झारखंड में भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण, पंचायत स्तर पर ड्राइविंग लाइसेंस कैंप की तैयारी
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड सरकार ने 1 जून 2026 को रांची में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में भूमि अभिलेखों के व्यापक डिजिटलीकरण की योजना को गति देने का निर्णय लिया। इस पहल के तहत राज्य में जमीन खरीदने या बेचने वाले लोगों को किसी भी भूखंड की अद्यतन कानूनी स्थिति — चाहे वह सरकारी अधिग्रहण में हो, प्रक्रियाधीन हो या विवादमुक्त हो — एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में परिवहन विभाग तथा राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।
भूमि डिजिटलीकरण: क्या बदलेगा
राज्य में भूमि विवाद लंबे समय से एक गंभीर समस्या रहे हैं। कई मामलों में खरीदारों को जमीन की खरीद के बाद पता चलता है कि वह भूखंड किसी सरकारी परियोजना या अधिग्रहण प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। प्रस्तावित डिजिटल प्रणाली लागू होने के बाद नागरिक जमीन खरीदने से पूर्व ही उसकी पूरी स्थिति ऑनलाइन जाँच सकेंगे। अधिकारियों के अनुसार, इससे भूमि धोखाधड़ी और विवादों की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
खासमहल भूमि की समीक्षा
बैठक में खासमहल भूमि से जुड़े मामलों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सरकार ने लीज नवीनीकरण, हस्तांतरण और भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रियाओं को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाने का संकेत दिया है। इसके तहत खासमहल भूमि के लीजधारकों की मैपिंग और दस्तावेजों के पुनः सत्यापन की भी योजना तैयार की जा रही है।
पंचायत स्तर पर ड्राइविंग लाइसेंस कैंप
परिवहन क्षेत्र में ग्रामीण नागरिकों को राहत देने के उद्देश्य से पंचायत स्तर पर ड्राइविंग लाइसेंस शिविर आयोजित करने की व्यवस्था पर जोर दिया गया। इस कदम से ग्रामीणों को लाइसेंस बनवाने के लिए जिला मुख्यालय या परिवहन कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने से मुक्ति मिल सकेगी। यह पहल विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले उन नागरिकों के लिए महत्त्वपूर्ण है, जिनके लिए शहरी कार्यालयों तक पहुँचना कठिन और महँगा होता है।
सड़क सुरक्षा और आपातकालीन सेवाएँ
बैठक में गुड सेमेरिटन योजना और हिट एंड रन मुआवजा योजना की भी समीक्षा की गई। दुर्घटनाओं में घायलों की मदद करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए इन योजनाओं के बारे में अधिक से अधिक लोगों तक जानकारी पहुँचाने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही, राज्य में प्रस्तावित 'गुरुजी आपातकालीन सेवा-1944' को जल्द शुरू करने पर भी बल दिया गया, जो आपातकालीन परिस्थितियों में नागरिकों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है।
आगे की राह
बैठक में परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने, सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने और प्रशासनिक सेवाओं को तकनीक के माध्यम से अधिक पारदर्शी एवं सुलभ बनाने पर व्यापक चर्चा हुई। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में राज्य सरकारें भूमि प्रशासन में डिजिटल सुधारों को प्राथमिकता दे रही हैं। इन सुधारों के क्रियान्वयन की गति और विस्तार ही तय करेगा कि झारखंड के नागरिकों को ज़मीनी स्तर पर वास्तविक लाभ कब और कितना मिलेगा।