जसपाल राणा के निधन पर अवनि लेखरा ने दी श्रद्धांजलि, बोलीं — भारतीय शूटिंग के दबदबे में उनकी भूमिका अतुलनीय
सारांश
मुख्य बातें
पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता अवनि लेखरा ने दिग्गज निशानेबाज और कोच जसपाल राणा के असमय निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। अवनि ने कहा कि भारतीय शूटिंग को विश्व मंच पर स्थापित करने में राणा की भूमिका अतुलनीय रही, और उनके जाने से पूरी शूटिंग बिरादरी को अपूरणीय क्षति हुई है।
अवनि लेखरा की भावभीनी श्रद्धांजलि
अवनि लेखरा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी संवेदनाएं साझा करते हुए लिखा, "जसपाल राणा सर के निधन से बहुत दुखी हूं। एक जाने-माने एथलीट और कोच, दोनों के तौर पर, शूटिंग के खेल में हमारे देश का दबदबा बनाने में उनका अहम रोल रहा है। उनके परिवार, करीबी लोगों और पूरी भारतीय शूटिंग बिरादरी के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।" यह भावभीनी श्रद्धांजलि उस गहरे सम्मान को दर्शाती है जो भारत के खेल जगत में राणा के लिए था।
निधन का विवरण और अंतिम संस्कार
जसपाल राणा का निधन शुक्रवार को नई दिल्ली में हृदय संबंधी बीमारी के कारण हुआ। वे 49 वर्ष के थे। उल्लेखनीय है कि उनका निधन म्यूनिक में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से लौटने के तुरंत बाद हुआ, जिस टूर्नामेंट में भारत ने चार पदक जीते थे। उनके पार्थिव शरीर को देहरादून स्थित उनके आवास पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ रखा गया, जहाँ परिवार के सदस्यों, मित्रों, साथी एथलीटों और प्रशंसकों ने अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।
एथलीट के रूप में समृद्ध विरासत
28 जून 1976 को उत्तराखंड में जन्मे राणा ने मात्र किशोरावस्था में ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। 1994 में मिलान में आयोजित जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल इवेंट में विश्व रिकॉर्ड स्कोर के साथ खिताब जीता और दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। दो वर्ष बाद, उन्होंने अटलांटा ओलंपिक 1996 में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
राणा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 15 पदक जीते, जिनमें 1994 से 2006 के बीच चार संस्करणों में 9 स्वर्ण पदक शामिल हैं। एशियन गेम्स में उन्होंने 8 पदक हासिल किए, जिनमें 4 स्वर्ण थे। 2006 के दोहा एशियन गेम्स में तेज बुखार से पीड़ित रहते हुए भी उन्होंने तीन स्वर्ण पदक जीते — यह उनके असाधारण मनोबल और समर्पण का प्रमाण है।
कोच के रूप में मनु भाकर को दिलाई ऐतिहासिक सफलता
सक्रिय निशानेबाजी से संन्यास के बाद राणा ने कोचिंग को अपना नया मिशन बनाया। उनकी कुशल कोचिंग में ही मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक 2024 में निशानेबाजी में 2 कांस्य पदक जीते और एक ही ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली भारत की पहली एथलीट बनीं। यह उपलब्धि राणा की कोचिंग दूरदर्शिता और खिलाड़ी को निखारने की क्षमता का जीवंत प्रमाण है।
पुरस्कार और सम्मान
भारत सरकार ने राणा की उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया। उन्हें 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1997 में पद्मश्री और 2020 में प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार से नवाज़ा गया। एक एथलीट और कोच, दोनों रूपों में राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले राणा भारतीय खेल इतिहास में विरले व्यक्तित्वों में शुमार हैं। उनके जाने से भारतीय शूटिंग एक ऐसा अभिभावक खो चुकी है जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।