कश्मीर में आतंक और अल्पसंख्यकों पर दुर्व्यवहार जारी, 370 हटाने से कुछ नहीं बदला: अबू आजमी
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक अबू आजमी ने 16 अगस्त 2026 को मुंबई में आर्टिकल 370, कश्मीर में जारी आतंकवाद, अल्पसंख्यकों के साथ दुर्व्यवहार, केरल राष्ट्रगान विवाद और नफरत की राजनीति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बेबाकी से अपने विचार रखे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आर्टिकल 370 हटाने के बाद सरकार ने घाटी से आतंकवाद समाप्त होने का वादा किया था, लेकिन ज़मीनी हकीकत अलग है।
आर्टिकल 370 और कश्मीर का इतिहास
आजमी ने कश्मीर के विलय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि समझाते हुए कहा, '1947 में जब भारत आज़ाद हुआ, तो उम्मीद थी कि कश्मीर भारत के साथ रहेगा। बातचीत हुई, लेकिन उस समय पाकिस्तान की तरफ से कबायली ताकतों ने कश्मीर पर हमला कर दिया। कश्मीर को मदद की जरूरत थी, इसलिए वहाँ के नेताओं ने भारतीय नेतृत्व से संपर्क किया। भारतीय नेताओं ने कश्मीर को सुरक्षा और सैन्य मदद दी — हालाँकि इसमें आर्टिकल 370 की शर्त भी शामिल थी, इसलिए वह लागू हो गया था।'
उन्होंने आगे कहा कि मूल सहमति यह थी कि जब विधानसभा से आर्टिकल 370 हटाने का विधेयक पारित होगा, तभी इसे निरस्त किया जाएगा। उनके अनुसार इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
370 हटाने के बाद भी आतंक और अल्पसंख्यकों पर दुर्व्यवहार
आजमी ने सरकार के उस दावे को चुनौती दी जिसमें कहा गया था कि आर्टिकल 370 हटने के बाद घाटी में आतंकवाद खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा, 'पिछले साल हुए हमले में 26 लोग मारे गए और न ही कुछ विकास हुआ। सिर्फ और सिर्फ अल्पसंख्यकों के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब घाटी में सुरक्षा स्थिति को लेकर विभिन्न दलों के बीच बहस तेज़ है।
केरल राष्ट्रगान विवाद और सुप्रीम कोर्ट का फैसला
केरल में स्कूली बच्चों द्वारा राष्ट्रगान न गाने के मामले पर आजमी ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'खबरों के मुताबिक दो बच्चों ने स्कूल में राष्ट्रगान नहीं गाया और वे खड़े भी नहीं हुए। स्कूल ने उन्हें सस्पेंड कर दिया। फिर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि इस आधार पर उन्हें सस्पेंड नहीं किया जा सकता और यह देशद्रोह नहीं है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्र के प्रतीकों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन जबरदस्ती नहीं की जानी चाहिए।
शहरों के नाम बदलने और नफरत की राजनीति पर तीखी टिप्पणी
शहरों के नाम बदलने के मुद्दे पर आजमी ने कहा कि इससे आम जनता की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर कोई असर नहीं पड़ता। उनके अनुसार, 'नाम बदलने से न रोज़गार मिलेगा, न शिक्षा, न अस्पताल। सरकार को चाहिए कि वह नफरत की राजनीति छोड़कर लोगों के असली मुद्दों पर ध्यान दे — महंगाई, बेरोज़गारी और शिक्षा सबसे बड़े मुद्दे हैं।'
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में कई शहरों और सड़कों के नाम बदलने की प्रक्रिया तेज़ हुई है, जिसे विपक्षी दल राजनीतिक ध्रुवीकरण का हिस्सा बताते रहे हैं।
समाजवादी पार्टी का रुख और आगे की राह
आजमी ने भाजपा नेता पंकजा मुंडे की व्यक्तिगत रूप से सराहना करते हुए कहा कि वे दलगत भेदभाव से ऊपर उठकर काम करती हैं। उन्होंने अंत में कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा संविधान और गंगा-जमुनी तहज़ीब में विश्वास रखती है, और देश को आगे ले जाने के लिए सभी धर्मों व समुदायों को साथ लेकर चलना होगा। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान विपक्ष की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं जो अल्पसंख्यक मतदाताओं को एकजुट करने पर केंद्रित है।