जम्मू-कश्मीर जेल सुरक्षा समीक्षा: एलजी मनोज सिन्हा ने दिए आधुनिक तकनीक अपनाने के निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 5 नवंबर 2026 को श्रीनगर स्थित लोक भवन में जेल विभाग की उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में जम्मू-कश्मीर की जेलों में सुरक्षा प्रोटोकॉल को सुदृढ़ करने, बुनियादी ढाँचे में सुधार और कैदियों के कल्याण पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक के प्रमुख निर्देश
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अधिकारियों को सुरक्षा प्रोटोकॉल को और कड़ा करने और जेल परिसरों में कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने का आदेश दिया। उन्होंने जेल प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और कुशल बनाने के लिए आधुनिक तकनीक को अपनाने पर विशेष ज़ोर दिया।
सिन्हा ने प्रबंधन प्रक्रियाओं में सुधार, अनुशासन को बनाए रखने और नियमों के अनुरूप कैदियों के साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने पुनर्वास कार्यक्रमों को प्राथमिकता देने पर बल दिया ताकि कैदी समाज में सकारात्मक भूमिका निभा सकें।
जम्मू-कश्मीर जेलों की मौजूदा स्थिति
वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में 14 जेलें कार्यरत हैं — इनमें 2 केंद्रीय जेलें, 10 जिला जेलें, 1 विशेष जेल और 1 उप-जेल शामिल हैं। इन जेलों की कुल क्षमता 3,629 कैदियों की है, लेकिन आँकड़ों के अनुसार इनमें अभी 5,300 से अधिक कैदी बंद हैं — यानी स्वीकृत क्षमता से करीब 46 प्रतिशत अधिक।
यह भीड़भाड़ की स्थिति जेल प्रशासन के लिए एक गंभीर चुनौती है और इसी पृष्ठभूमि में यह समीक्षा बैठक विशेष महत्त्व रखती है।
प्रशिक्षण और पुनर्वास व्यवस्था
जेल विभाग के पास मिश्रीवाला में स्थित 'इंस्टीट्यूट ऑफ करेक्शनल सर्विसेज' नामक प्रशिक्षण केंद्र है, जो जेल प्रबंधन से जुड़े बुनियादी और रिफ्रेशर प्रशिक्षण प्रदान करता है। विभाग के नियंत्रण में एक 'होल्डिंग सेंटर' भी संचालित है।
नया जेल मैनुअल और सुधारात्मक नीति
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर के लिए 'जेल मैनुअल, 2022' को अधिसूचित किया है। यह मैनुअल 'मॉडल जेल मैनुअल' की तर्ज पर तैयार किया गया है और इसका प्राथमिक उद्देश्य कैदियों को सुधारात्मक एवं पुनर्वास सेवाएँ प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाना है।
नए मैनुअल में सार्वजनिक सुरक्षा को बढ़ावा देने और जेल संस्थाओं को अधिक मानवीय बनाने पर बल दिया गया है। यह बदलाव ऐसे समय आया है जब देश भर में जेल सुधार की माँग जोर पकड़ रही है और सर्वोच्च न्यायालय भी जेलों में भीड़भाड़ को लेकर कई मौकों पर चिंता जता चुका है।
आगे की राह
बैठक में जेल विभाग और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उपराज्यपाल के निर्देशों के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए आगामी हफ्तों में अनुपालन रिपोर्ट तलब किए जाने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जेलों में तकनीक के उपयोग और पुनर्वास पर फोकस से दीर्घकाल में पुनरावर्ती अपराध दर में कमी आ सकती है।