जम्मू-कश्मीर को हक मिलना चाहिए, सदन चलाना सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी: सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने 5 अगस्त 2026 को संसद सत्र के दौरान जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने, कश्मीरी उत्पादों के प्रचार-प्रसार, सदन में बार-बार होने वाले व्यवधान और एनडीए सरकार के प्रति विपक्ष के रुख पर अपने विचार स्पष्ट रूप से रखे। नदवी ने कहा कि संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने की प्राथमिक जिम्मेदारी सत्ताधारी पक्ष की होती है।
कश्मीरी उत्पादों और पहचान का मुद्दा
नदवी ने बताया कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में आने वाले कश्मीरी लोगों के लिए उनके उत्पादों की बिक्री हेतु विशेष दुकानें उपलब्ध कराने की घोषणा की है। उन्होंने कहा, 'ताकि कश्मीर का जो हुनर है, वह देश में फैले।' आर्टिकल 370 पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर संसद में उनकी पार्टी की स्थिति रिकॉर्ड में दर्ज है।
नदवी ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर को मणिपुर, गोवा, केरल, हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश जैसे अन्य पहाड़ी राज्यों की भाँति अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखने का अधिकार मिलना चाहिए। उनके अनुसार यह हक अभी तक जम्मू-कश्मीर को पूरी तरह नहीं मिला है।
सदन में हंगामे की जिम्मेदारी किसकी?
संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित होने के सवाल पर नदवी ने सत्ताधारी पार्टी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, 'सदन की कार्यवाही चले, इसकी जिम्मेदारी सत्ताधारी पार्टी की ज्यादा होती है। विपक्ष का काम मुद्दों को उठाना और राह दिखाना होता है। लेकिन इन मुद्दों को सही से लेना और संसद की कार्यवाही को चलाना, सत्ताधारी पार्टी की जिम्मेदारी होती है।'
छात्रों और युवाओं के साथ विपक्ष
सपा सांसद ने कहा कि देश के कई हिस्सों में छात्र और युवा पीढ़ी विभिन्न समस्याओं से जूझ रही है और सपा समेत समूचा विपक्ष इन मुद्दों को संसद में लगातार उठा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा, 'पूरा विपक्ष छात्रों के साथ है। सदन की कार्यवाही चलनी चाहिए, सभी इसके पक्ष में हैं।'
राजद का केंद्र सरकार पर हमला
इसी विषय पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज कुमार झा ने जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने के वादे को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने कहा, 'उस फैसले का क्या हुआ? केंद्रीय गृह मंत्री इस मुद्दे से बस बच नहीं सकते। अगर उन्होंने राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया था, तो उनसे यह क्यों नहीं पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने वह वादा क्यों तोड़ा?'
आगे क्या होगा
विपक्षी दलों का यह एकजुट दबाव संसद के मौजूदा सत्र में जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे और अनुच्छेद 370 के मुद्दे को केंद्र में बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा सदन में और तीखी बहस का रूप ले सकता है।