हरियाणा CM नायब सिंह सैनी ने लॉन्च किया ऑटो म्यूटेशन सिस्टम, अब घर बैठे होगा भूमि नामांतरण
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार, 23 जून 2026 को चंडीगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम में ऑटो म्यूटेशन सिस्टम और पेपरलेस लिस्टिंग 2.0 का शुभारंभ किया। इन दोनों पहलों को राज्य में डिजिटल प्रशासन, सुशासन और पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
इस कार्यक्रम में राजस्व मंत्री विपुल गोयल, लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा और अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। राज्यभर के उपायुक्तों ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया।
नई व्यवस्था के तहत अब हरियाणा के निवासियों को भूमि अभिलेखों के नामांतरण (म्यूटेशन) के लिए अलग से आवेदन जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। नामांतरण दस्तावेज सीधे घर बैठे डाउनलोड किए जा सकेंगे।
पहले क्या थी स्थिति
मुख्यमंत्री सैनी ने बताया कि पूर्व में नागरिकों को म्यूटेशन और अन्य भूमि-संबंधी सेवाओं के लिए 1 से 2 वर्ष तक प्रतीक्षा करनी पड़ती थी और बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। उन्होंने कहा कि यह पहल नागरिकों के जीवन को सरल और सुविधाजनक बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को नई गति देती है।
सैनी ने इन पहलों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' और 'विकसित हरियाणा' के दृष्टिकोण से जोड़ते हुए कहा कि 'डबल इंजन' सरकार पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध सेवा-प्रदायगी के साथ काम कर रही है।
पेपरलेस पंजीकरण 2.0 की पृष्ठभूमि
पेपरलेस पंजीकरण प्रणाली का पहला चरण 29 सितंबर 2025 को कुरुक्षेत्र जिले की लाडवा तहसील में पायलट के रूप में शुरू किया गया था। इसके बाद 1 नवंबर 2025 से इसे पूरे हरियाणा में लागू किया गया। पिछले आठ महीनों में प्राप्त फीडबैक के आधार पर अब पेपरलेस पंजीकरण 2.0 लॉन्च किया गया है, जिसमें म्यूटेशन प्रक्रिया को संपत्ति पंजीकरण के साथ एकीकृत किया गया है — यह तकनीकी दृष्टि से पहले चरण की तुलना में एक बड़ा बदलाव है।
आम जनता पर असर
इस प्रणाली से हरियाणा के लाखों भूमि-मालिकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। संपत्ति की रजिस्ट्री के साथ-साथ म्यूटेशन स्वतः हो जाने से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि बिचौलियों की भूमिका भी कम होगी और भ्रष्टाचार की संभावना घटेगी।
क्या होगा आगे
राज्य सरकार के अनुसार, इस प्रणाली के विस्तार और क्रियान्वयन की निगरानी राजस्व विभाग करेगा। यह पहल हरियाणा को भूमि-अभिलेख डिजिटलीकरण में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित कर सकती है, बशर्ते तकनीकी बुनियादी ढाँचा ग्रामीण क्षेत्रों में भी सुचारु रूप से काम करे।