28 जुलाई 2026
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जसपाल राणा का 49 वर्ष में निधन: 9 कॉमनवेल्थ गोल्ड, मनु भाकर के कोच, शूटिंग का एक युग समाप्त

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जसपाल राणा का 49 वर्ष में निधन: 9 कॉमनवेल्थ गोल्ड, मनु भाकर के कोच, शूटिंग का एक युग समाप्त

सारांश

जसपाल राणा सिर्फ निशानेबाज नहीं थे — वे एक युग थे। 4 कॉमनवेल्थ खेलों में 9 स्वर्ण, 1996 ओलंपिक, विश्व रिकॉर्ड की बराबरी और मनु भाकर जैसी चैंपियन को गढ़ने वाले इस कोच के जाने से भारतीय शूटिंग का एक स्वर्णिम अध्याय बंद हो गया है।

मुख्य बातें

भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज जसपाल राणा का 12 जून 2026 को 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
जर्मनी के म्यूनिख से लौटने के दौरान तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती के बाद निधन।
चार कॉमनवेल्थ खेलों में कुल 15 पदक , जिनमें 9 स्वर्ण पदक शामिल; 2002 मैनचेस्टर में अकेले 6 पदक ।
2006 दोहा एशियाई खेलों में 3 स्वर्ण, 1 रजत ; 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल में 590 अंक से विश्व रिकॉर्ड की बराबरी।
कोच के रूप में मनु भाकर को तैयार किया, जो ओलंपिक में 2 पदक जीतने वाली पहली भारतीय निशानेबाज बनीं।
अर्जुन पुरस्कार (1994) , पद्मश्री (1997) और द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित।

भारतीय निशानेबाजी के महान खिलाड़ी और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच जसपाल राणा का 12 जून 2026 को 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित एक प्रतियोगिता से स्वदेश लौटने के क्रम में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। खिलाड़ी और कोच — दोनों ही भूमिकाओं में उन्होंने भारतीय शूटिंग को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दिलाई।

प्रारंभिक जीवन और शूटिंग की शुरुआत

28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी में जन्मे जसपाल राणा को बचपन से ही निशानेबाजी का जुनून था। उनके पिता नारायण राणा सेना के पूर्व अधिकारी थे और उन्होंने ही जसपाल के पहले कोच की भूमिका निभाई। मात्र 12 वर्ष की आयु में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। 1988 की राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक जीता, जो उनके शानदार करियर की पहली सीढ़ी बनी।

1994 की जूनियर विश्व शूटिंग चैंपियनशिप में इटली में उनके प्रदर्शन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। यह वही साल था जब उन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से भी नवाज़ा गया।

ओलंपिक और कॉमनवेल्थ खेलों में ऐतिहासिक प्रदर्शन

जसपाल राणा ने 1996 के अटलांटा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हालाँकि ओलंपिक पदक उनसे दूर रहा, लेकिन कॉमनवेल्थ खेलों में उनका रिकॉर्ड अद्वितीय रहा। उन्होंने चार कॉमनवेल्थ खेलों में भाग लेते हुए कुल 15 पदक जीते, जिनमें 9 स्वर्ण पदक शामिल हैं। 2002 के मैनचेस्टर कॉमनवेल्थ खेलों में उन्होंने अकेले 6 पदक अपने नाम किए — यह भारतीय शूटिंग इतिहास में एक असाधारण उपलब्धि थी।

गौरतलब है कि 2006 के दोहा एशियाई खेलों में भी उन्होंने 3 स्वर्ण और 1 रजत पदक जीता। 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में 590 अंक हासिल कर उन्होंने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की — जो उनकी तकनीकी महारत का प्रमाण है।

कोच के रूप में विरासत: मनु भाकर से लेकर नई पीढ़ी तक

खिलाड़ी के रूप में शिखर छूने के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग में उतरकर भारतीय शूटिंग को एक नई पीढ़ी दी। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही मनु भाकर को तराशना, जो उनकी देखरेख में ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय निशानेबाज बनीं। अनुशासन और तकनीकी दक्षता के लिए विख्यात जसपाल ने कई विश्वस्तरीय शूटर तैयार किए। यह ऐसे समय में हुआ जब भारतीय शूटिंग अपनी वैश्विक पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रही थी।

पुरस्कार और सम्मान

जसपाल राणा को उनके असाधारण योगदान के लिए 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1997 में पद्मश्री और कोचिंग में उत्कृष्टता के लिए द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ये तीनों सम्मान एक साथ हासिल करना भारतीय खेल जगत में विरले ही देखा जाता है।

खेल जगत पर असर और आगे की राह

जसपाल राणा का निधन भारतीय शूटिंग के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने ऐसे दौर में निशानेबाजी को लोकप्रिय बनाया जब यह खेल सीमित दायरे में सिमटा था। उनके जाने के साथ भारतीय शूटिंग का एक स्वर्णिम अध्याय बंद हो गया है। अब यह ज़िम्मेदारी उन शूटरों पर है जिन्हें उन्होंने स्वयं तैयार किया — कि वे उनकी विरासत को जीवित रखें और भारत को नई ऊँचाइयों तक ले जाएँ।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भारतीय खेल तंत्र ने अक्सर ऐसे कोचों को वह संस्थागत समर्थन नहीं दिया जिसके वे हकदार थे। 49 वर्ष की उम्र में यह असामयिक विदाई यह सवाल भी उठाती है कि क्या हम अपने खेल नायकों की पर्याप्त देखभाल करते हैं — मैदान के बाहर भी।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जसपाल राणा कौन थे और उनका निधन कब हुआ?
जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज खिलाड़ी और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच थे, जिनका 12 जून 2026 को 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। जर्मनी के म्यूनिख से लौटने के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
जसपाल राणा ने कॉमनवेल्थ खेलों में कितने पदक जीते?
जसपाल राणा ने चार कॉमनवेल्थ खेलों में भाग लेते हुए कुल 15 पदक जीते, जिनमें 9 स्वर्ण पदक शामिल हैं। 2002 के मैनचेस्टर कॉमनवेल्थ खेलों में उन्होंने अकेले 6 पदक अपने नाम किए।
जसपाल राणा और मनु भाकर का क्या संबंध था?
जसपाल राणा मनु भाकर के कोच थे। उनकी देखरेख में मनु भाकर ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय निशानेबाज बनीं, जो जसपाल की कोचिंग विरासत की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
जसपाल राणा को कौन-कौन से राष्ट्रीय पुरस्कार मिले?
जसपाल राणा को 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1997 में पद्मश्री और कोचिंग में उत्कृष्टता के लिए द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। खिलाड़ी और कोच — दोनों रूपों में राष्ट्रीय सम्मान पाना भारतीय खेल जगत में दुर्लभ उपलब्धि है।
जसपाल राणा ने एशियाई खेलों में क्या उपलब्धि हासिल की?
2006 के दोहा एशियाई खेलों में जसपाल राणा ने 3 स्वर्ण और 1 रजत पदक जीता। 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में 590 अंक हासिल कर उन्होंने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की।
राष्ट्र प्रेस
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