चतरा मुठभेड़: हड़गड़ी जंगल में पुलिस ने 6 अपहृत ग्रामीणों को छुड़ाया, 5 बदमाश गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र में 20 जून 2025 की देर रात हड़गड़ी जंगल में पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ के बाद फिरौती के लिए अगवा किए गए 6 ग्रामीणों — जिनमें 4 पुरुष और 2 महिलाएँ शामिल थीं — को सकुशल मुक्त करा लिया गया। बदमाशों ने खुद को प्रतिबंधित संगठन एमसीसी (माओइस्ट कम्युनिस्ट सेंटर) का सदस्य बताया था, हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
अपहरण की घटना और पुलिस को सूचना
18 जून की रात लगभग 10:30 बजे पुलिस को सूचना मिली कि टूंटीलावा से हेसातु जाने वाले रास्ते पर हड़गड़ी जंगल में 6 ग्रामीणों का अपहरण कर लिया गया है। अपराधियों ने बंधकों की रिहाई के बदले ₹1 लाख की फिरौती की माँग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए चतरा एसपी के निर्देश पर तत्काल एक विशेष छापामारी टीम गठित की गई।
मुठभेड़ और सफल रेस्क्यू
जब पुलिस टीम जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाते हुए आगे बढ़ी, तो बदमाशों ने पहले गोलीबारी शुरू कर दी। पुलिस ने तत्काल जवाबी कार्रवाई की। इस आक्रामक प्रतिक्रिया से भयभीत होकर अपराधी अपहृत ग्रामीणों को वहीं छोड़कर जंगल में भाग निकले। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए सभी 6 ग्रामीणों को सुरक्षित बरामद कर सिमरिया थाने लाया।
पाँच बदमाश गिरफ्तार, हथियार बरामद
घटनास्थल के चारों ओर घेराबंदी कर पुलिस ने घटना में शामिल 6 में से 5 आरोपियों को दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपियों में टंडवा निवासी रमेश कुमार गंझू और सतीश कुमार गंझू शामिल हैं। इनके पास से पुलिस ने 3 देसी भराठी बंदूकें, एक पिस्टल के आकार का लाइटर, एक बड़ी गुप्ती (चाकू) और पीड़ितों से लूटे गए 3 मोबाइल फोन बरामद किए। एक आरोपी अभी भी फरार है।
एसडीपीओ का बयान
एसडीपीओ सिमरिया शुभम नागरगोजे ने बताया कि 18 जून को अपहरण की सूचना मिलते ही एसपी के आदेश पर छापामारी टीम रवाना की गई। जंगल में तलाशी के दौरान आरोपियों ने पुलिस पर फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस ने भी गोलियाँ चलाईं। उन्होंने पुष्टि की कि सभी 6 ग्रामीणों को सुरक्षित थाने लाया गया और 6 में से 5 आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं।
कानूनी कार्रवाई और आगे की जाँच
पुलिस ने सिमरिया थाना में अपहरण, फिरौती और हथियार से जुड़ी गंभीर धाराओं के साथ-साथ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फरार छठे आरोपी की तलाश जारी है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब झारखंड के जंगली इलाकों में उग्रवाद-प्रभावित समूहों द्वारा फिरौती के मामलों पर पुलिस की नज़र पहले से कड़ी है।