भारतीय नौसेना का नया ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली ‘आईएनओईएस’ 3.0: चयन प्रक्रिया में आधुनिकता का समावेश
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, १८ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस) भारतीय नौसेना ने नौसेना कमांडर्स कांफ्रेंस के दौरान डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस वर्ष की पहली कमांडर्स कांफ्रेंस में नौसेना ने इंडियन नेवी ऑनलाइन एक्जामिनेशन सिस्टम (आईएनओईएस) ३.० का शुभारंभ किया है। यह एक उन्नत प्रणाली है और इसे पूरी तरह से स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है।
यह प्रणाली नौसेना की चयन और मूल्यांकन प्रक्रिया को और अधिक आधुनिक बनाने में सहायक होगी। यह पहल नौसेना के सभी विभागों में ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करने के लिए की गई है। इस नई प्रणाली की मुख्य विशेषताओं में इस स्वदेशी सॉफ्टवेयर की तीन मुख्य कड़ियाँ शामिल हैं।
यह प्रणाली तीन विशेष सॉफ्टवेयर मॉड्यूल का समूह है, जिसे नौसेना ने स्वयं विकसित किया है। विषयात्मक यानी सब्जेक्टिव मूल्यांकन के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पहली बार ऑनलाइन परीक्षाओं में वर्णनात्मक उत्तरों के मूल्यांकन की सुविधा प्रदान करेगा।
इसी प्रकार, इसका ई-प्रश्नालय, एक डिजिटल प्रश्न बैंक प्रबंधन प्रणाली है, जो सुरक्षा के साथ प्रश्नों के संग्रहण और चयन को व्यवस्थित करेगी।
इसके अलावा, स्वचालित स्लॉट आवंटन के माध्यम से परीक्षा के लिए उम्मीदवारों को समय और स्लॉट का आवंटन स्वचालित रूप से किया जाएगा। इससे मानवीय त्रुटियों की संभावना समाप्त हो जाएगी। बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने और डिजिटल सुधारों को प्रभावी बनाने के लिए नौसेना ने अपने तकनीकी ढांचे का भी विस्तार किया है। नौसेना ने संपूर्ण भारत में स्थित २३ परीक्षा केंद्रों में क्षमता को बढ़ाया है। अब यहाँ कंप्यूटर नोड्स की संख्या ४०० से बढ़ाकर ८२९ कर दी गई है। यह विस्तार नौसेना के भीतर डिजिटल परिवर्तन को तेज करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
नौसेना के इस कदम का मुख्य उद्देश्य पारदर्शी, त्वरित और सुरक्षित परीक्षा प्रणाली स्थापित करना है। कमांडर्स कांफ्रेंस में यह स्पष्ट किया गया कि ऐसी तकनीकें न केवल भर्ती प्रक्रिया को सरल बनाती हैं, बल्कि भारतीय नौसेना को एक आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम बल के रूप में भी स्थापित करती हैं।
गौरतलब है कि नई दिल्ली में १४ से १७ अप्रैल तक भारतीय नौसेना का कमांडर्स का सम्मेलन आयोजित किया गया। यहाँ नौसेना प्रमुख दिनेश कुमार त्रिपाठी ने उभरती नई प्रौद्योगिकियों को अपनाकर भविष्य के लिए सक्षम बल तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
सम्मेलन के दौरान ही नौसेना प्रमुख द्वारा भारतीय नौसेना समुद्री सुरक्षा रणनीति २०२६ भी जारी की गई, जिसे रक्षा बलों के विजन २०४७ और भारतीय नौसेना के विजन २०४७ के अनुरूप तैयार किया गया है।
यह रणनीति बदलते सुरक्षा परिदृश्य में आने वाले दशक के लिए समुद्री क्षेत्र में राष्ट्रीय हितों की रक्षा की दिशा तय करती है। इसमें भू-राजनीतिक परिस्थितियों, विघटनकारी प्रौद्योगिकियों, उच्च रक्षा संगठन में सुधार और युद्ध के बदलते स्वरूप का समग्र आकलन शामिल है।