राहुल गांधी ने इंदौर छात्रा के हॉस्टल सवाल पर PM मोदी से माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 20 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा सवाल किया — कि जब सरकार के पास दीये जलाने के लिए पैसा है, तो छात्राओं के हॉस्टल के लिए क्यों नहीं? यह सवाल उन्होंने इंदौर में अपने 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान एक छात्रा से सुना था।
इंदौर में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम
राहुल गांधी 19 सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश के इंदौर पहुँचे, जहाँ उन्होंने छात्रों से सीधा संवाद किया। इस कार्यक्रम में शिक्षा, हॉस्टल सुविधाओं, रोज़गार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे सामने आए। गांधी इससे पहले कोटा, पुणे और प्रयागराज में भी इसी श्रृंखला के तहत छात्रों से मिल चुके हैं।
कार्यक्रम में एक छात्रा ने कहा कि गाँव से पढ़ने शहर आने के बाद हॉस्टल न होने के कारण उसे निजी पेइंग गेस्ट (पीजी) में रहना पड़ता है, जिसमें लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं। उसने बताया कि हर महीने किराए की चिंता और बेघर होने का डर पढ़ाई पर भारी पड़ता है।
राहुल गांधी की एक्स पर पोस्ट
गांधी ने रविवार, 20 सितंबर को एक्स पर उस छात्रा का सवाल साझा करते हुए लिखा — 'सरकार के पास दिया जलाने के लिए पैसा है — हमारे हॉस्टल के लिए क्यों नहीं?' उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को सीधे संबोधित करते हुए पूछा कि क्या उस छात्रा के सवाल का कोई जवाब है।
गांधी ने यह भी कहा कि आवास भत्ता महँगाई के अनुपात में नहीं बढ़ता और ऊपर से भ्रष्टाचार की समस्या अलग है। उनके अनुसार, कई लड़कियाँ केवल इसलिए पढ़ाई छोड़ देती हैं क्योंकि उनके लिए सुरक्षित रहने की जगह उपलब्ध नहीं है।
युवाओं पर राहुल गांधी का व्यापक दृष्टिकोण
राहुल गांधी ने कार्यक्रम में कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनकी स्वाभाविक जिज्ञासा तथा सवाल पूछने की क्षमता उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था छात्रों के भविष्य को चुनौती दे रही है, जो एक गंभीर सवाल है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि छात्र स्वभाव से मोहब्बत करने वाले होते हैं — वे एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और उनमें मानवता की भावना होती है। गांधी का यह बयान उनके 'नफरत नहीं, मोहब्बत' के राजनीतिक संदेश की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल केंद्र सरकार की शिक्षा और युवा नीतियों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को गांधी की उस रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें वे ज़मीनी स्तर पर जाकर युवाओं की समस्याओं को राष्ट्रीय विमर्श में लाना चाहते हैं।
गौरतलब है कि छात्र हॉस्टल और आवास भत्ते की समस्या लंबे समय से उठाई जाती रही है, खासकर पहली पीढ़ी की उन छात्राओं के लिए जो ग्रामीण या अर्ध-शहरी क्षेत्रों से उच्च शिक्षा के लिए महानगरों में आती हैं।
आगे क्या
केंद्र सरकार की ओर से अब तक इस पोस्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम की अगली कड़ियाँ अन्य शहरों में भी आयोजित होने की संभावना है, जहाँ से और मुद्दे सामने आ सकते हैं।