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आईपीएस अधिकारी सुसाइड केस : प्रकाश अंबेडकर का विवादित बयान, क्या सनातन की तुलना अस्पृश्यता से की गई?

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आईपीएस अधिकारी सुसाइड केस : प्रकाश अंबेडकर का विवादित बयान, क्या सनातन की तुलना अस्पृश्यता से की गई?

सारांश

हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या और प्रकाश अंबेडकर के विवादित बयान ने पूरे देश में चर्चा पैदा कर दी है। क्या यह घटना वास्तव में जातिगत भेदभाव की ओर इशारा करती है? जानिए इस मामले की गहराई।

मुख्य बातें

पूरन कुमार का मामला जातिगत भेदभाव का संकेत हो सकता है।
प्रकाश अंबेडकर का विवादित बयान चर्चा का विषय बना।
हरियाणा सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं।

चंडीगढ़, 15 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या का मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। इस घटना के पश्चात, वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) के अध्यक्ष प्रकाश अंबेडकर ने बुधवार को एक विवादस्पद बयान दिया।

प्रकाश अंबेडकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करके सनातन धर्म की तुलना अस्पृश्यता से की।

उन्होंने यह दावा किया कि सनातन धर्म को मानने वाले लोग अस्पृश्यता में विश्वास करते हैं और प्राण लेते हैं। उन्होंने लिखा, "सनातन धर्म = अस्पृश्यतासनातन धर्म अस्पृश्यता में विश्वास करता है और प्राण लेता है!" यह टिप्पणी पूरन कुमार की मौत को जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए की गई है।

वाई. पूरन कुमार, 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी, ने 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ स्थित अपने आधिकारिक आवास पर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। वे हाल ही में सुनारिया जेल के अधीक्षक पद पर स्थानांतरित किए गए थे, जहाँ राम रहीम जैसे बड़े अपराधी कैद हैं। पूरन दलित समुदाय से थे।

पुलिस के अनुसार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पूरन कुमार ने अपनी सर्विस पिस्तौल से खुद को गोली मार ली और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। अधिकारी ने नौ पन्नों का एक 'अंतिम नोट' छोड़ा है जिसमें 15 वर्तमान और पूर्व अधिकारियों के नाम हैं, जिससे राज्य पुलिस के शीर्ष अधिकारी जातिवाद और पक्षपात के आरोपों के घेरे में आ गए हैं।

इस मामले में एक और मोड़ आया जब 14 अक्टूबर को रोहतक के साइबर सेल में तैनात एएसआई संदीप लाठर ने भी आत्महत्या कर ली। लाठर ने अपने सुसाइड नोट और वीडियो में पूरन कुमार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। हालांकि, पूरन के परिवार का कहना है कि आईपीएस अधिकारी ने दबाव के चलते आत्महत्या जैसा कदम उठाया था। हरियाणा सरकार ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन विपक्ष ने इसे दलित उत्पीड़न का प्रतीक बताया।

बता दें कि वाई. पूरन कुमार के परिवार ने घटना के नौवें दिन पोस्टमार्टम के लिए सहमति दे दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न की समस्याएँ हमारे समाज में गहराई से व्याप्त हैं। हमें इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है, ताकि हम एक समावेशी और समान समाज की दिशा में आगे बढ़ सकें।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूरन कुमार की आत्महत्या का कारण क्या था?
उनकी आत्महत्या का कारण मानसिक दबाव और कथित जातिगत भेदभाव बताया गया है।
प्रकाश अंबेडकर का बयान क्या था?
प्रकाश अंबेडकर ने सनातन धर्म की तुलना अस्पृश्यता से की और इसे जातिगत भेदभाव से जोड़ा।
हरियाणा सरकार का क्या रुख है?
हरियाणा सरकार ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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