पंजाब कर्मचारियों ने 3% डीए बढ़ोतरी खारिज की, 13 नवंबर से एक महीने का आंदोलन
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने 5 नवंबर 2026 को मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा महंगाई भत्ते (डीए) में की गई 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी को सिरे से नकार दिया और 13 नवंबर से एक महीने तक चलने वाले व्यापक आंदोलन की घोषणा कर दी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और सरकार व कर्मचारी संगठनों के बीच खाई और गहरी होती दिख रही है।
आंदोलन की घोषणा किसने की
यह निर्णय कर्मचारी और पेंशनभोगी यूनियनों की संयुक्त समन्वय समिति ने लिया है, जो लगभग चार लाख सरकारी कर्मचारियों और 3.5 लाख पेंशनभोगियों का प्रतिनिधित्व करती है। यूनियन नेताओं सुखचैन खेरा और गुरनाम सिंह विर्क ने स्पष्ट किया कि हाल की डीए घोषणा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की मुख्य माँगों को पूरा करने में विफल रही है।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार अपने वादों को पूरा नहीं करती और सभी लंबित मुद्दों का समाधान नहीं होता।
आंदोलन का पूरा कार्यक्रम
आंदोलन 13 से 19 नवंबर तक संगरूर शहर में अनिश्चितकालीन धरने के साथ शुरू होगा। यूनियनों ने अपने विरोध प्रदर्शन की जगह चंडीगढ़ से बदलकर संगरूर करने का भी फैसला किया है।
1 से 5 दिसंबर तक कर्मचारी और पेंशनभोगी अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में आम आदमी पार्टी (AAP) के सभी 91 विधायकों के आवास के बाहर प्रदर्शन करेंगे और सत्ताधारी पार्टी के पुतले जलाएँगे। 6 दिसंबर को प्रदर्शनकारी पुतलों की 'राख' को लुधियाना के बुड्ढा नाला में विसर्जित करने की योजना है। यह महीने भर का आंदोलन 13 दिसंबर को शंभू से अमृतसर तक बनने वाली मानव श्रृंखला के साथ समाप्त होगा।
कर्मचारियों की प्रमुख माँगें
यूनियनें केवल डीए बढ़ोतरी से संतुष्ट नहीं हैं — उनकी माँगें कहीं व्यापक हैं। संयुक्त समिति पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लागू करने, बाकी बचे 10 प्रतिशत डीए को जारी करने, डीए के बकाया भुगतान, छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने और पुराने वेतनमानों व भत्तों को बहाल करने की माँग कर रही है। साथ ही यूनियनों ने उन सरकारी नीतियों को वापस लेने की भी माँग की है, जो उनके अनुसार कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर प्रतिकूल असर डालती हैं।
सरकार का पक्ष
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को डीए में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की थी और इसे सरकारी कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों के लिए 'दिवाली का तोहफा' करार दिया था। इस बढ़ोतरी के बाद डीए की कुल दर 53 प्रतिशत हो गई है। सरकार का दावा है कि पिछले दो महीनों में डीए में कुल 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है — जिसमें पहले घोषित 8 प्रतिशत की वृद्धि भी शामिल है। यह बढ़ोतरी नवंबर के वेतन और पेंशन में दिखेगी, जिसका भुगतान दिसंबर में किया जाएगा।
हालाँकि, यूनियन प्रतिनिधियों ने बकाया डीए किस्तों और कर्मचारियों को दिए गए वित्तीय लाभों के संबंध में सरकार के दावों को भी चुनौती दी है। उनका तर्क है कि केवल दर बढ़ाने से बकाया राशि और अन्य लंबित माँगों का हल नहीं निकलता।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह टकराव विधानसभा चुनावों से ठीक पहले उभरा है, जिससे सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) पर राजनीतिक दबाव बढ़ना तय है। चार लाख से अधिक कर्मचारी और साढ़े तीन लाख पेंशनभोगी — यानी एक बड़ा मतदाता वर्ग — इस आंदोलन से सीधे जुड़े हैं। यदि सरकार और यूनियनों के बीच जल्द कोई सहमति नहीं बनती, तो महीने भर का यह आंदोलन चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।