जन भवन में हाइड्रोपोनिक चारा इकाई का उद्घाटन, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की पहल से गौशाला को मिलेगा रोज़ 100 किलो ताज़ा चारा
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 29 मई 2026 को लखनऊ स्थित जन भवन में एक हाइड्रोपोनिक चारा उत्पादन इकाई का उद्घाटन किया। यह इकाई जन भवन की गौशाला में रहने वाले गोवंशों को वर्षभर रसायन मुक्त, पौष्टिक और ताज़ा हरा चारा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित की गई है। पर्यावरण संरक्षण और सतत कृषि की दिशा में यह एक उल्लेखनीय कदम माना जा रहा है।
इकाई की क्षमता और उत्पादन प्रक्रिया
जन भवन में स्थापित यह हाइड्रोपोनिक इकाई प्रतिदिन लगभग 100 किलोग्राम हरा चारा उत्पादन करने में सक्षम है। इसमें मक्का, जौ, जई (ओट्स) और गेहूं जैसी पोषक फसलों का उत्पादन किया जाएगा। बीज बुआई से लेकर चारा तैयार होने तक की पूरी प्रक्रिया मात्र आठ दिनों में पूरी हो जाती है, और चक्रीय व्यवस्था के चलते प्रतिदिन ताज़ा उत्पाद उपलब्ध रहेगा।
हाइड्रोपोनिक तकनीक की विशेषताएँ
पारंपरिक खेती की तुलना में हाइड्रोपोनिक प्रणाली में बेहद कम पानी और सीमित स्थान की आवश्यकता होती है। इस तकनीक में किसी भी रासायनिक उर्वरक या कीटनाशक का उपयोग नहीं होता, जिससे तैयार चारा पूरी तरह रसायन मुक्त और उच्च पोषण मूल्य से युक्त होता है। गौरतलब है कि प्रतिकूल मौसम का इस प्रणाली पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, जिससे सर्दी, गर्मी या मानसून — हर मौसम में निर्बाध उत्पादन जारी रहता है।
गौसंरक्षण और पर्यावरण की दिशा में पहल
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की पर्यावरण-केंद्रित सोच के अनुरूप यह इकाई सीमित संसाधनों में गौसंरक्षण को मज़बूत करने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है। यह पहल जल संरक्षण और सतत कृषि के सिद्धांतों के अनुकूल है, और इसे अन्य गौशालाओं के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। यह ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण और उनके पोषण को लेकर नीतिगत जोर बढ़ा है।
आगे की संभावनाएँ
जन भवन में सफल संचालन के बाद इस मॉडल को प्रदेश की अन्य सरकारी गौशालाओं में भी लागू किए जाने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार हाइड्रोपोनिक तकनीक छोटे किसानों और पशुपालकों के लिए भी एक किफायती विकल्प बन सकती है, बशर्ते इसकी प्रारंभिक लागत को अनुदान के माध्यम से सुलभ बनाया जाए।