जसपाल राणा का निधन: पूर्व शूटरों ने कहा — 'उनके जैसा कोच भारत में दूसरा नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
शूटिंग के महान खिलाड़ी और कोच जसपाल राणा के असामयिक निधन से भारतीय खेल जगत गहरे शोक में डूब गया है। मात्र 49 वर्ष की आयु में शुक्रवार, 13 जून 2026 की सुबह दिल्ली में उनका निधन हुआ, जिसे पूर्व खिलाड़ी और विशेषज्ञ भारतीय निशानेबाजी के लिए अपूरणीय क्षति बता रहे हैं। निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर देहरादून स्थित उनके घर ले जाया गया, जहाँ उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
वाराणसी में अंतिम संस्कार
जसपाल राणा का अंतिम संस्कार शनिवार, 14 जून 2026 को वाराणसी के प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर किए जाने की व्यवस्था की गई है। उनके परिजन निजी विमान से उनका पार्थिव शरीर वाराणसी लेकर पहुँचे। वाराणसी एयरपोर्ट पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई, जिसके बाद मणिकर्णिका घाट के लिए अंतिम यात्रा निकली। गौरतलब है कि राणा की स्वयं इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार काशी में हो।
पूर्व खिलाड़ियों की श्रद्धांजलि
वाराणसी एयरपोर्ट पर राणा के साथ खेल चुके कई वरिष्ठ पूर्व खिलाड़ी उनके पार्थिव शरीर की प्रतीक्षा में उपस्थित रहे। वीरेंद्र उपाध्याय ने कहा, 'जसपाल राणा का निधन खेल जगत के लिए एक बहुत बड़ी और अपूरणीय क्षति है। इतनी कम उम्र में उनका जाना बहुत कष्टदायी है।'
अंतरराष्ट्रीय कोच रोहित जैन ने कहा, 'जसपाल राणा भारत की पिस्टल शूटिंग को सर्वोच्च शिखर पर ले जाने वाले पहले खिलाड़ी थे। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जब एक थे, उस समय उन्होंने पहला पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था। उनके जैसा कोई भी कोच मौजूदा समय में नहीं है।'
राणा की ऐतिहासिक उपलब्धियाँ
पूर्व राष्ट्रीय शूटर रामेंद्र शर्मा ने कहा, 'यह एक अपूरणीय क्षति है, इसे शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता। हमने जसपाल राणा को 1987 से शूटिंग करते हुए देखा है। जसपाल राणा जूनियर विश्व चैंपियन बनने वाले पहले भारतीय एथलीट थे। राणा की इस उपलब्धि के बाद ही देश में शूटिंग आगे बढ़ी है। हमारे एक सीनियर अशोक पंडित ने कहा था कि जसपाल राणा बनाए नहीं जाते, पैदा होते हैं।'
पूर्व राइफल शूटर पंकज श्रीवास्तव ने कहा, 'जसपाल राणा ने ही सबसे पहले अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि हम विदेशों में भी पदक जीत सकते हैं। उन्होंने विश्व रिकॉर्ड भी बनाया था, जो लंबे समय तक अटूट रहा। सबसे कम उम्र में उन्होंने अर्जुन पुरस्कार जीता, और बाद में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया।'
SAI में कोच की भूमिका
राणा निधन के समय भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) में बतौर कोच कार्यरत थे। पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि राणा की गहरी इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार काशी की पावन भूमि पर हो — और उनके परिजनों ने उनकी यह अंतिम इच्छा पूरी की।
भारतीय शूटिंग पर प्रभाव
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय शूटिंग अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार पदक जीत रही है और राणा उस पीढ़ी की नींव थे जिसने यह परंपरा शुरू की। विशेषज्ञों का मानना है कि उनके जाने से नई पीढ़ी को एक अनुभवी मार्गदर्शक खोना पड़ा है जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।