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इंद्रोदा नेचर पार्क में 15 कूलर और 20 स्प्रिंकलर से 600 से अधिक जानवरों को गर्मी से राहत

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इंद्रोदा नेचर पार्क में 15 कूलर और 20 स्प्रिंकलर से 600 से अधिक जानवरों को गर्मी से राहत

सारांश

गांधीनगर के इंद्रोदा नेचर पार्क में भीषण गर्मी से 600 से अधिक जानवरों को बचाने के लिए 15 कूलर, 20 स्प्रिंकलर, खस की टट्टियाँ और विशेष आहार योजना लागू की गई है। बाड़ों का तापमान बाहर से 2-4°C कम रखा जा रहा है और 24 घंटे पशु चिकित्सा निगरानी जारी है।

मुख्य बातें

इंद्रोदा नेचर पार्क, गांधीनगर में 600 से अधिक वन्यजीवों के लिए विशेष गर्मी-राहत उपाय अप्रैल 2026 से लागू हैं।
मांसाहारी जानवरों और सरीसृप गृह में 15 बड़े एयर कूलर दोपहर के सबसे गर्म समय में चलाए जाते हैं।
खुले क्षेत्रों में 20 हाई-प्रेशर पॉप-अप स्प्रिंकलर प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक सक्रिय रहते हैं।
बाड़ों का तापमान बाहर की तुलना में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक कम बनाए रखा जा रहा है।
मांसाहारी पशुओं का भोजन 500 ग्राम से 1 किलोग्राम कम किया गया; शाकाहारी जानवरों को जलयुक्त फल और ओआरएस मिश्रण दिया जा रहा है।
ये इंतजाम वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के मार्गदर्शन में गुजरात इकोलॉजिकल एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन द्वारा किए गए हैं।

गांधीनगर स्थित इंद्रोदा नेचर पार्क में भीषण गर्मी के बीच 600 से अधिक वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए 15 एयर कूलर और 20 हाई-प्रेशर पॉप-अप स्प्रिंकलर लगाए गए हैं। गुजरात के कई हिस्सों में हीटवेव जैसी स्थिति को देखते हुए ये इंतजाम अप्रैल 2026 से लागू हैं और मानसून आने तक जारी रहेंगे।

किसके निर्देश पर और किसने किए इंतजाम

ये राहत उपाय राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया और राज्य मंत्री प्रवीण माली के मार्गदर्शन में गुजरात इकोलॉजिकल एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन द्वारा क्रियान्वित किए गए हैं। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन उपायों का एकमात्र उद्देश्य भीषण गर्मी के दौरान पार्क में रहने वाले जानवरों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करना है।

पार्क में कौन-कौन से जानवर हैं

इंद्रोदा नेचर पार्क में इस समय 600 से अधिक जानवर निवास करते हैं। इनमें तीन शेर, दो बाघ, तीन तेंदुए, मगरमच्छ, साही, कई प्रकार के सरीसृप और पक्षियों की विभिन्न प्रजातियाँ शामिल हैं। मांसाहारी जानवरों और सरीसृपों के बाड़ों में 15 बड़े एयर कूलर लगाए गए हैं, जिन्हें दोपहर के सबसे गर्म समय में चालू किया जाता है।

स्प्रिंकलर और पारंपरिक तरीकों का संयोजन

पार्क के खुले क्षेत्रों में लगाए गए 20 हाई-प्रेशर पॉप-अप स्प्रिंकलर प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक चलाए जाते हैं, जिससे पानी की फुहारें आसपास के तापमान को कम करती हैं। पारंपरिक तरीकों में खस की टट्टियाँ लगाई गई हैं, जिन्हें लगातार पानी से गीला रखा जाता है ताकि गर्म हवा ठंडी होकर बाड़ों के अंदर पहुँचे। धूप से बचाव के लिए एग्रो-नेट शेड भी लगाए गए हैं।

पार्क प्रबंधन के अनुसार, इन उपायों के संयुक्त प्रभाव से जानवरों के बाड़ों का तापमान बाहर की तुलना में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक कम बनाए रखा जा रहा है, जिससे एक नियंत्रित 'माइक्रोक्लाइमेट' तैयार हो रहा है।

