झारखंड CGL विवाद: चयनित कर्मचारी सुमित तिवारी का आरोप — AI से बना फर्जी पोस्टर वायरल कर बदनाम किया
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड CGL परीक्षा रद्द होने के बाद उपजे विवाद में एक नया मोड़ आया है। रांची में 21 अगस्त को CGL के माध्यम से चयनित कर्मचारी सुमित कुमार तिवारी ने आरोप लगाया कि उन्हें बदनाम करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से एक फर्जी पोस्टर तैयार किया गया और उसे सोशल मीडिया व व्हाट्सएप ग्रुप्स पर वायरल किया गया। उनके अनुसार, इस पोस्टर में उनका नाम कथित अनियमितताओं से जोड़ा गया, जबकि इसका कोई ठोस आधार नहीं था।
कैसे बना और फैला कथित फर्जी पोस्टर
तिवारी ने बताया कि कथित तौर पर BSO के पोस्टिंग ऑर्डर को आधार बनाकर समान सरनेम वाले कई लोगों के नाम खोजे गए और उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप्स में भेजा गया। इसके बाद AI की मदद से एक पोस्टर तैयार किया गया, जिसमें उनका नाम भी शामिल किया गया। यह पोस्टर केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा — कथित तौर पर इसे राष्ट्रीय मीडिया में भी प्रसारित किया गया।
तिवारी ने सवाल उठाया कि बिना किसी स्वतंत्र सत्यापन के किसी व्यक्ति के नाम या तस्वीर को कथित गड़बड़ी से जोड़ना उसकी प्रतिष्ठा और भविष्य दोनों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है।
CID पूछताछ और सफाई का मौका
पोस्टर में नाम आने के बाद CID ने सुमित कुमार तिवारी से पूछताछ की। उन्होंने बताया कि उन्हें जाँच एजेंसी के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया गया और उन्होंने दो दिनों तक पूछताछ के दौरान अपने संबंधों और पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जिस दिन CGL परीक्षा रद्द होने का नोटिस आया, उस समय वे इन्हीं आरोपों के संदर्भ में जवाब दे रहे थे।
परीक्षा रद्द करने की माँग पर तिवारी का पक्ष
तिवारी ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध आंदोलनकारी छात्रों से नहीं, बल्कि उस माँग से है जिसमें पूरी CGL परीक्षा रद्द करने की बात कही जा रही है। उनके अनुसार, यदि किसी अभ्यर्थी ने गलत तरीके से परीक्षा पास की है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन बिना जाँच के सभी चयनित अभ्यर्थियों को दोषी मानना न्यायसंगत नहीं है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों को कोचिंग संस्थानों और अन्य प्रभावशाली लोगों द्वारा इस तरह के आंदोलन में शामिल किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य पूरी परीक्षा रद्द करवाना था। उन्होंने कहा — 'माँग यह होनी चाहिए थी कि जाँच करो, जो दोषी पाया जाए उसे हटाओ — यह नहीं कि सभी को हटा दिया जाए।'
व्यक्तिगत संघर्ष: पिता की हत्या, माँ की बीमारी और परीक्षा
तिवारी ने भावुक होकर अपने निजी संघर्ष का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में उनके पिता की हत्या हो गई थी और उसी दौरान पूरे परिवार पर हमला भी हुआ। इसके बाद उन्होंने करीब एक महीने तक अपनी माँ का RIMS में रहकर इलाज कराया।
उन्होंने बताया कि CGL परीक्षा की तैयारी और परीक्षा के दौरान भी उनकी माँ की तबीयत खराब थी। एक ओर पिता की हत्या के मामले में कानूनी लड़ाई, दूसरी ओर माँ की देखभाल — इन्हीं परिस्थितियों के बीच उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी जारी रखी और सफलता पाई। उन्होंने कहा कि इतनी कठिन परिस्थितियों के बाद नौकरी मिलने से उनका परिवार कुछ स्थिर हुआ था, लेकिन परीक्षा रद्द होने से वे फिर उसी अनिश्चितता में पहुँच गए हैं।
निष्पक्ष जाँच और मीडिया से अपील
तिवारी ने सरकार से माँग की कि पहले स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच कराई जाए और उसके बाद दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि केवल भीड़ को देखकर किसी एक पक्ष की बात को सही मान लेना पत्रकारिता का उद्देश्य नहीं होना चाहिए। जिन लोगों के नाम और प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है, उनका पक्ष भी जनता के सामने आना चाहिए। आने वाले दिनों में CID की जाँच का रुख यह तय करेगा कि कथित फर्जी पोस्टर प्रकरण में किसकी जवाबदेही बनती है।