैश्विक टेक्सटाइल निर्यात में 4% हिस्सेदारी के साथ दुनिया का छठा सबसे बड़ा निर्यातक है।

भारत अपने कुल टेक्सटाइल वेस्ट का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सर्कुलर इकॉनमी के तहत रिकवर कर रहा है — रीसाइक्लिंग, अपसाइक्लिंग, डाउनसाइक्लिंग और दोबारा इस्तेमाल के ज़रिए। 12 जुलाई को केंद्र सरकार की ओर से जारी एक फैक्टशीट में यह जानकारी सामने आई। यह आँकड़ा ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक बाज़ार टिकाऊ उत्पादन को प्राथमिकता दे रहे हैं और भारत दुनिया का छठा सबसे बड़ा वस्त्र निर्यातक है।

भारत में टेक्सटाइल वेस्ट की स्थिति

सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, भारत में हर साल 7.8 मिलियन टन टेक्सटाइल कचरे का प्रबंधन किया जाता है। इसमें से 90 प्रतिशत से अधिक घरेलू प्री-कंज्यूमर और पोस्ट-कंज्यूमर स्रोतों से आता है। प्री-कंज्यूमर स्तर पर रिकवरी विशेष रूप से मज़बूत है — लगभग 95 प्रतिशत टेक्सटाइल कचरा स्थापित वैल्यू-चेन नेटवर्क के ज़रिए पुनः उपयोग में लाया जाता है।

स्पिनिंग सेक्टर इस 'क्लोज्ड-लूप सर्कुलैरिटी' का सबसे बेहतर उदाहरण है, जहाँ उत्पादन से निकलने वाला लगभग सारा कचरा दोबारा प्रोडक्शन चक्र में शामिल हो जाता है। पोस्ट-कंज्यूमर कपड़ों के मामले में भी भारत के व्यापक कलेक्शन और सॉर्टिंग नेटवर्क की बदौलत 55 प्रतिशत कचरा लैंडफिल में जाने से बच जाता है।

आजीविका और सामाजिक असर

फैक्टशीट के मुताबिक, यह इकोसिस्टम 40-45 लाख लोगों की आजीविका का आधार है। इनमें हाशिए पर रहने वाले समुदायों की महिलाएँ कलेक्शन, सॉर्टिंग और पुनर्वितरण में अहम भूमिका निभाती हैं। गौरतलब है कि यह क्षेत्र पहले से ही 4.5 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोज़गार देता है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएँ और ग्रामीण कामगार शामिल हैं।

नवी मुंबई की अग्रणी सुविधा

नवी मुंबई के बेलापुर में स्थित भारत की पहली म्युनिसिपल टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी इस दिशा में एक मॉडल के रूप में उभरी है। यह सुविधा कलेक्शन, सॉर्टिंग, अपसाइक्लिंग, तकनीक और आजीविका को एक एकीकृत सर्कुलर इकोसिस्टम में जोड़ती है। अब तक इस फैसिलिटी ने 30 मीट्रिक टन पोस्ट-कंज्यूमर टेक्सटाइल वेस्ट एकत्र किया है, 25.5 मीट्रिक टन की सॉर्टिंग की है, 41,000 से अधिक वस्तुएँ प्रोसेस की हैं और 400 से अधिक अपसाइकल्ड सैंपल तैयार किए हैं। यह 1.14 लाख परिवारों तक पहुँची है और प्रदर्शनियों व बाज़ार तक पहुँच के ज़रिए महिला कारीगरों को सशक्त किया है।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति

भारत वैश्विक टेक्सटाइल और परिधान निर्यात में 4 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दुनिया का छठा सबसे बड़ा निर्यातक है। जैसे-जैसे यूरोप और अमेरिका जैसे बड़े बाज़ार पर्यावरण के लिहाज़ से ज़िम्मेदार उत्पादन को अनिवार्य बना रहे हैं, भारत की टेक्सटाइल कारीगरी की समृद्ध विरासत और सर्कुलर प्रैक्टिस एक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ बन सकती हैं। सरकारी बयान में कहा गया है कि इस क्षेत्र के पास अपनी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और मज़बूत करने का यह सुनहरा अवसर है।

आगे की राह

सर्कुलर टेक्सटाइल उत्पादन पूरे सेक्टर में तेज़ी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पोस्ट-कंज्यूमर रिकवरी दर को और बेहतर करने के लिए नीतिगत समर्थन, तकनीकी निवेश और उपभोक्ता जागरूकता तीनों की एक साथ ज़रूरत होगी। यह फैक्टशीट देश भर की प्रमुख सुविधाओं में टेक्सटाइल वेस्ट सर्कुलेशन के कामकाज का विस्तृत विवरण भी प्रस्तुत करती है, जो भविष्य की नीति-निर्माण के लिए एक आधार बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परीक्षा पोस्ट-कंज्यूमर स्तर पर है जहाँ केवल 55% कचरा लैंडफिल से बच पाता है — यानी लगभग आधा उपभोक्ता-स्तर का कपड़ा अभी भी बर्बाद हो रहा है। यह फैक्टशीट सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करती है, लेकिन स्वतंत्र सत्यापन या क्षेत्रवार टूटे हुए आँकड़े नहीं देती, जिससे दावों की जाँच करना कठिन है। वैश्विक बाज़ार जब EU की एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी जैसी नीतियाँ लागू कर रहे हैं, तब भारत के पास अपनी परंपरागत सर्कुलर प्रैक्टिस को नीतिगत ढाँचे में बदलने का अवसर है — अन्यथा यह बढ़त महज़ अनौपचारिक अर्थव्यवस्था की देन बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत टेक्सटाइल वेस्ट का कितना हिस्सा रीसाइकल करता है?
सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, भारत अपने कुल टेक्सटाइल वेस्ट का 70% से अधिक सर्कुलर इकॉनमी के तहत रिकवर करता है। इसमें रीसाइक्लिंग, अपसाइक्लिंग, डाउनसाइक्लिंग और पुनः उपयोग शामिल हैं।
भारत में हर साल कितना टेक्सटाइल कचरा पैदा होता है?
भारत में हर साल 7.8 मिलियन टन टेक्सटाइल कचरे का प्रबंधन किया जाता है, जिसमें से 90% से अधिक घरेलू प्री-कंज्यूमर और पोस्ट-कंज्यूमर स्रोतों से आता है।
नवी मुंबई की टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी क्या है?
नवी मुंबई के बेलापुर में स्थित भारत की पहली म्युनिसिपल टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी कलेक्शन, सॉर्टिंग, अपसाइक्लिंग और आजीविका को एक इकोसिस्टम में जोड़ती है। यह अब तक 30 मीट्रिक टन वेस्ट एकत्र कर चुकी है और 1.14 लाख परिवारों तक पहुँची है।
टेक्सटाइल सर्कुलर इकॉनमी से कितने लोगों को रोज़गार मिलता है?
सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, यह इकोसिस्टम 40-45 लाख लोगों की आजीविका का आधार है। इनमें हाशिए पर रहने वाले समुदायों की महिलाएँ कलेक्शन, सॉर्टिंग और पुनर्वितरण में प्रमुख भूमिका निभाती हैं।
वैश्विक टेक्सटाइल बाज़ार में भारत की क्या स्थिति है?
भारत वैश्विक टेक्सटाइल और परिधान निर्यात में 4% हिस्सेदारी के साथ दुनिया का छठा सबसे बड़ा निर्यातक है। यह क्षेत्र 4.5 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोज़गार देता है।
राष्ट्र प्रेस
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