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जसपाल राणा का निधन: पूर्व शूटरों ने कहा — 'उनके जैसा कोच भारत में दूसरा नहीं'

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जसपाल राणा का निधन: पूर्व शूटरों ने कहा — 'उनके जैसा कोच भारत में दूसरा नहीं'

सारांश

जसपाल राणा — जूनियर विश्व चैंपियन बनने वाले पहले भारतीय शूटर, पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार विजेता — 49 वर्ष की आयु में चले गए। पूर्व साथी खिलाड़ियों का कहना है: उनके जैसा कोच भारत में दूसरा नहीं था। काशी की मणिकर्णिका उन्हें अंतिम विदाई देगी।

मुख्य बातें

शूटिंग के दिग्गज खिलाड़ी और कोच जसपाल राणा का निधन 13 जून 2026 को दिल्ली में हुआ, आयु मात्र 49 वर्ष ।
पार्थिव शरीर देहरादून में राजकीय सम्मान के साथ विदा किया गया; अंतिम संस्कार वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर।
राणा जूनियर विश्व चैंपियन बनने वाले पहले भारतीय एथलीट थे और उन्होंने विश्व रिकॉर्ड भी बनाया था।
उन्हें अर्जुन पुरस्कार (सबसे कम उम्र में) और पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
निधन के समय वे SAI (भारतीय खेल प्राधिकरण) में बतौर कोच कार्यरत थे।

शूटिंग के महान खिलाड़ी और कोच जसपाल राणा के असामयिक निधन से भारतीय खेल जगत गहरे शोक में डूब गया है। मात्र 49 वर्ष की आयु में शुक्रवार, 13 जून 2026 की सुबह दिल्ली में उनका निधन हुआ, जिसे पूर्व खिलाड़ी और विशेषज्ञ भारतीय निशानेबाजी के लिए अपूरणीय क्षति बता रहे हैं। निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर देहरादून स्थित उनके घर ले जाया गया, जहाँ उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।

वाराणसी में अंतिम संस्कार

जसपाल राणा का अंतिम संस्कार शनिवार, 14 जून 2026 को वाराणसी के प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर किए जाने की व्यवस्था की गई है। उनके परिजन निजी विमान से उनका पार्थिव शरीर वाराणसी लेकर पहुँचे। वाराणसी एयरपोर्ट पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई, जिसके बाद मणिकर्णिका घाट के लिए अंतिम यात्रा निकली। गौरतलब है कि राणा की स्वयं इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार काशी में हो।

पूर्व खिलाड़ियों की श्रद्धांजलि

वाराणसी एयरपोर्ट पर राणा के साथ खेल चुके कई वरिष्ठ पूर्व खिलाड़ी उनके पार्थिव शरीर की प्रतीक्षा में उपस्थित रहे। वीरेंद्र उपाध्याय ने कहा, 'जसपाल राणा का निधन खेल जगत के लिए एक बहुत बड़ी और अपूरणीय क्षति है। इतनी कम उम्र में उनका जाना बहुत कष्टदायी है।'

अंतरराष्ट्रीय कोच रोहित जैन ने कहा, 'जसपाल राणा भारत की पिस्टल शूटिंग को सर्वोच्च शिखर पर ले जाने वाले पहले खिलाड़ी थे। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जब एक थे, उस समय उन्होंने पहला पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था। उनके जैसा कोई भी कोच मौजूदा समय में नहीं है।'

राणा की ऐतिहासिक उपलब्धियाँ

पूर्व राष्ट्रीय शूटर रामेंद्र शर्मा ने कहा, 'यह एक अपूरणीय क्षति है, इसे शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता। हमने जसपाल राणा को 1987 से शूटिंग करते हुए देखा है। जसपाल राणा जूनियर विश्व चैंपियन बनने वाले पहले भारतीय एथलीट थे। राणा की इस उपलब्धि के बाद ही देश में शूटिंग आगे बढ़ी है। हमारे एक सीनियर अशोक पंडित ने कहा था कि जसपाल राणा बनाए नहीं जाते, पैदा होते हैं।'

पूर्व राइफल शूटर पंकज श्रीवास्तव ने कहा, 'जसपाल राणा ने ही सबसे पहले अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि हम विदेशों में भी पदक जीत सकते हैं। उन्होंने विश्व रिकॉर्ड भी बनाया था, जो लंबे समय तक अटूट रहा। सबसे कम उम्र में उन्होंने अर्जुन पुरस्कार जीता, और बाद में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया।'

SAI में कोच की भूमिका

राणा निधन के समय भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) में बतौर कोच कार्यरत थे। पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि राणा की गहरी इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार काशी की पावन भूमि पर हो — और उनके परिजनों ने उनकी यह अंतिम इच्छा पूरी की।

भारतीय शूटिंग पर प्रभाव

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय शूटिंग अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार पदक जीत रही है और राणा उस पीढ़ी की नींव थे जिसने यह परंपरा शुरू की। विशेषज्ञों का मानना है कि उनके जाने से नई पीढ़ी को एक अनुभवी मार्गदर्शक खोना पड़ा है जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक पूरा ढाँचा खड़ा किया। विडंबना यह है कि जब भारतीय शूटिंग ओलंपिक पोडियम पर नियमित दस्तक दे रही है, तब उस परंपरा के संस्थापक को 49 वर्ष की आयु में खोना पड़ा। यह सवाल भी उठता है कि SAI और खेल मंत्रालय ने अनुभवी कोचों की स्वास्थ्य देखभाल को लेकर क्या व्यवस्था की है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जसपाल राणा कौन थे और उनकी प्रमुख उपलब्धियाँ क्या थीं?
जसपाल राणा भारत के महान पिस्टल शूटर और कोच थे, जो जूनियर विश्व चैंपियन बनने वाले पहले भारतीय एथलीट थे। उन्होंने विश्व रिकॉर्ड बनाया, सबसे कम उम्र में अर्जुन पुरस्कार जीता और बाद में पद्मश्री से भी सम्मानित हुए।
जसपाल राणा का निधन कब और कहाँ हुआ?
जसपाल राणा का निधन 13 जून 2026 को शुक्रवार की सुबह दिल्ली में हुआ। वे मात्र 49 वर्ष के थे। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर देहरादून स्थित उनके घर ले जाया गया, जहाँ राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
जसपाल राणा का अंतिम संस्कार कहाँ हुआ?
जसपाल राणा का अंतिम संस्कार वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर किया गया। उनकी स्वयं की इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार काशी में हो, जिसे उनके परिजनों ने पूरा किया।
जसपाल राणा के निधन को भारतीय शूटिंग के लिए इतना बड़ा नुकसान क्यों माना जा रहा है?
राणा वह पहले खिलाड़ी थे जिन्होंने यह साबित किया कि भारतीय शूटर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीत सकते हैं। उनकी जूनियर विश्व चैंपियनशिप के बाद ही देश में शूटिंग को व्यापक प्रोत्साहन मिला। निधन के समय वे SAI में कोच के रूप में नई पीढ़ी को तैयार कर रहे थे।
जसपाल राणा को कौन-कौन से राष्ट्रीय पुरस्कार मिले थे?
जसपाल राणा को सबसे कम उम्र में अर्जुन पुरस्कार प्रदान किया गया था। इसके अलावा उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था, जो भारत के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में से एक है।
राष्ट्र प्रेस
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