भारत-सिंगापुर नौसेना विशेषज्ञ संवाद: पी-8आई विमान के साथ पाया लेबार में समुद्री सुरक्षा पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना और सिंगापुर गणराज्य नौसेना ने 30 जून 2026 को समुद्री निगरानी विमान संचालन पर केंद्रित एक उच्चस्तरीय सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट एक्सचेंज (SMEE) कार्यक्रम आयोजित किया। यह संवाद भारतीय नौसेना के पी-8आई (पोसीडॉन-8 इंडिया) विमान की सिंगापुर के पाया लेबार एयरबेस यात्रा के अवसर पर संपन्न हुआ, जो दोनों देशों के बीच गहराते रक्षा संबंधों का ताज़ा प्रमाण है।
विशेषज्ञ संवाद में क्या हुआ
सिंगापुर स्थित भारतीय उच्चायोग ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए एक पोस्ट में बताया कि SMEE कार्यक्रम में समुद्री निगरानी क्षमताओं, परिचालन प्रक्रियाओं, प्रशिक्षण पद्धतियों और सर्वोत्तम व्यावहारिक तरीकों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। उच्चायोग ने कहा कि यह आयोजन दोनों देशों के दीर्घकालिक और सुदृढ़ रक्षा सहयोग को रेखांकित करता है।
पी-8आई विमान अमेरिकी बोइंग कंपनी द्वारा निर्मित एक उन्नत समुद्री गश्ती एवं पनडुब्बी-रोधी विमान है, जिसे भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी के लिए संचालित करती है। इस विमान की सिंगापुर यात्रा द्विपक्षीय तकनीकी आदान-प्रदान के नए आयाम खोलती है।
सीडीएस जनरल सुब्रमणि से मुलाकात
इससे पूर्व, सिंगापुर के भारत में उच्चायुक्त साइमन वोंग ने भारत के नवनियुक्त चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि से मुलाकात की। इस बैठक में संयुक्त सैन्य अभ्यास, आपसी आदान-प्रदान और दोनों सेनाओं के बीच चल रहे संवाद-तंत्र पर चर्चा हुई।
वोंग ने एक्स पर लिखा कि उन्होंने जनरल सुब्रमणि को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी और दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रक्षा सहयोग, प्रमुख सैन्य अभ्यासों तथा नियमित बैठकों पर विचार साझा किए। उन्होंने यह भी कहा कि जनरल सुब्रमणि के नेतृत्व में इस साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ बनाने के अवसरों पर भी बात हुई।
16वीं रक्षा नीति वार्ता: पिछले महीने का अहम दौर
गौरतलब है कि पिछले महीने सिंगापुर में भारत-सिंगापुर रक्षा नीति वार्ता का 16वाँ दौर आयोजित हुआ था। इसकी सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और सिंगापुर के रक्षा मंत्रालय के स्थायी सचिव जोसेफ लिओंग ने संयुक्त रूप से की।
दोनों पक्षों ने अब तक के रक्षा सहयोग की समीक्षा की और सैन्य सहयोग, रक्षा उद्योग, क्षमता निर्माण तथा क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की। रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करना भी इस वार्ता का प्रमुख एजेंडा रहा।
आम जनता और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ रहे हैं और भारत अपनी नौसैनिक उपस्थिति को दक्षिण-पूर्व एशिया में विस्तार दे रहा है। सिंगापुर के साथ यह गहराता सहयोग भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति को व्यावहारिक धरातल पर मज़बूती देता है।
आगे चलकर दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा उद्योग सहयोग के और विस्तार की संभावना है, जो इस क्षेत्र में भारत की रणनीतिक साझेदारियों को नई दिशा देगा।