मधुबनी रेलवे स्टेशन पर जयनगर-उधना एक्सप्रेस के कोच में भीषण आग, DRM ने जांच के दिए आदेश
सारांश
मुख्य बातें
मधुबनी रेलवे स्टेशन पर गुरुवार, 28 मई को जयनगर-उधना एक्सप्रेस के एक जनरल कोच में अचानक आग भड़क उठी, जिससे पूरा डिब्बा जलकर राख हो गया। सौभाग्य से, घटना के समय कोच में कोई यात्री मौजूद नहीं था, इसलिए किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है।
घटनाक्रम: कैसे लगी आग
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह कोच प्लेटफॉर्म नंबर-3 पर मरम्मत कार्य के लिए पिछले दो दिनों से खड़ी थी। अचानक उसमें से घना काला धुआं उठने लगा और देखते-देखते लपटें पूरे डिब्बे में फैल गईं। स्टेशन पर मौजूद लोगों ने तत्काल स्टेशन मास्टर को सूचित किया, जिसके बाद दमकल की गाड़ियाँ मौके पर भेजी गईं।
हालाँकि, दमकलकर्मियों के पहुँचने से पहले ही कोच का बड़ा हिस्सा जल चुका था। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया और उसे आसपास के अन्य कोचों तक फैलने से रोका गया। इस घटना से स्टेशन परिसर में कुछ देर के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया।
DRM ने किया घटनास्थल का निरीक्षण
समस्तीपुर रेलवे मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) ज्योति प्रकाश मिश्रा घटना की सूचना मिलते ही एक विशेष ट्रेन से मधुबनी पहुँचे और घटनास्थल का जायजा लिया। उन्होंने नुकसान का आकलन किया और संबंधित रेलवे अधिकारियों से आग लगने के कारणों व परिस्थितियों पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की।
मिश्रा ने घटना की गंभीरता को देखते हुए आग के सटीक कारण की पड़ताल करने और सुरक्षा व्यवस्था में संभावित खामियों को चिह्नित करने के लिए एक उच्च-स्तरीय जांच समिति गठित करने की घोषणा की।
संभावित कारण: शॉर्ट सर्किट की आशंका
रेलवे अधिकारियों को कथित तौर पर संदेह है कि आग का प्रारंभिक कारण शॉर्ट सर्किट हो सकता है। हालाँकि, आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सही वजह स्पष्ट हो पाएगी।
पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना
गौरतलब है कि यह बिहार में रेल कोच में आग की अकेली घटना नहीं है। इससे पहले 18 मई को ससाराम-पटना फास्ट पैसेंजर ट्रेन (53212) के एक जनरल कोच में भी आग लग गई थी। वह घटना उस समय हुई जब ट्रेन सुबह 6:45 बजे प्रस्थान से पहले प्लेटफॉर्म नंबर-6 पर खड़ी थी। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, उस घटना में इंजन से पाँचवें कोच में शॉर्ट सर्किट को कारण बताया गया था। दस दिनों के भीतर दो समान घटनाएँ रेलवे की रखरखाव प्रक्रियाओं और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
आगे क्या होगा
जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर रेलवे प्रशासन आगे की कार्रवाई तय करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि मरम्मत के दौरान खड़े कोचों की नियमित विद्युत जाँच और अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना अब और भी ज़रूरी हो गया है।