जसपाल राणा की माताजी का निधन, CM धामी ने जताया गहरा शोक — दो सप्ताह में परिवार पर दोहरा आघात
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 28 जून 2026 को भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज पद्मश्री स्व. जसपाल राणा की माताजी — नारायण सिंह राणा की पत्नी — के निधन पर गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। राणा परिवार पर यह दोहरा आघात है, क्योंकि महज दो सप्ताह पहले 12 जून 2026 को 49 वर्ष की आयु में जसपाल राणा का दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया था।
मुख्यमंत्री धामी की संवेदनाएं
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, 'नारायण सिंह राणा की पत्नी एवं प्रसिद्ध भारतीय निशानेबाज पद्मश्री स्व. जसपाल राणा की पूज्य माताजी के निधन का अत्यंत दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। इस कठिन घड़ी में मेरी गहरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति दें।' यह ऐसे समय में आया है जब राणा परिवार अभी जसपाल के असमय निधन के सदमे से उबरा भी नहीं था।
जसपाल राणा: एक असाधारण निशानेबाज का सफर
28 जून 1976 को टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड में जन्मे जसपाल राणा ने 12 साल की अल्पायु में ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था, जब उन्होंने 1988 की 31वीं राष्ट्रीय निशानेबाजी प्रतियोगिता में रजत पदक जीता। 1994 में इटली के मिलान में आयोजित विश्व निशानेबाजी प्रतियोगिता में जूनियर स्तर पर विश्व रिकॉर्ड बनाकर उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया। 1996 के अटलांटा ओलंपिक में उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व किया।
गौरतलब है कि राणा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 15 पदक जीते, जिनमें 1994 से 2006 के बीच चार संस्करणों में 9 स्वर्ण पदक शामिल हैं। एशियन गेम्स में उनके नाम 8 पदक हैं, जिनमें 4 स्वर्ण शामिल हैं।
दोहा 2006: बुखार में भी तीन स्वर्ण
जसपाल राणा की सबसे यादगार उपलब्धि 2006 के दोहा एशियन गेम्स में आई, जहाँ तेज बुखार से पीड़ित होने के बावजूद उन्होंने तीन स्वर्ण पदक जीते और 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल इवेंट में 590 के विश्व रिकॉर्ड स्कोर की बराबरी की। यह प्रदर्शन भारतीय खेल इतिहास की सबसे प्रेरणादायी गाथाओं में से एक माना जाता है।
कोच के रूप में विरासत: मनु भाकर की सफलता
एथलीट के रूप में संन्यास के बाद राणा ने कोचिंग में अपना जीवन समर्पित किया। उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षित मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक 2024 में 2 कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा और एक ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बनीं। यह राणा की कोचिंग दृष्टि का सबसे बड़ा प्रमाण था।
पुरस्कार और सम्मान
जसपाल राणा को 18 वर्ष की आयु में अर्जुन पुरस्कार, 21 वर्ष की आयु में पद्मश्री और 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनका असमय निधन भारतीय खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। राणा परिवार के प्रति देशभर से संवेदनाओं का सिलसिला जारी है।