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झारखंड CGL विवाद: चयनित कर्मचारी सुमित तिवारी का आरोप — AI से बना फर्जी पोस्टर वायरल कर बदनाम किया

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झारखंड CGL विवाद: चयनित कर्मचारी सुमित तिवारी का आरोप — AI से बना फर्जी पोस्टर वायरल कर बदनाम किया

सारांश

झारखंड CGL परीक्षा रद्द होने के बाद अब AI-निर्मित फर्जी पोस्टर का विवाद सामने आया है। चयनित कर्मचारी सुमित कुमार तिवारी का आरोप है कि उनका नाम बिना आधार के कथित घोटाले से जोड़ा गया। CID पूछताछ के बीच वे निष्पक्ष जाँच और दोषी-केंद्रित कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

मुख्य बातें

सुमित कुमार तिवारी — झारखंड CGL से चयनित कर्मचारी — ने 21 अगस्त को आरोप लगाया कि AI की मदद से फर्जी पोस्टर बनाकर उन्हें बदनाम किया गया।
कथित तौर पर BSO पोस्टिंग ऑर्डर से समान सरनेम वाले नाम खोजकर व्हाट्सएप ग्रुप्स में भेजे गए, फिर AI पोस्टर में उनका नाम जोड़ा गया।
CID ने पोस्टर में नाम आने के बाद तिवारी से दो दिन तक पूछताछ की; उन्होंने अपना पक्ष स्पष्ट किया।
तिवारी ने पूरी परीक्षा रद्द करने की माँग का विरोध किया — उनकी माँग है कि जाँच हो और केवल दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई हो।
वर्ष 2023 में पिता की हत्या और माँ की गंभीर बीमारी के बीच उन्होंने CGL परीक्षा पास की थी; परीक्षा रद्द होने से परिवार फिर अनिश्चितता में।
उन्होंने कोचिंग संस्थानों पर आरोप लगाया कि छात्रों को प्रभावित कर पूरी परीक्षा रद्द करवाने का एजेंडा चलाया गया।

झारखंड CGL परीक्षा रद्द होने के बाद उपजे विवाद में एक नया मोड़ आया है। रांची में 21 अगस्त को CGL के माध्यम से चयनित कर्मचारी सुमित कुमार तिवारी ने आरोप लगाया कि उन्हें बदनाम करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से एक फर्जी पोस्टर तैयार किया गया और उसे सोशल मीडिया व व्हाट्सएप ग्रुप्स पर वायरल किया गया। उनके अनुसार, इस पोस्टर में उनका नाम कथित अनियमितताओं से जोड़ा गया, जबकि इसका कोई ठोस आधार नहीं था।

कैसे बना और फैला कथित फर्जी पोस्टर

तिवारी ने बताया कि कथित तौर पर BSO के पोस्टिंग ऑर्डर को आधार बनाकर समान सरनेम वाले कई लोगों के नाम खोजे गए और उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप्स में भेजा गया। इसके बाद AI की मदद से एक पोस्टर तैयार किया गया, जिसमें उनका नाम भी शामिल किया गया। यह पोस्टर केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा — कथित तौर पर इसे राष्ट्रीय मीडिया में भी प्रसारित किया गया।

तिवारी ने सवाल उठाया कि बिना किसी स्वतंत्र सत्यापन के किसी व्यक्ति के नाम या तस्वीर को कथित गड़बड़ी से जोड़ना उसकी प्रतिष्ठा और भविष्य दोनों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है।

CID पूछताछ और सफाई का मौका

पोस्टर में नाम आने के बाद CID ने सुमित कुमार तिवारी से पूछताछ की। उन्होंने बताया कि उन्हें जाँच एजेंसी के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया गया और उन्होंने दो दिनों तक पूछताछ के दौरान अपने संबंधों और पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जिस दिन CGL परीक्षा रद्द होने का नोटिस आया, उस समय वे इन्हीं आरोपों के संदर्भ में जवाब दे रहे थे।

परीक्षा रद्द करने की माँग पर तिवारी का पक्ष

तिवारी ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध आंदोलनकारी छात्रों से नहीं, बल्कि उस माँग से है जिसमें पूरी CGL परीक्षा रद्द करने की बात कही जा रही है। उनके अनुसार, यदि किसी अभ्यर्थी ने गलत तरीके से परीक्षा पास की है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन बिना जाँच के सभी चयनित अभ्यर्थियों को दोषी मानना न्यायसंगत नहीं है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों को कोचिंग संस्थानों और अन्य प्रभावशाली लोगों द्वारा इस तरह के आंदोलन में शामिल किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य पूरी परीक्षा रद्द करवाना था। उन्होंने कहा — 'माँग यह होनी चाहिए थी कि जाँच करो, जो दोषी पाया जाए उसे हटाओ — यह नहीं कि सभी को हटा दिया जाए।'

