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भारत-सिंगापुर नौसेना विशेषज्ञ संवाद: पी-8आई विमान के साथ पाया लेबार में समुद्री सुरक्षा पर मंथन

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भारत-सिंगापुर नौसेना विशेषज्ञ संवाद: पी-8आई विमान के साथ पाया लेबार में समुद्री सुरक्षा पर मंथन

सारांश

भारतीय नौसेना का पी-8आई विमान सिंगापुर के पाया लेबार एयरबेस पहुँचा और दोनों देशों की नौसेनाओं ने समुद्री निगरानी पर SMEE कार्यक्रम में हिस्सा लिया। 16वीं रक्षा नीति वार्ता और सीडीएस जनरल सुब्रमणि से उच्चायुक्त की मुलाकात के बाद यह कदम भारत-सिंगापुर रक्षा साझेदारी को नई ऊँचाई पर ले जाता है।

मुख्य बातें

भारतीय नौसेना और सिंगापुर गणराज्य नौसेना ने 30 जून 2026 को पाया लेबार एयरबेस पर SMEE कार्यक्रम में भाग लिया।
पी-8आई (पोसीडॉन-8 इंडिया) विमान की सिंगापुर यात्रा के दौरान समुद्री निगरानी क्षमताओं, प्रशिक्षण और परिचालन प्रक्रियाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
सिंगापुर के उच्चायुक्त साइमन वोंग ने नवनियुक्त CDS जनरल एन.एस.
राजा सुब्रमणि से मुलाकात कर संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा सहयोग पर विचार साझा किए।
पिछले महीने भारत-सिंगापुर रक्षा नीति वार्ता का 16वाँ दौर आयोजित हुआ, जिसमें रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और स्थायी सचिव जोसेफ लिओंग ने सह-अध्यक्षता की।
दोनों देशों ने रक्षा उद्योग सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान और क्षेत्रीय सुरक्षा पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।

भारतीय नौसेना और सिंगापुर गणराज्य नौसेना ने 30 जून 2026 को समुद्री निगरानी विमान संचालन पर केंद्रित एक उच्चस्तरीय सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट एक्सचेंज (SMEE) कार्यक्रम आयोजित किया। यह संवाद भारतीय नौसेना के पी-8आई (पोसीडॉन-8 इंडिया) विमान की सिंगापुर के पाया लेबार एयरबेस यात्रा के अवसर पर संपन्न हुआ, जो दोनों देशों के बीच गहराते रक्षा संबंधों का ताज़ा प्रमाण है।

विशेषज्ञ संवाद में क्या हुआ

सिंगापुर स्थित भारतीय उच्चायोग ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए एक पोस्ट में बताया कि SMEE कार्यक्रम में समुद्री निगरानी क्षमताओं, परिचालन प्रक्रियाओं, प्रशिक्षण पद्धतियों और सर्वोत्तम व्यावहारिक तरीकों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। उच्चायोग ने कहा कि यह आयोजन दोनों देशों के दीर्घकालिक और सुदृढ़ रक्षा सहयोग को रेखांकित करता है।

पी-8आई विमान अमेरिकी बोइंग कंपनी द्वारा निर्मित एक उन्नत समुद्री गश्ती एवं पनडुब्बी-रोधी विमान है, जिसे भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी के लिए संचालित करती है। इस विमान की सिंगापुर यात्रा द्विपक्षीय तकनीकी आदान-प्रदान के नए आयाम खोलती है।

सीडीएस जनरल सुब्रमणि से मुलाकात

इससे पूर्व, सिंगापुर के भारत में उच्चायुक्त साइमन वोंग ने भारत के नवनियुक्त चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि से मुलाकात की। इस बैठक में संयुक्त सैन्य अभ्यास, आपसी आदान-प्रदान और दोनों सेनाओं के बीच चल रहे संवाद-तंत्र पर चर्चा हुई।

वोंग ने एक्स पर लिखा कि उन्होंने जनरल सुब्रमणि को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी और दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रक्षा सहयोग, प्रमुख सैन्य अभ्यासों तथा नियमित बैठकों पर विचार साझा किए। उन्होंने यह भी कहा कि जनरल सुब्रमणि के नेतृत्व में इस साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ बनाने के अवसरों पर भी बात हुई।

