झारखंड की 4 सेंट्रल जेलों में ओपन बैरक को कैबिनेट की मंजूरी, हजारीबाग में 32 एकड़ में बनेगी नई ओपन जेल
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड की चार सेंट्रल जेलों में ओपन बैरक व्यवस्था लागू करने के प्रस्ताव को राज्य कैबिनेट से प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई है। झारखंड हाईकोर्ट में 24 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने यह जानकारी अदालत के समक्ष रखी। साथ ही बताया गया कि हजारीबाग में नई ओपन जेल के विस्तारीकरण के लिए 32 एकड़ सरकारी भूमि चिह्नित की जा चुकी है।
मुख्य घटनाक्रम
चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के सामने राज्य सरकार के अधिवक्ता मयंक विभोर ने अदालत को अवगत कराया कि ओपन जेलों के संचालन, विस्तारीकरण और वहाँ की व्यवस्थाओं को लेकर एक तिमाही रिपोर्ट तैयार की जा रही है। यह रिपोर्ट 3 नवंबर 2026 तक हाईकोर्ट में दाखिल कर दी जाएगी। अदालत ने सरकार के इस जवाब को रिकॉर्ड पर लेते हुए अगली सुनवाई के लिए 5 नवंबर 2026 की तिथि निर्धारित की है।
हजारीबाग में नई ओपन जेल का प्रस्ताव
सुनवाई के दौरान पहले दिए गए विवरण का भी उल्लेख हुआ, जिसमें बताया गया था कि हजारीबाग में ओपन जेल के व्यापक विस्तारीकरण के लिए 32 एकड़ सरकारी भूमि चिह्नित की जा चुकी है और इसका प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा जा चुका है। यह परियोजना पूरी तरह तैयार होने तक रांची, हजारीबाग और दुमका समेत चार सेंट्रल जेलों में अस्थायी रूप से ओपन बैरक व्यवस्था लागू रहेगी।
महिला कैदियों के लिए विशेष व्यवस्था
महिला कैदियों के पुनर्वास और सुविधा के मद्देनज़र ओपन जेल में अलग से विशेष व्यवस्था करने की भी योजना बनाई जा रही है। यह कदम जेल सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है, जो न केवल कैदियों के अधिकारों की रक्षा करेगा, बल्कि उनके सामाजिक पुनर्एकीकरण को भी सुगम बनाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर कमेटी और पृष्ठभूमि
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित हाई पावर कमेटी में राज्य की वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी वंदना दादेल को नामित किया गया है। गौरतलब है कि यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के उस देशव्यापी दिशा-निर्देश से जुड़ा है, जिसमें सभी राज्यों को गृह विभाग के अंतर्गत एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाने का आदेश दिया गया था। इस कमेटी का मुख्य उद्देश्य ओपन जेलों की निगरानी करना, कैदियों के लिए जिम, बेहतर भोजन और स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
आगे क्या होगा
शीर्ष अदालत के इसी आदेश के संदर्भ में झारखंड हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की निगरानी शुरू की है। 3 नवंबर को तिमाही रिपोर्ट दाखिल होने के बाद 5 नवंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि ओपन बैरक और नई ओपन जेल की प्रगति किस दिशा में जा रही है।