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OMC मुनाफा वित्त वर्ष 2025-26: ₹77,821 करोड़ 'विंडफॉल' नहीं, आंकड़े बताते हैं असली तस्वीर

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OMC मुनाफा वित्त वर्ष 2025-26: ₹77,821 करोड़ 'विंडफॉल' नहीं, आंकड़े बताते हैं असली तस्वीर

सारांश

विपक्ष का '130 प्रतिशत मुनाफा' वाला दावा एक असामान्य कमज़ोर आधार वर्ष की उपज है। ₹20 लाख करोड़ के कारोबार पर ₹77,821 करोड़ का मुनाफा महज 3-4% मार्जिन है — और इसका आधा हिस्सा सरकारी खजाने में डिविडेंड के रूप में लौट जाता है।

मुख्य बातें

वित्त वर्ष 2025-26 में सरकारी ओएमसी का संयुक्त मुनाफा ₹77,821 करोड़ रहा — ₹20 लाख करोड़ के कारोबार पर 3-4% मार्जिन।
130% की वृद्धि वास्तव में 2024-25 में एलपीजी अंडर-रिकवरी ( ₹40,434 करोड़ ) के कारण हुए असामान्य नुकसान से उबरने का असर है।
2025-26 का मुनाफा 2023-24 के ₹80,986 करोड़ के लगभग बराबर — यानी कोई असाधारण बढ़ोतरी नहीं।
मुनाफे का लगभग आधा हिस्सा डिविडेंड के रूप में भारत सरकार को वापस जाता है।
केंद्र सरकार ने 27 मार्च 2026 को पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी ₹10 प्रति लीटर घटाई; भारत में ईंधन कीमतें केवल 8-9% बढ़ीं, पड़ोसी देशों में 20-67% ।

सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के मुनाफे को लेकर छिड़ी राजनीतिक बहस के बीच नए आंकड़े एक अलग ही तस्वीर पेश करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में तीनों सरकारी ओएमसी का संयुक्त शुद्ध लाभ ₹77,821 करोड़ रहा — लेकिन आंकड़ों के अनुसार इसे 'बंपर कमाई' या 'विंडफॉल प्रॉफिट' कहना संदर्भ से परे होगा। यह मुनाफा करीब ₹20 लाख करोड़ के कुल कारोबार पर महज 3 से 4 प्रतिशत का कार्यशील मार्जिन है।

130 प्रतिशत की बढ़ोतरी का असली संदर्भ

विपक्ष का तर्क है कि पश्चिम एशिया संकट और ऊंची ईंधन कीमतों के बीच ओएमसी के मुनाफे में 130 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि यह तुलना एक असामान्य रूप से कमज़ोर आधार वर्ष से की जा रही है। वित्त वर्ष 2024-25 में ओएमसी का मुनाफा केवल ₹33,602 करोड़ था — जो उससे पिछले वर्ष 2023-24 के ₹80,986 करोड़ से ₹47,384 करोड़ कम था। इस गिरावट की मुख्य वजह घरेलू एलपीजी पर ₹40,434 करोड़ की अंडर-रिकवरी थी, जिसे कंपनियों ने स्वयं वहन किया था और बाद में केंद्र सरकार ने इसकी भरपाई की।

गौरतलब है कि यदि तुलना सामान्य वर्षों से की जाए, तो 2025-26 का ₹77,821 करोड़ का मुनाफा 2023-24 के ₹80,986 करोड़ के लगभग बराबर है। यानी यह बढ़ोतरी वास्तव में पिछले वर्ष हुए नुकसान की भरपाई है, न कि कोई अप्रत्याशित भारी कमाई।

मार्जिन: उद्योग मानकों के अनुरूप

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) अकेले लगभग ₹10 लाख करोड़ का सालाना कारोबार करती है और उसका सामान्य शुद्ध लाभ ₹20,000 से ₹30,000 करोड़ के बीच रहता है — यानी लाभ मार्जिन करीब 3 प्रतिशत। आंकड़ों के अनुसार, इस स्तर की किसी भी बड़ी कमोडिटी रिफाइनिंग कंपनी के लिए यह एक सामान्य 'वर्किंग मार्जिन' माना जाता है।

