5 नवंबर 2026
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पंजाब कर्मचारियों ने 3% डीए बढ़ोतरी खारिज की, 13 नवंबर से एक महीने का आंदोलन

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पंजाब कर्मचारियों ने 3% डीए बढ़ोतरी खारिज की, 13 नवंबर से एक महीने का आंदोलन

सारांश

पंजाब में चुनाव से पहले बड़ा टकराव — चार लाख कर्मचारी और साढ़े तीन लाख पेंशनभोगी भगवंत मान की 3% डीए बढ़ोतरी को नाकाफी बताते हुए सड़क पर उतरने को तैयार हैं। 13 नवंबर से शुरू यह आंदोलन 13 दिसंबर तक चलेगा — AAP के 91 विधायकों के घरों तक।

मुख्य बातें

कर्मचारी और पेंशनभोगी यूनियनों की संयुक्त समन्वय समिति ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की 3% डीए बढ़ोतरी को 5 नवंबर 2026 को खारिज किया।
आंदोलन 13 नवंबर से संगरूर में अनिश्चितकालीन धरने के साथ शुरू होगा और 13 दिसंबर तक चलेगा।
1 से 5 दिसंबर तक AAP के सभी 91 विधायकों के आवास के बाहर प्रदर्शन होगा।
समिति लगभग 4 लाख सरकारी कर्मचारियों और 3.5 लाख पेंशनभोगियों का प्रतिनिधित्व करती है।
यूनियनों की प्रमुख माँगों में OPS बहाली , बकाया 10% डीए , छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करना शामिल हैं।
डीए बढ़ोतरी के बाद कुल डीए दर 53% हो गई है; नवंबर वेतन में दिखेगी, भुगतान दिसंबर में।

पंजाब सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने 5 नवंबर 2026 को मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा महंगाई भत्ते (डीए) में की गई 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी को सिरे से नकार दिया और 13 नवंबर से एक महीने तक चलने वाले व्यापक आंदोलन की घोषणा कर दी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और सरकार व कर्मचारी संगठनों के बीच खाई और गहरी होती दिख रही है।

आंदोलन की घोषणा किसने की

यह निर्णय कर्मचारी और पेंशनभोगी यूनियनों की संयुक्त समन्वय समिति ने लिया है, जो लगभग चार लाख सरकारी कर्मचारियों और 3.5 लाख पेंशनभोगियों का प्रतिनिधित्व करती है। यूनियन नेताओं सुखचैन खेरा और गुरनाम सिंह विर्क ने स्पष्ट किया कि हाल की डीए घोषणा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की मुख्य माँगों को पूरा करने में विफल रही है।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार अपने वादों को पूरा नहीं करती और सभी लंबित मुद्दों का समाधान नहीं होता।

आंदोलन का पूरा कार्यक्रम

आंदोलन 13 से 19 नवंबर तक संगरूर शहर में अनिश्चितकालीन धरने के साथ शुरू होगा। यूनियनों ने अपने विरोध प्रदर्शन की जगह चंडीगढ़ से बदलकर संगरूर करने का भी फैसला किया है।

1 से 5 दिसंबर तक कर्मचारी और पेंशनभोगी अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में आम आदमी पार्टी (AAP) के सभी 91 विधायकों के आवास के बाहर प्रदर्शन करेंगे और सत्ताधारी पार्टी के पुतले जलाएँगे। 6 दिसंबर को प्रदर्शनकारी पुतलों की 'राख' को लुधियाना के बुड्ढा नाला में विसर्जित करने की योजना है। यह महीने भर का आंदोलन 13 दिसंबर को शंभू से अमृतसर तक बनने वाली मानव श्रृंखला के साथ समाप्त होगा।

कर्मचारियों की प्रमुख माँगें

यूनियनें केवल डीए बढ़ोतरी से संतुष्ट नहीं हैं — उनकी माँगें कहीं व्यापक हैं। संयुक्त समिति पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लागू करने, बाकी बचे 10 प्रतिशत डीए को जारी करने, डीए के बकाया भुगतान, छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने और पुराने वेतनमानों व भत्तों को बहाल करने की माँग कर रही है। साथ ही यूनियनों ने उन सरकारी नीतियों को वापस लेने की भी माँग की है, जो उनके अनुसार कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर प्रतिकूल असर डालती हैं।

