जलगांव में फर्जी एक्सीडेंट के जरिए 50 लाख के इंश्योरेंस क्लेम का मामला, 9 आरोपियों की पुलिस हिरासत बढ़ी
सारांश
Key Takeaways
- फर्जी एक्सीडेंट के माध्यम से **इंश्योरेंस क्लेम** का प्रयास
- 9 आरोपी गिरफ्तार, **पुलिस हिरासत** बढ़ी
- जांच में कई **अनियमितताएं** सामने आईं
- मेडिकल ऑफिसर और पुलिसकर्मियों की संलिप्तता
- भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत
जलगांव, 14 मार्च (राष्ट्रीय प्रेस)। जलगांव जिले के चालीसगांव तालुका के दहीवाड़ फाटा पर एक सड़क दुर्घटना के माध्यम से 50 लाख रुपए का बीमा दावा हासिल करने के प्रयास में गिरफ्तार सभी 9 आरोपियों की पुलिस हिरासत को एक बार फिर बढ़ा दिया गया है।
इस मामले में मृतक के परिवार, चालीसगांव ग्रामीण अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर और मेहुनबारे पुलिस स्टेशन के चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। अब तक इस मामले में कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पहले इन सभी को 5 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया था, जिसके बाद चालीसगांव कोर्ट ने उनकी कस्टडी को 4 दिन बढ़ाते हुए 17 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।
चालीसगांव सेशन कोर्ट की सिंगल बेंच, जस्टिस मीनाक्षी धनराज की अदालत में इस मामले की सुनवाई चल रही है। सरकार की तरफ से एडवोकेट रमेश खंडू माने गणेशपुरकर ने पेशी दी, जबकि आरोपियों की ओर से एडवोकेट जितेश पोद्दार, एडवोकेट संदीप सोनवणे और एडवोकेट धीरज पवार ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा।
पुलिस रिमांड की अवधि समाप्त होने के बाद सभी 9 आरोपियों को दोबारा चालीसगांव कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस ने आगे की जांच के लिए अलग-अलग बिंदुओं पर पूछताछ करने हेतु रिमांड बढ़ाने की मांग की। कोर्ट ने पुलिस की मांग को स्वीकार करते हुए सभी आरोपियों को 17 मार्च तक के लिए, यानी 4 दिन की अतिरिक्त पुलिस कस्टडी में भेज दिया।
मामले के अनुसार, चालीसगांव तालुका के दहीवाड़ फाटा पर पिछले वर्ष मालेगांव के एक टू-व्हीलर सवार को एक फोर-व्हीलर ने टक्कर मारी थी। इसके बाद मृतक के परिवार ने इंश्योरेंस कंपनी को सूचित किया कि घायल व्यक्ति की गांव के अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
हालांकि, जब इंश्योरेंस कंपनी ने मामले की जांच की, तो यह स्पष्ट हुआ कि यह पूरी घटना इंश्योरेंस का पैसा हासिल करने के लिए रची गई एक ठगी थी। जांच में पता चला कि मृतक राजेंद्र शालिंदर जाधव की असल में मौत एक साल पहले ही लिवर की गंभीर बीमारी के कारण हो चुकी थी।
सूचना के अनुसार, श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से राजेंद्र जाधव के नाम पर 50 लाख रुपए का पर्सनल एक्सीडेंट बीमा लिया गया था। इस पॉलिसी का दावा उनकी पत्नी अरुणा राजेंद्र जाधव ने किया था।
दावे में बताया गया था कि राजेंद्र जाधव अपनी मोटरसाइकिल से संभाजी शिवाजी पाटिल के साथ दहीवाड़ से मालेगांव जा रहे थे। इसी दौरान एक थार वाहन ने उन्हें टक्कर मारी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए और चालीसगांव ग्रामीण अस्पताल में मृत घोषित कर दिए गए। इस संबंध में मेहुनबारे पुलिस स्टेशन में मामला भी दर्ज किया गया था।
इंश्योरेंस कंपनी ने दावा मिलने के बाद जांच के लिए एक एजेंसी नियुक्त की। जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिससे स्पष्ट हुआ कि पूरा दावा फर्जी था और धोखाधड़ी के उद्देश्य से बनाया गया था।
जांच में यह भी उजागर हुआ कि श्रीराम इंश्योरेंस के अलावा 10 अन्य बीमा कंपनियों से भी मृतक राजेंद्र जाधव के नाम पर सामान्य और जीवन बीमा पॉलिसियां लेने का दावा किया गया था। इससे यह स्पष्ट हुआ कि दुर्घटना और मौत की पूरी कहानी फर्जी तरीके से तैयार की गई थी, रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया और सबूत भी गढ़े गए।
पुलिस के अनुसार, इस साजिश में अरुणा राजेंद्र जाधव, संभाजी शिवाजी पाटिल और महिंद्रा थार वाहन के चालक-मालिक की भूमिका सामने आई है।
इसके अलावा, चालीसगांव ग्रामीण अस्पताल में फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप में तत्कालीन मेडिकल ऑफिसर मंदार करंबलेकर और मेहुनबारे पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मी महेंद्र पाटिल, रवींद्र एकनाथ बत्तीश, सचिन अशोक निकम और सुनील अशोक निकम के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है।