13 जुलाई 2026
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आईएनएस सुदर्शिनी ने पार किया अटलांटिक महासागर, 19 दिन की ऐतिहासिक यात्रा में 10,000 नॉटिकल मील तय

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आईएनएस सुदर्शिनी ने पार किया अटलांटिक महासागर, 19 दिन की ऐतिहासिक यात्रा में 10,000 नॉटिकल मील तय

सारांश

लगभग दो दशकों के अंतराल के बाद भारतीय नौसेना ने फिर अटलांटिक पार किया — इस बार आईएनएस सुदर्शिनी के ज़रिए। 19 दिन, पारंपरिक पाल, और 10,000 नॉटिकल मील का सफर 'लोकायन 26' को महज एक समुद्री यात्रा नहीं, भारत की वैश्विक नौसैनिक उपस्थिति का बयान बनाता है।

मुख्य बातें

आईएनएस सुदर्शिनी ने 27 मई 2026 को एंटीगा पहुँचकर अटलांटिक महासागर पार करने का ऐतिहासिक अभियान पूरा किया।
केप वर्डे के मिंडेलो से एंटीगा तक का सफर लगातार 19 दिनों तक चला — अभियान का सबसे लंबा चरण।
जहाज ने कोच्चि से 20 जनवरी 2026 को यात्रा शुरू की और अब तक 10,000 नॉटिकल मील तय किए।
यह 2007 में आईएनएस तरंगिणी के बाद भारतीय नौसेना का पहला ट्रांस-अटलांटिक क्रॉसिंग अभियान है।
अगला पड़ाव अमेरिका का नॉरफॉक बंदरगाह ; जहाज 'सेल 250' कार्यक्रमों में भाग लेगा।

भारतीय नौसेना के सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी ने 27 मई 2026 को एंटीगा पहुँचकर इतिहास रच दिया — यह जहाज का पहला ट्रांस-अटलांटिक क्रॉसिंग अभियान है, जो 'लोकायन 26' अभियान के तहत पूरा किया गया। केप वर्डे के मिंडेलो से एंटीगा तक का यह सफर लगातार 19 दिनों तक चला और अभियान का सबसे लंबा चरण रहा, जिसमें जहाज ने अधिकांश दूरी पारंपरिक पालों के सहारे तय की।

ऐतिहासिक उपलब्धि का महत्व

आईएनएस सुदर्शिनी ने कोच्चि से 20 जनवरी 2026 को अपनी यात्रा शुरू की थी। अब तक यह जहाज 10,000 नॉटिकल मील की दूरी पूरी कर चुका है। गौरतलब है कि इससे पहले भारतीय नौसेना का ट्रांस-अटलांटिक अभियान वर्ष 2007 में आईएनएस तरंगिणी द्वारा किया गया था — यानी लगभग दो दशकों के अंतराल के बाद यह ऐतिहासिक उपलब्धि दोहराई गई है।

समुद्री चुनौतियाँ और नौसैनिक कौशल

अटलांटिक महासागर की विशाल लहरें, तेज हवाएं और कठिन मौसमी परिस्थितियाँ पूरे सफर में चुनौती बनी रहीं। नौसेना के अनुसार, भारतीय नौसैनिकों ने बेहतरीन समन्वय, सतत निगरानी और पारंपरिक नौवहन तकनीकों के दम पर हर बाधा को पार किया। यह यात्रा भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और आधुनिक नौसैनिक प्रशिक्षण दोनों का प्रमाण है।

एंटीगा में भव्य स्वागत

एंटीगा पहुँचने पर आईएनएस सुदर्शिनी का स्वागत भारत के मानद कॉन्सुल जनरल विजय तेवानी और एंटीगा एवं बारबुडा डिफेंस फोर्स के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ब्रिगेडियर टेलबर्ट बेंजामिन ने किया। एंटीगा प्रवास के दौरान जहाज का दल पेशेवर बैठकों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामुदायिक गतिविधियों में हिस्सा लेगा।

'लोकायन 26' अभियान का व्यापक उद्देश्य

'लोकायन 26' अभियान का लक्ष्य केवल समुद्री यात्रा नहीं है — इसके तहत विभिन्न देशों के साथ समुद्री सहयोग बढ़ाना, सांस्कृतिक संबंध मजबूत करना और भारत की समुद्री विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना है। यह अभियान वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को साकार करता है। पश्चिम एशिया, भूमध्यसागर, यूरोप और अफ्रीका में सफल पोर्ट कॉल्स के बाद अब यह अभियान कैरेबियन और अमेरिकी चरण में प्रवेश कर चुका है।

आगे की यात्रा

एंटीगा के बाद आईएनएस सुदर्शिनी अमेरिका के नॉरफॉक बंदरगाह की ओर रवाना होगा। वहाँ जहाज अमेरिका में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित 'सेल 250' कार्यक्रमों में भाग लेगा, जो भारत-अमेरिका नौसैनिक और सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने का अवसर होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब अटलांटिक और कैरेबियन में तिरंगा फहराना एक सुचिंतित कूटनीतिक संदेश भी है। हालाँकि, पारंपरिक पाल-चालित यात्रा की प्रतीकात्मक शक्ति निर्विवाद है, असली कसौटी यह होगी कि 'लोकायन 26' के बाद भारत इन देशों के साथ कितने ठोस समुद्री और रक्षा सहयोग समझौते स्थापित कर पाता है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएनएस सुदर्शिनी क्या है और 'लोकायन 26' अभियान क्या है?
आईएनएस सुदर्शिनी भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप है। 'लोकायन 26' अभियान के तहत यह जहाज 20 जनवरी 2026 को कोच्चि से रवाना हुआ और विभिन्न देशों के साथ समुद्री सहयोग, सांस्कृतिक संबंध और भारत की समुद्री विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने के उद्देश्य से दुनिया की परिक्रमा कर रहा है।
आईएनएस सुदर्शिनी का अटलांटिक पार करना ऐतिहासिक क्यों है?
यह आईएनएस सुदर्शिनी का पहला ट्रांस-अटलांटिक क्रॉसिंग अभियान है। इससे पहले भारतीय नौसेना ने 2007 में आईएनएस तरंगिणी के ज़रिए यह उपलब्धि हासिल की थी, यानी लगभग दो दशकों के अंतराल के बाद यह मील का पत्थर फिर से हासिल किया गया है।
केप वर्डे से एंटीगा तक का सफर कितने दिनों में पूरा हुआ?
नौसेना के अनुसार, केप वर्डे के मिंडेलो से एंटीगा तक का सफर लगातार 19 दिनों तक चला और यह पूरे 'लोकायन 26' अभियान का सबसे लंबा चरण रहा। इस दौरान जहाज ने अधिकांश यात्रा पारंपरिक पालों के सहारे पूरी की।
एंटीगा के बाद आईएनएस सुदर्शिनी कहाँ जाएगा?
एंटीगा प्रवास के बाद आईएनएस सुदर्शिनी अमेरिका के नॉरफॉक बंदरगाह की ओर रवाना होगा, जहाँ वह प्रतिष्ठित 'सेल 250' कार्यक्रमों में भाग लेगा। यह अभियान का कैरेबियन और अमेरिकी चरण है।
अब तक आईएनएस सुदर्शिनी ने कितनी दूरी तय की है?
20 जनवरी 2026 को कोच्चि से रवाना होने के बाद आईएनएस सुदर्शिनी 10,000 नॉटिकल मील की दूरी पूरी कर चुका है। इससे पहले जहाज पश्चिम एशिया, भूमध्यसागर, यूरोप और अफ्रीका में सफल पोर्ट कॉल्स कर चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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