31 जुलाई 2026
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मणिपुर CM युमनाम खेमचंद सिंह ने लॉन्च किया 'ऊर्जा' जैविक उर्वरक, ₹250 प्रति बोरी में किसानों को मिलेगा

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मणिपुर CM युमनाम खेमचंद सिंह ने लॉन्च किया 'ऊर्जा' जैविक उर्वरक, ₹250 प्रति बोरी में किसानों को मिलेगा

सारांश

मणिपुर सरकार ने रासायनिक खेती से जैविक खेती की ओर बदलाव का संकल्प दोहराया — 'ऊर्जा' उर्वरक को ₹250 प्रति बोरी की सब्सिडी दर पर लॉन्च किया और 4,000 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि पर जैविक खेती का लक्ष्य तय किया। पारदर्शी वितरण के लिए आधार-आधारित सत्यापन अनिवार्य किया गया।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 15 जून 2026 को इंफाल के संजेनथोंग में जैविक उर्वरक ब्रांड 'ऊर्जा' का शुभारंभ किया।
'ऊर्जा' उर्वरक किसानों को ₹250 प्रति बोरी की रियायती दर पर मिलेगा, जबकि बाज़ार मूल्य ₹480 प्रति बोरी है।
मणिपुर में अभी 4,000 हेक्टेयर पर जैविक खेती हो रही है; सरकार अतिरिक्त 4,000 हेक्टेयर जोड़ने की योजना में है।
राज्य में वर्तमान में 2 लाख बोरी यूरिया स्टॉक में उपलब्ध; अधिकारियों ने कमी से इनकार किया।
उर्वरक वितरण अब आधार कार्ड और किसान कार्ड के सत्यापन के आधार पर पारदर्शी तरीके से किया जाएगा।
कृषि विभाग सभी जिलों में वितरण की कड़ी निगरानी करेगा।

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने सोमवार, 15 जून 2026 को इंफाल के संजेनथोंग स्थित कृषि निदेशालय परिसर में आयोजित खरीफ 2026 उर्वरक वितरण शिविर में जैविक उर्वरक ब्रांड 'ऊर्जा' का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने उर्वरक वितरण ट्रकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया। यह पहल रासायनिक उर्वरकों पर राज्य की निर्भरता घटाने और चरणबद्ध तरीके से जैविक खेती को व्यापक स्तर पर अपनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री सिंह ने कार्यक्रम के दौरान बताया कि मणिपुर में अभी तक लगभग 4,000 हेक्टेयर भूमि पर जैविक खेती शुरू हो चुकी है। सरकार आने वाले वर्षों में अतिरिक्त 4,000 हेक्टेयर भूमि को भी जैविक खेती के दायरे में लाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। उन्होंने कार्यक्रम स्थल के निकट स्थापित जैविक खाद की दुकान का निरीक्षण भी किया।

'ऊर्जा' उर्वरक का बाज़ार मूल्य ₹480 प्रति बोरी है, परंतु किसानों को यह ₹250 प्रति बोरी की रियायती दर पर उपलब्ध कराया जाएगा — यानी बाज़ार भाव से लगभग 48% कम। यह सब्सिडी सतत कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहन देने की व्यापक नीति का हिस्सा है।

उर्वरक वितरण की पारदर्शिता

पिछले वर्ष कुछ क्षेत्रों में यूरिया की कमी की शिकायतें सामने आई थीं। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष सितंबर तक लगभग 1.8 लाख बोरी यूरिया वितरित की गई थी। इन शिकायतों के मद्देनज़र अब उर्वरक वितरण आधार कार्ड, किसान कार्ड और स्थान-विशिष्ट आवश्यकताओं के आधार पर किया जा रहा है, ताकि आवंटन निष्पक्ष, पारदर्शी और ज़रूरत-आधारित हो।

सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में राज्य में लगभग 2 लाख बोरी यूरिया स्टॉक में मौजूद है और फिलहाल किसी प्रकार की कमी नहीं है। उर्वरक का वितरण केवल उचित दस्तावेज़ों के सत्यापन के बाद ही किया जाएगा।

