27 जून 2026
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जसपाल राणा: 50वें जन्मदिन से 16 दिन पहले निधन, भारतीय निशानेबाजी का अपूरणीय नुकसान

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जसपाल राणा: 50वें जन्मदिन से 16 दिन पहले निधन, भारतीय निशानेबाजी का अपूरणीय नुकसान

सारांश

50वाँ जन्मदिन आने से पहले ही जसपाल राणा चले गए — 15 कॉमनवेल्थ पदक, 8 एशियन गेम्स पदक और मनु भाकर जैसी चैंपियन की कोचिंग की विरासत छोड़कर। भारतीय निशानेबाजी ने अपना सबसे बड़ा स्तंभ खो दिया।

मुख्य बातें

जसपाल राणा का 12 जून 2026 को नई दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हुआ — 50वें जन्मदिन से महज 16 दिन पहले।
उनका जन्म 28 जून 1976 को टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड में हुआ था।
कॉमनवेल्थ गेम्स में 15 पदक (जिनमें 9 स्वर्ण ) और एशियन गेम्स में 8 पदक (जिनमें 4 स्वर्ण ) जीते।
2006 दोहा एशियन गेम्स में तेज बुखार के बावजूद 3 स्वर्ण और 590 के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी।
उनके मार्गदर्शन में मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक 2024 में 2 कांस्य पदक जीते — एक ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट।
अर्जुन पुरस्कार , पद्मश्री और द्रोणाचार्य पुरस्कार (2020) से सम्मानित।

भारतीय निशानेबाजी के महानतम नामों में शुमार जसपाल राणा का 12 जून 2026 को नई दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया। वे अपने 50वें जन्मदिन से महज 16 दिन पहले दुनिया को अलविदा कह गए — एक ऐसी क्षति जिसे भारतीय खेल जगत लंबे समय तक महसूस करता रहेगा। 28 जून 1976 को टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड में जन्मे राणा ने एक एथलीट और फिर कोच के रूप में भारतीय निशानेबाजी को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर नई ऊँचाइयाँ दिलाईं।

असाधारण खिलाड़ी का सफर

राणा की प्रतिभा बचपन से ही असाधारण थी। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने 1988 की 31वीं राष्ट्रीय निशानेबाजी प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। 1994 में इटली के मिलान में आयोजित विश्व निशानेबाजी प्रतियोगिता में जूनियर स्तर पर उन्होंने विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए अंतर्राष्ट्रीय पहचान हासिल की। 1996 के अटलांटा ओलंपिक में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया।

पदकों की अविश्वसनीय झड़ी

राणा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 15 पदक जीते, जिनमें 1994 से 2006 के बीच चार संस्करणों में 9 स्वर्ण पदक शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने एशियन गेम्स में 8 पदक अपने नाम किए, जिनमें 4 स्वर्ण थे। उनकी सबसे यादगार उपलब्धि 2006 के दोहा एशियन गेम्स में रही, जहाँ तेज बुखार से जूझते हुए भी उन्होंने 3 स्वर्ण पदक जीते और 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल इवेंट में 590 के विश्व रिकॉर्ड स्कोर की बराबरी की — एक ऐसा प्रदर्शन जो भारतीय खेल इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है।

पुरस्कार और सम्मान

राणा को 18 साल की उम्र में अर्जुन पुरस्कार से नवाज़ा गया। 21 साल की आयु में उन्हें प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कार मिला। कोचिंग में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2020 में उन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया — यानी एक एथलीट और कोच दोनों रूपों में सर्वोच्च राष्ट्रीय मान्यता।

कोच के रूप में विरासत: मनु भाकर और पेरिस 2024

एथलीट के रूप में संन्यास के बाद राणा ने कोचिंग को अपना मिशन बनाया। उनकी मेहनत का सबसे चमकदार प्रमाण पेरिस ओलंपिक 2024 में दिखा, जब उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षित मनु भाकर ने 2 कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। मनु एक ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बनीं। गौरतलब है कि राणा के निधन से भारतीय निशानेबाजी ने वह कोच खो दिया है जिनके दम पर देश ओलंपिक स्वर्ण का सपना देख रहा था।

एक अमर विरासत

यह पहला अवसर है जब 28 जून को जसपाल राणा का जन्मदिन उनकी अनुपस्थिति में मनाया जाएगा। लेकिन उनकी उपलब्धियाँ, उनके शिष्यों की सफलताएँ और भारतीय निशानेबाजी को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने में उनका योगदान उन्हें सदा जीवित रखेगा। भारतीय खेल जगत को अब एक ऐसे शून्य के साथ आगे बढ़ना होगा जिसे भरना आसान नहीं होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जसपाल राणा का निधन कब और कहाँ हुआ?
जसपाल राणा का निधन 12 जून 2026 को नई दिल्ली के एक अस्पताल में हुआ। वे अपने 50वें जन्मदिन (28 जून) से केवल 16 दिन पहले दुनिया छोड़ गए।
जसपाल राणा ने अपने करियर में कितने पदक जीते?
जसपाल राणा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 15 पदक (जिनमें 9 स्वर्ण) और एशियन गेम्स में 8 पदक (जिनमें 4 स्वर्ण) जीते। 2006 के दोहा एशियन गेम्स में तेज बुखार के बावजूद उन्होंने 3 स्वर्ण पदक जीते और 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल में 590 के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की।
जसपाल राणा को कौन-कौन से राष्ट्रीय पुरस्कार मिले?
जसपाल राणा को 18 साल की उम्र में अर्जुन पुरस्कार, 21 साल की उम्र में पद्मश्री और 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वे एथलीट और कोच दोनों रूपों में सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान पाने वाले विरले खिलाड़ियों में से एक थे।
मनु भाकर से जसपाल राणा का क्या संबंध था?
जसपाल राणा मनु भाकर के कोच थे। उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षित मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक 2024 में 2 कांस्य पदक जीते और एक ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बनीं।
जसपाल राणा ने निशानेबाजी में कब से भाग लेना शुरू किया?
जसपाल राणा ने महज 12 साल की उम्र में 1988 की 31वीं राष्ट्रीय निशानेबाजी प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर अपनी शुरुआत की। 1994 में मिलान विश्व प्रतियोगिता में जूनियर स्तर पर विश्व रिकॉर्ड बनाकर उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय पहचान हासिल की और 1996 के अटलांटा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
राष्ट्र प्रेस
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