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आईएनएस कुलिश सिंगापुर पहुंचा, क्रांजी युद्ध स्मारक पर होगी श्रद्धांजलि

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आईएनएस कुलिश सिंगापुर पहुंचा, क्रांजी युद्ध स्मारक पर होगी श्रद्धांजलि

सारांश

भारतीय नौसेना का पोत आईएनएस कुलिश सिंगापुर पहुँचा है — क्रांजी युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि और उच्चायुक्त से मुलाकात के साथ यह दौरा दोनों देशों के साझा इतिहास और बढ़ती समुद्री साझेदारी का प्रतीक है। AIME-2026 में भागीदारी के बाद यह यात्रा हिंद-प्रशांत में भारत की नौसैनिक सक्रियता को रेखांकित करती है।

मुख्य बातें

आईएनएस कुलिश 6 अक्टूबर 2026 को सिंगापुर के तुआस टर्मिनल पर पहुँचा, पूर्वी बेड़े की ऑपरेशनल तैनाती के तहत।
पोत के कमांडिंग ऑफिसर क्रांजी युद्ध स्मारक पर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
यात्रा के दौरान सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त से भी मुलाकात होगी।
आईएनएस कुलिश इससे पहले फिलीपींस के सुबिक बे में AIME-2026 (दूसरा आसियान-भारत समुद्री अभ्यास) में भाग ले चुका है।
आईएनएस उदयगिरि , आईएनएस शक्ति और आईएनएस कवरत्ती भी हाल ही में सिंगापुर की बंदरगाह यात्राएँ पूरी कर चुके हैं।
भारतीय और सिंगापुर नौसेना के बीच क्रॉस-डेक विजिट समेत कई पेशेवर गतिविधियाँ आयोजित की गई हैं।

भारतीय नौसेना का पोत आईएनएस कुलिश 6 अक्टूबर 2026 को सिंगापुर के तुआस टर्मिनल पर पहुँचा, जहाँ यह पूर्वी बेड़े की ऑपरेशनल तैनाती के अंतर्गत भारत-सिंगापुर के मध्य समुद्री सहयोग को नई गहराई देने के उद्देश्य से तैनात है। इस यात्रा के दौरान पोत के कमांडिंग ऑफिसर क्रांजी युद्ध स्मारक पर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त से भी मुलाकात करेंगे।

दौरे का उद्देश्य और महत्व

नौसेना के अनुसार, सिंगापुर में आईएनएस कुलिश का यह पड़ाव दोनों देशों के बीच समुद्री संपर्क और सहयोग को आगे बढ़ाने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। क्रांजी युद्ध स्मारक की यात्रा इस दौरे का विशेष आकर्षण होगी, जो दोनों देशों के साझा ऐतिहासिक संबंधों और उनकी गहरी विरासत को सम्मानित करने का प्रतीक है।

यह यात्रा एक सुरक्षित, स्थिर और समावेशी समुद्री क्षेत्र के लिए क्षेत्रीय देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की भारत की व्यापक नीतिगत प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। गौरतलब है कि भारत-सिंगापुर नौसैनिक संपर्क लगातार गहरा होता रहा है — यह दौरा उसी कड़ी की नवीनतम कड़ी है।

आसियान-भारत समुद्री अभ्यास से जुड़ाव

इससे पहले आईएनएस कुलिश फिलीपींस के सुबिक बे में आयोजित दूसरे आसियान-भारत समुद्री अभ्यास (AIME-2026) में भी सक्रिय रूप से भाग ले चुका है। यह बहुपक्षीय अभ्यास भारत और आसियान देशों की नौसेनाओं के बीच समुद्री तालमेल एवं अंतर-संचालन क्षमता को मजबूत करने के लिए आयोजित किया गया था।

यह ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर क्षेत्रीय देशों के बीच संयुक्त प्रयास तेज हो रहे हैं। भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े की यह ऑपरेशनल तैनाती उसी रणनीतिक दिशा का हिस्सा है।

पूर्व में भी हो चुकी हैं सफल बंदरगाह यात्राएँ

हाल ही में भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के युद्धपोत आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस शक्ति और आईएनएस कवरत्ती ने भी सिंगापुर की सफल बंदरगाह यात्राएँ पूरी की थीं। ये यात्राएँ परिचालन तैनाती के अंतर्गत संपन्न हुईं और इन्होंने दोनों देशों की समुद्री साझेदारी को और सुदृढ़ किया।