निगरानी और जवाबदेही

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि कृषि विभाग के अधिकारी सभी ज़िलों में उर्वरक वितरण की कड़ी निगरानी करेंगे, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके और किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक मिल सके। उन्होंने किसानों से अपील की कि उर्वरक उपलब्धता से जुड़ी किसी भी शिकायत की सूचना तुरंत कृषि निदेशालय को दें।

आम किसानों पर असर

जैविक उर्वरक को रियायती दर पर उपलब्ध कराने से छोटे और सीमांत किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। गौरतलब है कि मणिपुर की अर्थव्यवस्था में कृषि की अहम भूमिका है और रासायनिक उर्वरकों की बढ़ती लागत किसानों पर आर्थिक दबाव डालती रही है। 'ऊर्जा' जैसे जैविक विकल्प न केवल लागत कम करते हैं, बल्कि मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता भी बनाए रखते हैं।

क्या होगा आगे

कार्यक्रम में कृषि आयुक्त थाईथुइलुंग पानमेई, कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जन प्रतिनिधि, किसान और अन्य हितधारक उपस्थित थे। सरकार के अनुसार, आने वाले वर्षों में जैविक खेती का दायरा बढ़ाने और उर्वरक वितरण तंत्र को और सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी। पिछले वर्ष 1.8 लाख बोरी यूरिया वितरित होने के बावजूद कई क्षेत्रों से कमी की शिकायतें आईं — यह दर्शाता है कि वितरण तंत्र में संरचनात्मक खामियाँ हैं जिन्हें आधार-आधारित सत्यापन अकेले नहीं सुधार सकता। 4,000 हेक्टेयर से 8,000 हेक्टेयर का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, परंतु बिना स्पष्ट समयसीमा और स्वतंत्र निगरानी के यह संख्या केवल कागज़ पर रह सकती है। जैविक खेती की ओर बदलाव तभी टिकाऊ होगा जब किसानों को बाज़ार से जोड़ा जाए और जैविक उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जाए।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ऊर्जा' जैविक उर्वरक क्या है और यह किसानों को कैसे मिलेगा?
'ऊर्जा' मणिपुर सरकार द्वारा लॉन्च किया गया जैविक उर्वरक ब्रांड है, जो किसानों को ₹480 के बाज़ार मूल्य के बजाय ₹250 प्रति बोरी की रियायती दर पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसका वितरण आधार कार्ड और किसान कार्ड के सत्यापन के आधार पर किया जाएगा।
मणिपुर में जैविक खेती का वर्तमान दायरा कितना है?
मणिपुर में अभी लगभग 4,000 हेक्टेयर भूमि पर जैविक खेती हो रही है। राज्य सरकार आने वाले वर्षों में अतिरिक्त 4,000 हेक्टेयर भूमि को भी जैविक खेती के अंतर्गत लाने की दिशा में काम कर रही है।
मणिपुर में यूरिया की उपलब्धता की क्या स्थिति है?
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के अनुसार, राज्य में वर्तमान में लगभग 2 लाख बोरी यूरिया स्टॉक में उपलब्ध है और फिलहाल किसी प्रकार की कमी नहीं है। पिछले वर्ष सितंबर तक 1.8 लाख बोरी यूरिया वितरित की गई थी, हालांकि कुछ क्षेत्रों से कमी की शिकायतें भी आई थीं।
उर्वरक वितरण में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जाएगी?
अब उर्वरक वितरण आधार कार्ड, किसान कार्ड और स्थान-विशिष्ट आवश्यकताओं के आधार पर किया जाएगा। कृषि विभाग के अधिकारी सभी जिलों में वितरण की निगरानी करेंगे और किसान शिकायत के लिए कृषि निदेशालय से संपर्क कर सकते हैं।
खरीफ 2026 वितरण शिविर में कौन-कौन उपस्थित थे?
इंफाल के संजेनथोंग में आयोजित शिविर में कृषि आयुक्त थाईथुइलुंग पानमेई, कृषि विभाग के अधिकारी, जन प्रतिनिधि, किसान और अन्य हितधारक उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने की।
राष्ट्र प्रेस
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