जसपाल राणा का निधन: भारतीय शूटिंग ने खोया सबसे बड़ा मार्गदर्शक, सुधांशु मित्तल बोले — 'भरपाई असंभव'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शूटिंग के महान खिलाड़ी और कोच जसपाल राणा का शुक्रवार, 12 जून 2026 को निधन हो गया। वह नई दिल्ली के मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत में उपचाराधीन थे। उनके जाने से भारतीय शूटिंग जगत में एक ऐसी रिक्तता आ गई है, जिसे भर पाना अत्यंत कठिन माना जा रहा है।
शोक की लहर: राजनीति से खेल जगत तक
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता सुधांशु मित्तल ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा, "उन्होंने शूटिंग के जरिए भारत का नाम रोशन किया और खुद को पूरी तरह इस खेल के लिए समर्पित कर दिया। उनका समर्पण बेमिसाल था। मैं उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं।" मित्तल ने आगे कहा कि जसपाल राणा एक बेहतरीन खिलाड़ी होने के साथ-साथ एथलीटों के ट्रेनर और मेंटर भी थे।
मित्तल ने यह भी कहा, "मुझे लगता है कि यह एक ऐसा नुकसान है, जिसकी भरपाई शायद ही हो पाए। एक खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने बहुत संघर्ष किया और देश का मान भी बढ़ाया। उनका जीवन शूटिंग के लिए समर्पित था और उन्होंने कई ऐसे खिलाड़ी भी तैयार किए, जो आज भारत का नाम रोशन कर रहे हैं।"
तृणमूल सांसद की भावभीनी श्रद्धांजलि
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कीर्ति आजाद ने कहा, "जसपाल हमारे देश की शान थे। उन्होंने कई मेडल जीते। मैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानता था — वे मुझे 'भैया' कहकर बुलाते थे।" आजाद ने बताया कि इतनी सफलता के बाद भी जसपाल राणा हमेशा जमीन से जुड़े रहे और उनकी अकादमी में बच्चों को निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता था। उन्होंने कहा, "उनका जाना बहुत बड़ी क्षति है।"
शूटिंग समुदाय में सन्नाटा
शूटर अरिशा शर्मा ने बताया कि वह शुक्रवार को अपनी नियमित प्रैक्टिस के लिए आई थीं, तब उन्हें पता चला कि जसपाल राणा के निधन के कारण शूटिंग क्लास बंद है। उन्होंने कहा, "यह बहुत दुख की बात है कि इतनी कम उम्र में उनका निधन हो गया। वह बहुत बड़े प्रेरणास्रोत थे।"
जसपाल राणा की विरासत
जसपाल राणा भारतीय शूटिंग में एक ऐसे नाम थे जिन्होंने खिलाड़ी के रूप में देश को गौरवान्वित किया और बाद में कोच व मेंटर के रूप में अनगिनत युवा प्रतिभाओं को तराशा। उनकी अकादमी ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शूटर तैयार किए। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय शूटिंग अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई ऊंचाइयां छू रही है — उनकी कमी आने वाली पीढ़ियों को लंबे समय तक महसूस होगी।