भारत का कपड़ा-परिधान निर्यात 2025-26 में ₹3.25 लाख करोड़ के पार, 4.7% CAGR दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
भारत का कपड़ा और परिधान निर्यात (हस्तशिल्प सहित) 2025-26 में ₹3,25,339 करोड़ तक पहुँच गया, जो 2023-24 के ₹2,97,004 करोड़ की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है। इस दो-वर्षीय अवधि में निर्यात में 4.7 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की गई। यह जानकारी कपड़ा राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने मंगलवार, 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।
शीर्ष निर्यात गंतव्य और बाज़ार विस्तार
मंत्री के अनुसार, 2025-26 में भारतीय टेक्सटाइल और परिधान के शीर्ष पाँच गंतव्य अमेरिका, बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ब्रिटेन और जर्मनी रहे। इसके साथ ही, 2024-25 की तुलना में 100 से अधिक देशों को होने वाले निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई — जो भारत की बाज़ार विविधीकरण रणनीति की सफलता का संकेत है।
सरकारी योजनाएँ और पहल
मार्गेरिटा ने बताया कि सरकार उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए कई योजनाएँ संचालित कर रही है। प्रमुख पहलों में शामिल हैं: PM मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (PM MITRA) पार्क योजना, प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) योजना, राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन, समर्थ (टेक्सटाइल क्षेत्र में क्षमता निर्माण योजना), सिल्क समग्र-2, राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम, राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम, ROSCTL, RODTEP, निर्यात प्रोत्साहन मिशन (EPM) और निर्यातकों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना (CGSE)।
मुक्त व्यापार समझौते और रणनीतिक बाज़ार
वर्तमान में 16 मुक्त व्यापार समझौते (FTA) लागू हैं, जिनमें भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) भी शामिल है। इसके अलावा, यूरोपीय संघ (EU) और न्यूज़ीलैंड के साथ संपन्न FTA भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को नए बाज़ारों में विस्तार का अवसर देंगे। सरकार ने 40 प्राथमिकता वाले देशों को लक्ष्य करते हुए निर्यात प्रोत्साहन और बाज़ार विविधीकरण की रणनीति भी अपनाई है।
राहत उपाय और कच्चे माल पर नीति
पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में समुद्री परिवहन संकट से प्रभावित निर्यातकों की मदद के लिए सरकार ने 19 मार्च 2026 को निर्यात प्रोत्साहन मिशन के तहत एक विशेष राहत पहल शुरू की। कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 1 जून से 31 अक्टूबर 2026 तक कपास के आयात पर सीमा शुल्क अस्थायी रूप से माफ किया गया है। दीर्घकालिक दृष्टि से, सरकार ने 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी को भी मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य उत्पादकता बढ़ाना और गुणवत्ता संबंधी बाधाओं को दूर करना है।
आगे की राह
EU और न्यूज़ीलैंड के साथ FTA के लागू होने के बाद भारतीय टेक्सटाइल निर्यात को और गति मिलने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव और चीन+1 रणनीति के कारण भारत को नई प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल रही है।