मणिपुर CM युमनाम खेमचंद सिंह ने लॉन्च किया 'ऊर्जा' जैविक उर्वरक, ₹250 प्रति बोरी में किसानों को मिलेगा
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने सोमवार, 15 जून 2026 को इंफाल के संजेनथोंग स्थित कृषि निदेशालय परिसर में आयोजित खरीफ 2026 उर्वरक वितरण शिविर में जैविक उर्वरक ब्रांड 'ऊर्जा' का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने उर्वरक वितरण ट्रकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया। यह पहल रासायनिक उर्वरकों पर राज्य की निर्भरता घटाने और चरणबद्ध तरीके से जैविक खेती को व्यापक स्तर पर अपनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री सिंह ने कार्यक्रम के दौरान बताया कि मणिपुर में अभी तक लगभग 4,000 हेक्टेयर भूमि पर जैविक खेती शुरू हो चुकी है। सरकार आने वाले वर्षों में अतिरिक्त 4,000 हेक्टेयर भूमि को भी जैविक खेती के दायरे में लाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। उन्होंने कार्यक्रम स्थल के निकट स्थापित जैविक खाद की दुकान का निरीक्षण भी किया।
'ऊर्जा' उर्वरक का बाज़ार मूल्य ₹480 प्रति बोरी है, परंतु किसानों को यह ₹250 प्रति बोरी की रियायती दर पर उपलब्ध कराया जाएगा — यानी बाज़ार भाव से लगभग 48% कम। यह सब्सिडी सतत कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहन देने की व्यापक नीति का हिस्सा है।
उर्वरक वितरण की पारदर्शिता
पिछले वर्ष कुछ क्षेत्रों में यूरिया की कमी की शिकायतें सामने आई थीं। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष सितंबर तक लगभग 1.8 लाख बोरी यूरिया वितरित की गई थी। इन शिकायतों के मद्देनज़र अब उर्वरक वितरण आधार कार्ड, किसान कार्ड और स्थान-विशिष्ट आवश्यकताओं के आधार पर किया जा रहा है, ताकि आवंटन निष्पक्ष, पारदर्शी और ज़रूरत-आधारित हो।
सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में राज्य में लगभग 2 लाख बोरी यूरिया स्टॉक में मौजूद है और फिलहाल किसी प्रकार की कमी नहीं है। उर्वरक का वितरण केवल उचित दस्तावेज़ों के सत्यापन के बाद ही किया जाएगा।
निगरानी और जवाबदेही
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि कृषि विभाग के अधिकारी सभी ज़िलों में उर्वरक वितरण की कड़ी निगरानी करेंगे, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके और किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक मिल सके। उन्होंने किसानों से अपील की कि उर्वरक उपलब्धता से जुड़ी किसी भी शिकायत की सूचना तुरंत कृषि निदेशालय को दें।
आम किसानों पर असर
जैविक उर्वरक को रियायती दर पर उपलब्ध कराने से छोटे और सीमांत किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। गौरतलब है कि मणिपुर की अर्थव्यवस्था में कृषि की अहम भूमिका है और रासायनिक उर्वरकों की बढ़ती लागत किसानों पर आर्थिक दबाव डालती रही है। 'ऊर्जा' जैसे जैविक विकल्प न केवल लागत कम करते हैं, बल्कि मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता भी बनाए रखते हैं।
क्या होगा आगे
कार्यक्रम में कृषि आयुक्त थाईथुइलुंग पानमेई, कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जन प्रतिनिधि, किसान और अन्य हितधारक उपस्थित थे। सरकार के अनुसार, आने वाले वर्षों में जैविक खेती का दायरा बढ़ाने और उर्वरक वितरण तंत्र को और सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।