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जसपाल राणा के निधन पर अवनि लेखरा ने दी श्रद्धांजलि, बोलीं — भारतीय शूटिंग के दबदबे में उनकी भूमिका अतुलनीय

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जसपाल राणा के निधन पर अवनि लेखरा ने दी श्रद्धांजलि, बोलीं — भारतीय शूटिंग के दबदबे में उनकी भूमिका अतुलनीय

सारांश

जसपाल राणा — एथलीट, कोच, और भारतीय शूटिंग के वास्तुकार — नहीं रहे। 49 वर्ष की उम्र में हृदयाघात से हुए उनके निधन पर अवनि लेखरा ने कहा कि उन्होंने देश का दबदबा बनाया। मनु भाकर के ओलंपिक पदकों के पीछे उनकी कोचिंग थी।

मुख्य बातें

पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता अवनि लेखरा ने जसपाल राणा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि भारतीय शूटिंग के दबदबे में उनकी भूमिका अतुलनीय रही।
जसपाल राणा का निधन नई दिल्ली में हृदय संबंधी बीमारी के कारण 49 वर्ष की आयु में हुआ।
राणा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 15 पदक (9 स्वर्ण) और एशियन गेम्स में 8 पदक (4 स्वर्ण) जीते।
उनकी कोचिंग में मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक 2024 में 2 कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा।
राणा को अर्जुन पुरस्कार (1994) , पद्मश्री (1997) और द्रोणाचार्य पुरस्कार (2020) से सम्मानित किया गया था।

पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता अवनि लेखरा ने दिग्गज निशानेबाज और कोच जसपाल राणा के असमय निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। अवनि ने कहा कि भारतीय शूटिंग को विश्व मंच पर स्थापित करने में राणा की भूमिका अतुलनीय रही, और उनके जाने से पूरी शूटिंग बिरादरी को अपूरणीय क्षति हुई है।

अवनि लेखरा की भावभीनी श्रद्धांजलि

अवनि लेखरा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी संवेदनाएं साझा करते हुए लिखा, "जसपाल राणा सर के निधन से बहुत दुखी हूं। एक जाने-माने एथलीट और कोच, दोनों के तौर पर, शूटिंग के खेल में हमारे देश का दबदबा बनाने में उनका अहम रोल रहा है। उनके परिवार, करीबी लोगों और पूरी भारतीय शूटिंग बिरादरी के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।" यह भावभीनी श्रद्धांजलि उस गहरे सम्मान को दर्शाती है जो भारत के खेल जगत में राणा के लिए था।

निधन का विवरण और अंतिम संस्कार

जसपाल राणा का निधन शुक्रवार को नई दिल्ली में हृदय संबंधी बीमारी के कारण हुआ। वे 49 वर्ष के थे। उल्लेखनीय है कि उनका निधन म्यूनिक में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से लौटने के तुरंत बाद हुआ, जिस टूर्नामेंट में भारत ने चार पदक जीते थे। उनके पार्थिव शरीर को देहरादून स्थित उनके आवास पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ रखा गया, जहाँ परिवार के सदस्यों, मित्रों, साथी एथलीटों और प्रशंसकों ने अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।

एथलीट के रूप में समृद्ध विरासत

28 जून 1976 को उत्तराखंड में जन्मे राणा ने मात्र किशोरावस्था में ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। 1994 में मिलान में आयोजित जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल इवेंट में विश्व रिकॉर्ड स्कोर के साथ खिताब जीता और दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। दो वर्ष बाद, उन्होंने अटलांटा ओलंपिक 1996 में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

राणा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 15 पदक जीते, जिनमें 1994 से 2006 के बीच चार संस्करणों में 9 स्वर्ण पदक शामिल हैं। एशियन गेम्स में उन्होंने 8 पदक हासिल किए, जिनमें 4 स्वर्ण थे। 2006 के दोहा एशियन गेम्स में तेज बुखार से पीड़ित रहते हुए भी उन्होंने तीन स्वर्ण पदक जीते — यह उनके असाधारण मनोबल और समर्पण का प्रमाण है।

कोच के रूप में मनु भाकर को दिलाई ऐतिहासिक सफलता

सक्रिय निशानेबाजी से संन्यास के बाद राणा ने कोचिंग को अपना नया मिशन बनाया। उनकी कुशल कोचिंग में ही मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक 2024 में निशानेबाजी में 2 कांस्य पदक जीते और एक ही ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली भारत की पहली एथलीट बनीं। यह उपलब्धि राणा की कोचिंग दूरदर्शिता और खिलाड़ी को निखारने की क्षमता का जीवंत प्रमाण है।

पुरस्कार और सम्मान

भारत सरकार ने राणा की उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया। उन्हें 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1997 में पद्मश्री और 2020 में प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार से नवाज़ा गया। एक एथलीट और कोच, दोनों रूपों में राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले राणा भारतीय खेल इतिहास में विरले व्यक्तित्वों में शुमार हैं। उनके जाने से भारतीय शूटिंग एक ऐसा अभिभावक खो चुकी है जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राणा की कोचिंग पद्धति उसकी नींव थी — यह तथ्य उनके जाने के बाद और स्पष्ट होता है। भारतीय खेल प्रशासन के लिए असली सवाल यह है कि क्या राणा जैसे खिलाड़ी-से-कोच बने दिग्गजों के अनुभव को संस्थागत रूप से संरक्षित किया जा रहा है, या वे ज्ञान अपने साथ ले जाते हैं।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जसपाल राणा कौन थे और उनका निधन कैसे हुआ?
जसपाल राणा भारत के सबसे प्रतिष्ठित पिस्टल निशानेबाजों और कोचों में से एक थे। उनका निधन नई दिल्ली में हृदय संबंधी बीमारी के कारण 49 वर्ष की आयु में हुआ, म्यूनिक में आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से लौटने के तुरंत बाद।
जसपाल राणा की प्रमुख खेल उपलब्धियाँ क्या रहीं?
राणा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 15 पदक (जिनमें 9 स्वर्ण) और एशियन गेम्स में 8 पदक (जिनमें 4 स्वर्ण) जीते। 1994 में मिलान में जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने विश्व रिकॉर्ड स्कोर के साथ खिताब जीता और 1996 के अटलांटा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
जसपाल राणा ने मनु भाकर को कैसे तैयार किया?
राणा की कोचिंग में मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक 2024 में निशानेबाजी में 2 कांस्य पदक जीते और एक ही ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली भारत की पहली एथलीट बनीं। यह उपलब्धि राणा की कोचिंग विशेषज्ञता का सबसे बड़ा प्रमाण मानी जाती है।
जसपाल राणा को कौन-कौन से राष्ट्रीय पुरस्कार मिले थे?
जसपाल राणा को 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1997 में पद्मश्री और 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। एथलीट और कोच, दोनों रूपों में राष्ट्रीय पुरस्कार पाना उन्हें भारतीय खेल इतिहास में विशिष्ट स्थान देता है।
अवनि लेखरा ने जसपाल राणा को श्रद्धांजलि में क्या कहा?
अवनि लेखरा ने एक्स पर लिखा कि राणा सर के निधन से वे बहुत दुखी हैं और एक एथलीट व कोच दोनों के तौर पर शूटिंग में देश का दबदबा बनाने में उनका अहम रोल रहा है। उन्होंने राणा के परिवार, करीबी लोगों और पूरी भारतीय शूटिंग बिरादरी के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
राष्ट्र प्रेस
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