व्यक्तिगत संघर्ष: पिता की हत्या, माँ की बीमारी और परीक्षा

तिवारी ने भावुक होकर अपने निजी संघर्ष का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में उनके पिता की हत्या हो गई थी और उसी दौरान पूरे परिवार पर हमला भी हुआ। इसके बाद उन्होंने करीब एक महीने तक अपनी माँ का RIMS में रहकर इलाज कराया।

उन्होंने बताया कि CGL परीक्षा की तैयारी और परीक्षा के दौरान भी उनकी माँ की तबीयत खराब थी। एक ओर पिता की हत्या के मामले में कानूनी लड़ाई, दूसरी ओर माँ की देखभाल — इन्हीं परिस्थितियों के बीच उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी जारी रखी और सफलता पाई। उन्होंने कहा कि इतनी कठिन परिस्थितियों के बाद नौकरी मिलने से उनका परिवार कुछ स्थिर हुआ था, लेकिन परीक्षा रद्द होने से वे फिर उसी अनिश्चितता में पहुँच गए हैं।

निष्पक्ष जाँच और मीडिया से अपील

तिवारी ने सरकार से माँग की कि पहले स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच कराई जाए और उसके बाद दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि केवल भीड़ को देखकर किसी एक पक्ष की बात को सही मान लेना पत्रकारिता का उद्देश्य नहीं होना चाहिए। जिन लोगों के नाम और प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है, उनका पक्ष भी जनता के सामने आना चाहिए। आने वाले दिनों में CID की जाँच का रुख यह तय करेगा कि कथित फर्जी पोस्टर प्रकरण में किसकी जवाबदेही बनती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उन चयनित अभ्यर्थियों का पक्ष प्रायः अनसुना रहा जो बिना दोष सिद्ध हुए सार्वजनिक कठघरे में खड़े कर दिए गए।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुमित कुमार तिवारी पर क्या आरोप लगाए गए और वे खुद क्या कह रहे हैं?
कथित तौर पर AI की मदद से बने एक पोस्टर में सुमित कुमार तिवारी का नाम झारखंड CGL की कथित अनियमितताओं से जोड़ा गया और उसे सोशल मीडिया व व्हाट्सएप ग्रुप्स पर वायरल किया गया। तिवारी का कहना है कि इस पोस्टर का कोई ठोस आधार नहीं था और उन्होंने CID के सामने दो दिन पूछताछ में अपना पक्ष स्पष्ट किया।
झारखंड CGL परीक्षा क्यों रद्द की गई?
झारखंड CGL परीक्षा में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद इसे रद्द किया गया। आंदोलनकारी छात्रों ने पूरी परीक्षा रद्द करने की माँग की थी, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। हालाँकि चयनित कर्मचारियों का तर्क है कि केवल दोषी अभ्यर्थियों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी, न कि पूरी परीक्षा रद्द होनी चाहिए थी।
AI से बने फर्जी पोस्टर का मामला कैसे सामने आया?
तिवारी के अनुसार, BSO पोस्टिंग ऑर्डर से समान सरनेम वाले नाम खोजकर पहले व्हाट्सएप ग्रुप्स में भेजे गए, फिर AI की मदद से एक पोस्टर तैयार किया गया जिसमें उनका नाम शामिल किया गया। यह पोस्टर सोशल मीडिया के अलावा कथित तौर पर राष्ट्रीय मीडिया में भी प्रसारित हुआ।
CID ने सुमित तिवारी से क्यों पूछताछ की और नतीजा क्या रहा?
पोस्टर में नाम आने के बाद CID ने तिवारी को पूछताछ के लिए बुलाया। उन्होंने दो दिनों तक जाँच एजेंसी के सामने अपने संबंधों और पूरे मामले की जानकारी दी। जाँच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं।
परीक्षा रद्द होने से सुमित तिवारी और उनके परिवार पर क्या असर पड़ा?
तिवारी ने बताया कि वर्ष 2023 में पिता की हत्या और माँ की गंभीर बीमारी के बीच उन्होंने CGL परीक्षा पास की थी और नौकरी से परिवार में कुछ स्थिरता आई थी। परीक्षा रद्द होने से वे और उनका परिवार फिर से अनिश्चितता की स्थिति में पहुँच गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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