16वीं रक्षा नीति वार्ता: पिछले महीने का अहम दौर

गौरतलब है कि पिछले महीने सिंगापुर में भारत-सिंगापुर रक्षा नीति वार्ता का 16वाँ दौर आयोजित हुआ था। इसकी सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और सिंगापुर के रक्षा मंत्रालय के स्थायी सचिव जोसेफ लिओंग ने संयुक्त रूप से की।

दोनों पक्षों ने अब तक के रक्षा सहयोग की समीक्षा की और सैन्य सहयोग, रक्षा उद्योग, क्षमता निर्माण तथा क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की। रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करना भी इस वार्ता का प्रमुख एजेंडा रहा।

आम जनता और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ रहे हैं और भारत अपनी नौसैनिक उपस्थिति को दक्षिण-पूर्व एशिया में विस्तार दे रहा है। सिंगापुर के साथ यह गहराता सहयोग भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति को व्यावहारिक धरातल पर मज़बूती देता है।

आगे चलकर दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा उद्योग सहयोग के और विस्तार की संभावना है, जो इस क्षेत्र में भारत की रणनीतिक साझेदारियों को नई दिशा देगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गहराई से देखें तो यह हिंद-प्रशांत में भारत की बढ़ती नौसैनिक कूटनीति का हिस्सा है। पी-8आई विमान की सिंगापुर यात्रा — जो मलक्का जलडमरूमध्य के निकट एक रणनीतिक ठिकाना है — यह संकेत देती है कि भारत अपनी समुद्री निगरानी क्षमता को दक्षिण-पूर्व एशिया में विस्तार दे रहा है। 16वीं रक्षा नीति वार्ता और नए CDS से मुलाकात का यह क्रम बताता है कि यह संबंध अब केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा वास्तुकला का अंग बन रहा है। मुख्यधारा की कवरेज इसे शिष्टाचार-भेंट के रूप में पेश करती है, जबकि असली महत्त्व रक्षा उद्योग सहयोग के उन 'नए क्षेत्रों' में है जिनका ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-सिंगापुर SMEE कार्यक्रम क्या है?
SMEE यानी सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट एक्सचेंज एक ऐसा द्विपक्षीय कार्यक्रम है जिसमें दोनों देशों की नौसेनाओं के विशेषज्ञ किसी विशेष तकनीकी या परिचालन विषय पर ज्ञान और अनुभव साझा करते हैं। 30 जून 2026 को यह कार्यक्रम समुद्री निगरानी विमान संचालन पर केंद्रित था।
पी-8आई विमान सिंगापुर क्यों गया?
भारतीय नौसेना का पी-8आई विमान सिंगापुर के पाया लेबार एयरबेस के दौरे पर गया, जिसके दौरान SMEE कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच समुद्री निगरानी क्षमताओं और परिचालन प्रक्रियाओं पर विचार-विमर्श करना था।
CDS जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि और सिंगापुर उच्चायुक्त की बैठक में क्या हुआ?
सिंगापुर के उच्चायुक्त साइमन वोंग ने नवनियुक्त CDS जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि से मुलाकात की और उन्हें नई जिम्मेदारी पर बधाई दी। दोनों ने संयुक्त सैन्य अभ्यास, आपसी आदान-प्रदान और इस साझेदारी को और मज़बूत बनाने के अवसरों पर चर्चा की।
भारत-सिंगापुर रक्षा नीति वार्ता का 16वाँ दौर किस पर केंद्रित था?
पिछले महीने सिंगापुर में आयोजित 16वीं रक्षा नीति वार्ता में सैन्य सहयोग, रक्षा उद्योग, क्षमता निर्माण और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा हुई। इसकी सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और सिंगापुर के रक्षा मंत्रालय के स्थायी सचिव जोसेफ लिओंग ने की।
भारत-सिंगापुर रक्षा सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?
सिंगापुर मलक्का जलडमरूमध्य के निकट एक रणनीतिक स्थान पर है, जो हिंद-प्रशांत व्यापार मार्गों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत यह सहयोग समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में सहायक है।
राष्ट्र प्रेस
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