मुनाफे का उपयोग: सार्वजनिक निवेश और विस्तार

रिपोर्टों के अनुसार, इस मुनाफे का लगभग आधा हिस्सा डिविडेंड के रूप में सीधे भारत सरकार को वापस जाता है, जिसका उपयोग सड़क, हाईवे, रेलवे और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में होता है। शेष राशि रिफाइनरी विस्तार और पूंजीगत निवेश में लगाई जाती है — एक बड़े रिफाइनरी विस्तार कार्यक्रम की लागत ही ₹50,000 से ₹60,000 करोड़ तक पहुँच जाती है।

उपभोक्ताओं पर असर: पड़ोसी देशों से तुलना

केंद्र सरकार ने 27 मार्च 2026 को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी ₹10 प्रति लीटर घटाई। इसके बावजूद पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से भारत में खुदरा ईंधन कीमतों में केवल 8 से 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि पड़ोसी देशों में यही वृद्धि 20 से 67 प्रतिशत तक रही। यह अंतर दर्शाता है कि ओएमसी ने अंतरराष्ट्रीय मूल्य दबाव को उपभोक्ताओं पर पूरी तरह नहीं डाला।

आगे देखें तो ओएमसी के पूंजीगत निवेश कार्यक्रम और रिफाइनरी विस्तार योजनाएँ देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए निर्णायक होंगी — और इनकी फंडिंग काफी हद तक इन्हीं परिचालन मार्जिन पर निर्भर करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह है कि क्या ओएमसी की मूल्य-निर्धारण नीति उपभोक्ताओं के प्रति जवाबदेह है — और पड़ोसी देशों से तुलना इस मामले में भारत के पक्ष में जाती है। हालांकि, एलपीजी अंडर-रिकवरी की भरपाई सरकारी खजाने से होना यह भी बताता है कि ओएमसी की 'स्वायत्त' मूल्य-निर्धारण व्यवस्था अभी भी राजनीतिक हस्तक्षेप से पूरी तरह मुक्त नहीं है — जो दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिए एक अनुत्तरित प्रश्न बना हुआ है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त वर्ष 2025-26 में सरकारी ओएमसी का मुनाफा कितना रहा?
वित्त वर्ष 2025-26 में तीनों सरकारी तेल विपणन कंपनियों का संयुक्त शुद्ध लाभ ₹77,821 करोड़ रहा। यह करीब ₹20 लाख करोड़ के कुल कारोबार पर 3 से 4 प्रतिशत का मार्जिन है, जिसे उद्योग मानकों के अनुसार सामान्य माना जाता है।
ओएमसी के मुनाफे में 130 प्रतिशत की बढ़ोतरी का क्या मतलब है?
यह बढ़ोतरी वित्त वर्ष 2024-25 के असामान्य रूप से कमज़ोर आधार वर्ष की तुलना में दिख रही है, जब एलपीजी पर ₹40,434 करोड़ की अंडर-रिकवरी के कारण मुनाफा घटकर ₹33,602 करोड़ रह गया था। सामान्य वर्ष 2023-24 से तुलना करें तो 2025-26 का मुनाफा लगभग बराबर है।
ओएमसी के मुनाफे का उपयोग कहाँ होता है?
आंकड़ों के अनुसार, मुनाफे का लगभग आधा हिस्सा डिविडेंड के रूप में भारत सरकार को वापस जाता है, जिसका उपयोग सड़क, हाईवे, रेलवे और सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे में होता है। शेष राशि रिफाइनरी विस्तार और पूंजीगत निवेश परियोजनाओं में लगाई जाती है।
पश्चिम एशिया संकट के बाद भारत में ईंधन कीमतें कितनी बढ़ीं?
पश्चिम एशिया संकट के बाद भारत में खुदरा ईंधन कीमतों में केवल 8 से 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसके विपरीत पड़ोसी देशों में यह वृद्धि 20 से 67 प्रतिशत तक रही, जो दर्शाता है कि ओएमसी ने अंतरराष्ट्रीय मूल्य दबाव का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला।
सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कब घटाई?
केंद्र सरकार ने 27 मार्च 2026 को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी ₹10 प्रति लीटर घटाई। यह कटौती पश्चिम एशिया संकट के बीच उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से की गई थी।
राष्ट्र प्रेस
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