सरकार का पक्ष

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को डीए में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की थी और इसे सरकारी कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों के लिए 'दिवाली का तोहफा' करार दिया था। इस बढ़ोतरी के बाद डीए की कुल दर 53 प्रतिशत हो गई है। सरकार का दावा है कि पिछले दो महीनों में डीए में कुल 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है — जिसमें पहले घोषित 8 प्रतिशत की वृद्धि भी शामिल है। यह बढ़ोतरी नवंबर के वेतन और पेंशन में दिखेगी, जिसका भुगतान दिसंबर में किया जाएगा।

हालाँकि, यूनियन प्रतिनिधियों ने बकाया डीए किस्तों और कर्मचारियों को दिए गए वित्तीय लाभों के संबंध में सरकार के दावों को भी चुनौती दी है। उनका तर्क है कि केवल दर बढ़ाने से बकाया राशि और अन्य लंबित माँगों का हल नहीं निकलता।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह टकराव विधानसभा चुनावों से ठीक पहले उभरा है, जिससे सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) पर राजनीतिक दबाव बढ़ना तय है। चार लाख से अधिक कर्मचारी और साढ़े तीन लाख पेंशनभोगी — यानी एक बड़ा मतदाता वर्ग — इस आंदोलन से सीधे जुड़े हैं। यदि सरकार और यूनियनों के बीच जल्द कोई सहमति नहीं बनती, तो महीने भर का यह आंदोलन चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यूनियनों की नज़र में यह बकाया राशि और OPS जैसी संरचनात्मक माँगों को दरकिनार करने की कोशिश है। विधानसभा चुनावों से ठीक पहले साढ़े सात लाख से अधिक कर्मचारियों-पेंशनभोगियों का एकजुट होना AAP के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि यही वह वर्ग है जिसने 2022 में पार्टी को भारी बहुमत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। गौरतलब है कि OPS की माँग राष्ट्रीय स्तर पर भी उठ रही है — केंद्र और कई राज्य सरकारें इस दबाव से जूझ रही हैं। पंजाब में यदि यह आंदोलन चुनाव तक खिंचता है, तो AAP को अपने 'सुशासन' के दावे को कर्मचारी असंतोष के सामने साबित करना होगा।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब कर्मचारियों ने डीए बढ़ोतरी क्यों खारिज की?
कर्मचारी और पेंशनभोगी यूनियनों का कहना है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की 3% डीए बढ़ोतरी उनकी मुख्य माँगों — जैसे OPS बहाली, बकाया 10% डीए का भुगतान और छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करना — को पूरा करने में विफल रही है। यूनियनों का तर्क है कि केवल दर बढ़ाने से बकाया राशि का मुद्दा हल नहीं होता।
पंजाब कर्मचारियों का आंदोलन कब और कहाँ शुरू होगा?
आंदोलन 13 नवंबर 2026 से संगरूर शहर में अनिश्चितकालीन धरने के साथ शुरू होगा और 13 दिसंबर को शंभू से अमृतसर तक मानव श्रृंखला के साथ समाप्त होगा। विरोध प्रदर्शन की जगह चंडीगढ़ से बदलकर संगरूर की गई है।
पंजाब में डीए की मौजूदा दर क्या है?
भगवंत मान की 3% बढ़ोतरी के बाद पंजाब सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए डीए की कुल दर 53% हो गई है। सरकार का दावा है कि पिछले दो महीनों में कुल 11% की बढ़ोतरी की गई है।
इस आंदोलन से कितने लोग प्रभावित होंगे?
संयुक्त समन्वय समिति लगभग 4 लाख सरकारी कर्मचारियों और 3.5 लाख पेंशनभोगियों का प्रतिनिधित्व करती है। 1 से 5 दिसंबर के बीच AAP के सभी 91 विधायकों के आवास के बाहर प्रदर्शन होने से यह आंदोलन पूरे पंजाब में फैलेगा।
पंजाब कर्मचारियों की प्रमुख माँगें क्या हैं?
यूनियनें पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने, बकाया 10% डीए जारी करने, डीए के बकाया भुगतान, छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने और पुराने वेतनमानों व भत्तों को बहाल करने की माँग कर रही हैं। साथ ही उन सरकारी नीतियों को वापस लेने की भी माँग है जो कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर बुरा असर डालती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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