राजस्थान के 4 प्रमुख पार्कों का नाम होगा 'डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क', CM भजनलाल का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 6 जुलाई 2025 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर घोषणा की कि राज्य के चार प्रमुख शहरों — जयपुर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर — के पार्कों का नामकरण डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर किया जाएगा। इन स्थानों पर उनके जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण में योगदान को प्रदर्शित करने वाले स्मारक भी स्थापित किए जाएंगे।
कौन-से पार्क बदलेंगे नाम
मुख्यमंत्री शर्मा ने स्पष्ट किया कि जयपुर स्थित वुडलैंड पार्क, जोधपुर के विवेक विहार स्थित सेंट्रल पार्क, कोटा के रामचंद्रपुरा अटवाल नगर स्थित पार्क और उदयपुर की सेक्टर-12 योजना स्थित पार्क — इन चारों का नाम अब 'डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क' होगा। यह निर्णय राज्य सरकार द्वारा जयंती के अवसर पर लिया गया।
मुख्यमंत्री की एक्स पोस्ट और पुष्पांजलि
शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए डॉ. मुखर्जी को 'महान शिक्षाविद्, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक और भारतीय जनसंघ के संस्थापक' बताया। उन्होंने लिखा, 'राष्ट्र प्रथम' के मंत्र को जीवन का ध्येय बनाने वाले डॉ. मुखर्जी का देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक चेतना के लिए महान त्याग प्रत्येक देशवासी को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री आवास पर डॉ. मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।
युवा पीढ़ी और राष्ट्र निर्माण का संकल्प
शर्मा ने कहा कि इन स्मारकों और नामकरण से युवा पीढ़ी को डॉ. मुखर्जी के विचारों से जोड़ने में मदद मिलेगी और राष्ट्र सेवा की भावना को बल मिलेगा। उन्होंने इस कदम को 'विकसित भारत' और 'विकसित राजस्थान' के संकल्प की दिशा में एक प्रयास बताया।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी: संक्षिप्त परिचय
गौरतलब है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे, जो आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का आधार बना। वे एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् और राष्ट्रवादी नेता थे, जिन्होंने देश की एकता और अखंडता के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनकी जयंती पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
आगे क्या
नामकरण की औपचारिक प्रक्रिया और स्मारकों की स्थापना की समय-सीमा राज्य सरकार द्वारा अभी घोषित की जानी है। यह कदम राजस्थान में BJP सरकार की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की नीति के अनुरूप है।