10 अगस्त 2026
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जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन, एनआरएआई बोली — भारतीय खेलों की अपूरणीय क्षति

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जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन, एनआरएआई बोली — भारतीय खेलों की अपूरणीय क्षति

सारांश

भारतीय निशानेबाजी के स्तंभ जसपाल राणा अब नहीं रहे। 49 वर्ष की उम्र में उनका निधन एक ऐसे युग का अंत है जिसने भारत को विश्व रिकॉर्ड से लेकर ओलंपिक पदक तक दिए — पहले एथलीट के रूप में, फिर मनु भाकर जैसी चैंपियन को गढ़ने वाले गुरु के रूप में।

मुख्य बातें

जसपाल राणा का 12 जून 2026 को नई दिल्ली में 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
राणा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 15 पदक (9 स्वर्ण) और एशियन गेम्स में 8 पदक (4 स्वर्ण) जीते थे।
1994 मिलान में जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में विश्व रिकॉर्ड स्कोर के साथ खिताब जीता था।
कोच के रूप में मनु भाकर को पेरिस ओलंपिक 2024 में 2 कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका।
अर्जुन पुरस्कार (1994) , पद्मश्री (1997) और द्रोणाचार्य पुरस्कार (2020) से सम्मानित।
एनआरएआई के अध्यक्ष कलिकेश सिंह देव ने इसे भारतीय खेलों के लिए 'अपूरणीय क्षति' बताया।

भारतीय निशानेबाजी के सबसे चमकदार सितारों में से एक, जसपाल राणा का 12 जून 2026 को नई दिल्ली में निधन हो गया। वे मात्र 49 वर्ष के थे। एक एथलीट के रूप में विश्व रिकॉर्ड और ओलंपिक तक का सफर तय करने वाले राणा ने कोच के रूप में भी भारत को मनु भाकर जैसे ओलंपिक पदक विजेता दिए।

एनआरएआई की श्रद्धांजलि

नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) ने राणा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। एनआरएआई के अध्यक्ष कलिकेश सिंह देव ने कहा, 'जसपाल राणा का जाना भारतीय खेलों के लिए एक ऐसा नुकसान है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती। वह एक ऐसे मार्गदर्शक थे जिन्होंने निशानेबाजों की एक पूरी पीढ़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। एक एथलीट के तौर पर, उनकी उपलब्धियां शानदार थीं, और एक कोच के तौर पर, उनके समर्पण ने हमारे सबसे अच्छे चैंपियंस के करियर को बनाने में मदद की।'

एनआरएआई के सचिव जनरल पवन कुमार सिंह ने कहा, 'भारतीय शूटिंग में जसपाल राणा का योगदान बेमिसाल है। वह हमारे राष्ट्रीय कोचिंग कार्यक्रम में बहुत ज्यादा अनुशासन और तकनीकी दक्षता लेकर आए। इससे युवा प्रतिभाओं को वैश्विक स्तर का पदक विजेता बनाने में मदद मिली। शूटिंग समुदाय में हर कोई उन्हें बहुत याद करेगा।'

एथलीट के रूप में विरासत

28 जून 1976 को उत्तराखंड में जन्मे राणा ने महज 18 वर्ष की उम्र में 1994 में मिलान में 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल इवेंट में विश्व रिकॉर्ड स्कोर के साथ जूनियर वर्ल्ड खिताब जीता। दो वर्ष बाद उन्होंने अटलांटा ओलंपिक 1996 में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

राणा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 15 पदक जीते, जिनमें 1994 से 2006 के बीच चार संस्करणों में 9 स्वर्ण पदक शामिल हैं। एशियन गेम्स में उनके नाम 8 पदक हैं, जिनमें से 4 स्वर्ण हैं। 2006 के दोहा एशियन गेम्स में तेज बुखार के बावजूद उन्होंने 3 स्वर्ण पदक जीते और 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल में 590 के विश्व रिकॉर्ड स्कोर की बराबरी की — यह उनके करियर की सबसे यादगार उपलब्धियों में से एक मानी जाती है।

कोच के रूप में योगदान

सक्रिय निशानेबाजी से संन्यास लेने के बाद राणा ने कोचिंग को अपना मिशन बनाया। उनकी कोचिंग में ही मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक 2024 में निशानेबाजी में 2 कांस्य पदक जीते और एक ही ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली भारत की पहली एथलीट बनीं। गौरतलब है कि राणा ने तीन दशकों से अधिक समय तक भारतीय शूटिंग को समर्पित रखा — पहले खिलाड़ी के रूप में, फिर गुरु के रूप में।

पुरस्कार और सम्मान

भारतीय निशानेबाजी में असाधारण योगदान के लिए राणा को 1994 में अर्जुन पुरस्कार और 1997 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। 2020 में उन्हें बतौर कोच प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार से नवाज़ा गया। यह तीनों प्रमुख खेल सम्मान एक ही व्यक्ति के पास होना भारतीय खेल इतिहास में दुर्लभ है।

आगे क्या

राणा के निधन के बाद भारतीय शूटिंग समुदाय में शोक की लहर है। एनआरएआई ने उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उनकी विरासत को आगे ले जाने की जिम्मेदारी अब उन खिलाड़ियों पर है जिन्हें उन्होंने तराशा।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी मुख्यधारा की कवरेज अक्सर उन्हें महज पृष्ठभूमि में रखती रही। भारतीय खेल तंत्र में कोचों को वह सार्वजनिक पहचान नहीं मिलती जो उनके शिष्यों को मिलती है — राणा इसके सबसे बड़े उदाहरण थे। उनके जाने के बाद सवाल यह है कि क्या भारतीय शूटिंग अपनी अगली पीढ़ी को वैसा तकनीकी और मानसिक नेतृत्व दे पाएगी जो राणा अकेले देते थे।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जसपाल राणा कौन थे और उनका निधन कब हुआ?
जसपाल राणा भारत के सबसे प्रतिष्ठित पिस्टल निशानेबाज और राष्ट्रीय कोच थे। उनका निधन 12 जून 2026 को नई दिल्ली में 49 वर्ष की आयु में हुआ।
जसपाल राणा की प्रमुख खेल उपलब्धियाँ क्या थीं?
राणा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 15 पदक (9 स्वर्ण) और एशियन गेम्स में 8 पदक (4 स्वर्ण) जीते। 1994 में मिलान में जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में विश्व रिकॉर्ड स्कोर के साथ खिताब जीता और 1996 के अटलांटा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
मनु भाकर की सफलता में जसपाल राणा की क्या भूमिका थी?
जसपाल राणा मनु भाकर के कोच थे। उनकी कोचिंग में ही मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक 2024 में 2 कांस्य पदक जीते और एक ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली भारत की पहली एथलीट बनीं।
जसपाल राणा को कौन-कौन से राष्ट्रीय पुरस्कार मिले थे?
राणा को 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1997 में पद्मश्री और 2020 में बतौर कोच द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। एथलीट और कोच दोनों श्रेणियों में शीर्ष सम्मान पाना भारतीय खेल इतिहास में विरल है।
एनआरएआई ने जसपाल राणा के निधन पर क्या कहा?
एनआरएआई के अध्यक्ष कलिकेश सिंह देव ने इसे भारतीय खेलों के लिए 'अपूरणीय क्षति' बताया। सचिव जनरल पवन कुमार सिंह ने कहा कि राणा ने राष्ट्रीय कोचिंग कार्यक्रम में अनुशासन और तकनीकी दक्षता लाकर युवा प्रतिभाओं को वैश्विक पदक विजेता बनाया।
राष्ट्र प्रेस
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