18 जुलाई 2026
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पुणे में 19 जुलाई को इस्कॉन श्री गोविंद धाम की रथ यात्रा, प्रभु गोपति दास ने भक्तों को दिया आमंत्रण

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पुणे में 19 जुलाई को इस्कॉन श्री गोविंद धाम की रथ यात्रा, प्रभु गोपति दास ने भक्तों को दिया आमंत्रण

सारांश

पुणे के रावेत में इस्कॉन श्री गोविंद धाम 19 जुलाई को वार्षिक रथ यात्रा निकालेगा — सेलेस्टियल सिटी से एसबी पाटिल कॉलेज होते हुए मंदिर तक। प्रभु गोपति दास ने सभी जाति-धर्म के भक्तों को आमंत्रित किया है। इस्कॉन की यह परंपरा 60 वर्ष पुरानी है और आज विश्वभर में मनाई जाती है।

मुख्य बातें

इस्कॉन श्री गोविंद धाम , पुणे 19 जुलाई 2026 को वार्षिक रथ यात्रा का आयोजन करेगा।
यात्रा रावेत की सेलेस्टियल सिटी से शुरू होकर एसबी पाटिल कॉलेज के मार्ग से मंदिर तक साढ़े सात बजे तक पहुँचेगी।
प्रवक्ता प्रभु गोपति दास ने सभी जाति और धर्म के श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया; प्रसाद की विशेष व्यवस्था।
इस्कॉन संस्थापक भक्तिवेदांत गोस्वामी श्रीप्रभुपाद ने लगभग 60 वर्ष पूर्व यह परंपरा आरंभ की थी।
यह उत्सव अब अमेरिका, रूस, लंदन, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश और पाकिस्तान सहित विश्वभर में मनाया जाता है।

पुणे के रावेत स्थित इस्कॉन श्री गोविंद धाम मंदिर 19 जुलाई 2026 को अपनी वार्षिक रथ यात्रा का आयोजन करने जा रहा है। मंदिर के प्रवक्ता प्रभु गोपति दास ने सभी जाति और धर्म के भक्तों को इस उत्सव में सम्मिलित होने का निमंत्रण दिया है, जिसका उद्देश्य शांति और सामाजिक एकता को बढ़ावा देना है।

यात्रा का मार्ग और समय

प्रभु गोपति दास के अनुसार, यह रथ यात्रा रावेत की सेलेस्टियल सिटी से आरंभ होगी। वहाँ से यह जुलूस एसबी पाटिल कॉलेज के मार्ग से होते हुए साढ़े सात बजे तक इस्कॉन श्री गोविंद धाम पहुँचेगा। मंदिर को विशेष रूप से सजाया गया है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले से ही यहाँ पहुँचने लगे हैं।

रथ खींचने की परंपरा का आध्यात्मिक महत्त्व

प्रभु गोपति दास ने बताया कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भक्त स्वयं रथ को खींचते हुए लाते हैं। उन्होंने इसकी व्याख्या करते हुए कहा, 'रथ को खींचने का अर्थ यही है कि भक्त भगवान को अपने हृदय में लेकर आते हैं।' उन्होंने इस परंपरा को वृंदावन के भक्तों की उस भावना से जोड़ा, जब भगवान श्री कृष्ण के विरह में भक्तों ने मन ही मन उन्हें रथ में बैठाकर यात्रा की थी — और उसी प्रतीक को आज भी जीवित रखा जा रहा है।

इस्कॉन की वैश्विक रथ यात्रा परंपरा

प्रभु गोपति दास ने बताया कि इस्कॉन के संस्थापक आचार्य भक्तिवेदांत गोस्वामी श्रीप्रभुपाद ने लगभग 60 वर्ष पूर्व रथ यात्रा की इस परंपरा को वैश्विक स्तर पर आरंभ किया था। आज यह उत्सव केवल भारत तक सीमित नहीं है — अमेरिका, रूस, लंदन, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश और पाकिस्तान सहित दुनिया के अनेक देशों में इस्कॉन द्वारा रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है।

सर्व-धर्म समभाव और प्रसाद व्यवस्था

इस्कॉन श्री गोविंद धाम की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि इस यात्रा में हर जाति, वर्ग और धर्म के लोग स्वागत के साथ भाग ले सकते हैं। मंदिर प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की विशेष व्यवस्था भी की है। प्रभु गोपति दास ने कहा कि इस उत्सव का एकमात्र लक्ष्य जीवन में शांति का संचार करना है — और इसके सकारात्मक परिणाम भी स्पष्ट दिख रहे हैं। 19 जुलाई को पुणे के रावेत में यह भव्य आयोजन भक्ति, एकता और आनंद का संगम बनने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो शुद्ध धर्म से परे जाकर सामाजिक एकजुटता का माध्यम बनती है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे में इस्कॉन श्री गोविंद धाम की रथ यात्रा कब और कहाँ होगी?
यह रथ यात्रा 19 जुलाई 2026 को पुणे के रावेत में आयोजित होगी। यह सेलेस्टियल सिटी से शुरू होकर एसबी पाटिल कॉलेज के रास्ते इस्कॉन श्री गोविंद धाम तक साढ़े सात बजे तक पहुँचेगी।
रथ यात्रा में कौन भाग ले सकता है?
प्रभु गोपति दास के अनुसार, इस यात्रा में हर जाति और धर्म के लोग सम्मिलित हो सकते हैं। मंदिर की ओर से सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की भी व्यवस्था की गई है।
इस्कॉन रथ यात्रा की परंपरा कितनी पुरानी है?
इस्कॉन के संस्थापक आचार्य भक्तिवेदांत गोस्वामी श्रीप्रभुपाद ने लगभग 60 वर्ष पूर्व रथ यात्रा की इस वैश्विक परंपरा की शुरुआत की थी। आज यह उत्सव अमेरिका, रूस, लंदन, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश और पाकिस्तान सहित दुनियाभर में मनाया जाता है।
रथ यात्रा में रथ खींचने का क्या महत्त्व है?
प्रभु गोपति दास के अनुसार, रथ खींचने का आध्यात्मिक अर्थ यह है कि भक्त भगवान को अपने हृदय में लेकर आते हैं। यह वृंदावन के भक्तों की उस भावना का प्रतीक है जब उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के विरह में मन ही मन उन्हें रथ में बैठाकर यात्रा की थी।
इस रथ यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस्कॉन श्री गोविंद धाम के अनुसार, इस रथ यात्रा का प्रमुख उद्देश्य समाज में शांति और एकता का संचार करना है। यह आयोजन सामुदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने के साथ-साथ भगवान जगन्नाथ की भक्ति का उत्सव भी है।
राष्ट्र प्रेस
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