पेशेवर आदान-प्रदान और क्रॉस-डेक विजिट

सिंगापुर प्रवास के दौरान भारतीय नौसेना और रिपब्लिक ऑफ सिंगापुर नेवी के बीच अनेक पेशेवर गतिविधियाँ आयोजित की गई हैं। इनमें दोनों देशों के नौसैनिकों के बीच क्रॉस-डेक विजिट प्रमुख रही, जिसका उद्देश्य ऑपरेशनल प्रक्रियाओं की साझा समझ विकसित करना, आपसी समन्वय को मजबूत करना और संयुक्त अभियानों में बेहतर तालमेल स्थापित करना है।

आगे की राह

आईएनएस कुलिश की यह यात्रा भारत-सिंगापुर समुद्री साझेदारी को नई ऊँचाई देने की उम्मीद जगाती है। इस दौरे से न केवल द्विपक्षीय नौसैनिक संबंधों को बल मिलेगा, बल्कि व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री उपस्थिति और विश्वसनीयता को भी मजबूती मिलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो AIME-2026 में सक्रिय भागीदारी के तुरंत बाद आई है। उल्लेखनीय है कि पूर्वी बेड़े के एकाधिक जहाजों ने हाल ही में सिंगापुर दौरे किए हैं, जो इस द्विपक्षीय समुद्री साझेदारी की बढ़ती आवृत्ति और गहराई को दर्शाता है। क्रांजी युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि का प्रतीकात्मक महत्व भी कम नहीं — यह भारत की उस सॉफ्ट पावर कूटनीति का हिस्सा है जो साझे इतिहास को समकालीन रणनीतिक साझेदारी की नींव बनाती है। असली परीक्षा यह होगी कि ये यात्राएँ क्रॉस-डेक विजिट से आगे बढ़कर ठोस अंतर-संचालन और सूचना-साझेदारी के तंत्र में कब तब्दील होती हैं।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएनएस कुलिश की सिंगापुर यात्रा का उद्देश्य क्या है?
आईएनएस कुलिश की यह यात्रा भारत और सिंगापुर के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े की ऑपरेशनल तैनाती का हिस्सा है। इस दौरान क्रांजी युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि, उच्चायुक्त से मुलाकात और दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर गतिविधियाँ शामिल हैं।
आईएनएस कुलिश सिंगापुर कब पहुँचा?
आईएनएस कुलिश 6 अक्टूबर 2026 को सिंगापुर के तुआस टर्मिनल पर पहुँचा। यह दौरा भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े की ऑपरेशनल तैनाती के अंतर्गत है।
AIME-2026 क्या है और इसमें आईएनएस कुलिश की क्या भूमिका रही?
AIME-2026 यानी दूसरा आसियान-भारत समुद्री अभ्यास फिलीपींस के सुबिक बे में आयोजित हुआ, जिसमें भारत और आसियान देशों की नौसेनाओं ने मिलकर समुद्री तालमेल का अभ्यास किया। आईएनएस कुलिश इस अभियान का हिस्सा बना था और सिंगापुर यात्रा उसी तैनाती की अगली कड़ी है।
क्रांजी युद्ध स्मारक का भारत-सिंगापुर संबंधों में क्या महत्व है?
क्रांजी युद्ध स्मारक सिंगापुर में स्थित है और इसमें द्वितीय विश्वयुद्ध के उन शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है जिनका भारत और सिंगापुर के साझे इतिहास से गहरा जुड़ाव है। भारतीय नौसेना की यहाँ यात्रा दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
हाल ही में और कौन से भारतीय नौसेना जहाजों ने सिंगापुर का दौरा किया है?
आईएनएस कुलिश से पहले भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस शक्ति और आईएनएस कवरत्ती ने भी सिंगापुर की बंदरगाह यात्राएँ सफलतापूर्वक पूरी की थीं। इन यात्राओं ने दोनों देशों की समुद्री साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को और सुदृढ़ किया।
राष्ट्र प्रेस
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