आईएनएस सुदर्शिनी ने पार किया अटलांटिक महासागर, 19 दिन की ऐतिहासिक यात्रा में 10,000 नॉटिकल मील तय
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना के सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी ने 27 मई 2026 को एंटीगा पहुँचकर इतिहास रच दिया — यह जहाज का पहला ट्रांस-अटलांटिक क्रॉसिंग अभियान है, जो 'लोकायन 26' अभियान के तहत पूरा किया गया। केप वर्डे के मिंडेलो से एंटीगा तक का यह सफर लगातार 19 दिनों तक चला और अभियान का सबसे लंबा चरण रहा, जिसमें जहाज ने अधिकांश दूरी पारंपरिक पालों के सहारे तय की।
ऐतिहासिक उपलब्धि का महत्व
आईएनएस सुदर्शिनी ने कोच्चि से 20 जनवरी 2026 को अपनी यात्रा शुरू की थी। अब तक यह जहाज 10,000 नॉटिकल मील की दूरी पूरी कर चुका है। गौरतलब है कि इससे पहले भारतीय नौसेना का ट्रांस-अटलांटिक अभियान वर्ष 2007 में आईएनएस तरंगिणी द्वारा किया गया था — यानी लगभग दो दशकों के अंतराल के बाद यह ऐतिहासिक उपलब्धि दोहराई गई है।
समुद्री चुनौतियाँ और नौसैनिक कौशल
अटलांटिक महासागर की विशाल लहरें, तेज हवाएं और कठिन मौसमी परिस्थितियाँ पूरे सफर में चुनौती बनी रहीं। नौसेना के अनुसार, भारतीय नौसैनिकों ने बेहतरीन समन्वय, सतत निगरानी और पारंपरिक नौवहन तकनीकों के दम पर हर बाधा को पार किया। यह यात्रा भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और आधुनिक नौसैनिक प्रशिक्षण दोनों का प्रमाण है।
एंटीगा में भव्य स्वागत
एंटीगा पहुँचने पर आईएनएस सुदर्शिनी का स्वागत भारत के मानद कॉन्सुल जनरल विजय तेवानी और एंटीगा एवं बारबुडा डिफेंस फोर्स के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ब्रिगेडियर टेलबर्ट बेंजामिन ने किया। एंटीगा प्रवास के दौरान जहाज का दल पेशेवर बैठकों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामुदायिक गतिविधियों में हिस्सा लेगा।
'लोकायन 26' अभियान का व्यापक उद्देश्य
'लोकायन 26' अभियान का लक्ष्य केवल समुद्री यात्रा नहीं है — इसके तहत विभिन्न देशों के साथ समुद्री सहयोग बढ़ाना, सांस्कृतिक संबंध मजबूत करना और भारत की समुद्री विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना है। यह अभियान वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को साकार करता है। पश्चिम एशिया, भूमध्यसागर, यूरोप और अफ्रीका में सफल पोर्ट कॉल्स के बाद अब यह अभियान कैरेबियन और अमेरिकी चरण में प्रवेश कर चुका है।
आगे की यात्रा
एंटीगा के बाद आईएनएस सुदर्शिनी अमेरिका के नॉरफॉक बंदरगाह की ओर रवाना होगा। वहाँ जहाज अमेरिका में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित 'सेल 250' कार्यक्रमों में भाग लेगा, जो भारत-अमेरिका नौसैनिक और सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने का अवसर होगा।