खानपान में बदलाव और चिकित्सा निगरानी

पशु चिकित्सकों ने गर्मी के मद्देनज़र जानवरों के आहार में भी संशोधन किए हैं। मांसाहारी पशुओं का दैनिक भोजन 500 ग्राम से 1 किलोग्राम तक कम किया गया है ताकि पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। शाकाहारी जानवरों और पक्षियों को तरबूज, खरबूजा और खीरा जैसे जलयुक्त फल दिए जा रहे हैं। इसके साथ ही विटामिन-सी आधारित ओआरएस और मल्टी-मिनरल विटामिन मिश्रण भी आहार में शामिल किए गए हैं ताकि इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बना रहे।

खुले क्षेत्र में विचरण करने वाले लंगूर, नीलगाय, मोर और साही के लिए जंगल क्षेत्र में कई जल-स्रोत स्थापित किए गए हैं, जिन्हें नियमित रूप से साफ और भरा जाता है।

चौबीसों घंटे पशु चिकित्सा सेवा

जानवरों की सेहत पर निरंतर निगरानी के लिए 24 घंटे पशु चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। चिड़ियाघर के कर्मचारी और पशु चिकित्सक लगातार हर बाड़े की स्थिति का जायज़ा ले रहे हैं। यह ऐसे समय में उल्लेखनीय कदम है जब देशभर के कई शहरों में तापमान सामान्य से कई डिग्री ऊपर बना हुआ है और वन्यजीव संरक्षण में जलवायु अनुकूलन की ज़रूरत तेज़ी से महसूस की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल की ओर भी इशारा करता है — क्या देश के अन्य चिड़ियाघरों और वन्यजीव अभयारण्यों में भी ऐसी तैयारी है? गुजरात ने एक मॉडल प्रस्तुत किया है, पर देशभर में जलवायु अनुकूलन की कोई एकसमान नीति अभी भी अनुपस्थित है। जब तापमान हर साल नए रिकॉर्ड तोड़ रहा हो, तो कैप्टिव वन्यजीव प्रबंधन में माइक्रोक्लाइमेट नियंत्रण को मौसमी प्रयोग नहीं, बल्कि स्थायी बुनियादी ढाँचे का हिस्सा बनाना होगा।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंद्रोदा नेचर पार्क में गर्मी से राहत के लिए क्या-क्या इंतजाम किए गए हैं?
पार्क में 15 बड़े एयर कूलर और 20 हाई-प्रेशर पॉप-अप स्प्रिंकलर लगाए गए हैं, साथ ही खस की टट्टियाँ और एग्रो-नेट शेड भी स्थापित किए गए हैं। ये उपाय अप्रैल 2026 से लागू हैं और मानसून तक जारी रहेंगे।
इंद्रोदा नेचर पार्क में कितने और कौन-कौन से जानवर हैं?
पार्क में इस समय 600 से अधिक जानवर हैं, जिनमें तीन शेर, दो बाघ, तीन तेंदुए, मगरमच्छ, साही, विभिन्न सरीसृप और पक्षियों की कई प्रजातियाँ शामिल हैं।
क्या गर्मी में जानवरों के खानपान में भी बदलाव किया गया है?
हाँ, पशु चिकित्सकों ने मांसाहारी पशुओं का दैनिक भोजन 500 ग्राम से 1 किलोग्राम तक घटाया है। शाकाहारी जानवरों और पक्षियों को तरबूज, खरबूजा और खीरा दिया जा रहा है, और ओआरएस व मल्टी-मिनरल विटामिन मिश्रण भी आहार में शामिल किए गए हैं।
इन उपायों से बाड़ों का तापमान कितना कम हो रहा है?
पार्क प्रबंधन के अनुसार, एयर कूलर, स्प्रिंकलर और प्राकृतिक छाया के संयुक्त उपयोग से बाड़ों का तापमान बाहर की तुलना में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक कम बनाए रखा जा रहा है।
ये इंतजाम कब तक जारी रहेंगे और इनकी निगरानी कौन कर रहा है?
ये उपाय मानसून आने तक जारी रहेंगे। गुजरात इकोलॉजिकल एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन इन्हें संचालित कर रही है और पार्क में 24 घंटे पशु चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध हैं।
राष्ट्र प्रेस
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