हजारीबाग ओपन जेल में दो पूर्व नक्सली कमांडरों ने रचाई शादी, अफसर बने बाराती-घराती
सारांश
मुख्य बातें
हजारीबाग की ओपन जेल में बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को एक असाधारण मानवीय दृश्य देखने को मिला, जब दो पूर्व नक्सली कमांडरों ने विवाह बंधन में बंधकर अपने जीवन का एक नया अध्याय शुरू किया। हिंसा का रास्ता छोड़कर सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत मुख्यधारा में लौटे इन दोनों के विवाह समारोह में हजारीबाग पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी बाराती और घराती बनकर शामिल हुए।
कौन हैं यह नवदंपती
विवाह बंधन में बंधने वाले इस जोड़े में सुरेश सिंह मुंडा शामिल हैं, जो रांची जिले के बुंडू (बारूहातू) के निवासी हैं, और सोमवारी हेम्ब्रम, जो रांची जिले के तमाड़ (अराहंगा) की रहने वाली हैं। दोनों कभी नक्सल आंदोलन में सक्रिय कमांडर के रूप में काम करते थे। सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर दोनों ने हिंसा का रास्ता हमेशा के लिए छोड़ दिया और आत्मसमर्पण के बाद से हजारीबाग ओपन जेल में पुनर्वास की प्रक्रिया से गुज़र रहे थे।
विवाह समारोह का आयोजन
जिला प्रशासन और पुलिस की मानवीय पहल पर इस विवाह का निर्णय लिया गया और इसे पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न कराया गया। हजारीबाग के जिला विवाह पदाधिकारी राजेश एक्का ने मौके पर ही विधिवत रूप से दोनों का मैरिज रजिस्ट्रेशन संपन्न कराया, जिससे उनके रिश्ते को सामाजिक के साथ-साथ पूर्ण वैधानिक मान्यता भी प्राप्त हो गई। ओपन जेल में रह रहे अन्य बंदी भी बाराती बनकर समारोह में शामिल हुए और नवदंपती को आशीर्वाद दिया।
अधिकारियों ने निभाई परिजनों की भूमिका
इस समारोह का सबसे भावुक और प्रेरणादायक दृश्य वह था जब सुरक्षा बलों और प्रशासनिक अधिकारियों ने परिजनों की कमी महसूस नहीं होने दी। हजारीबाग पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने घराती और बाराती दोनों की भूमिकाएँ निभाईं। उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ नवदंपती का स्वागत किया और उपहार देकर उनके सुखी व खुशहाल भविष्य की कामना की।
पुनर्वास की व्यापक चुनौती
नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों के पुनर्वास की चुनौती केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। रोज़गार, पारिवारिक जीवन और समाज में स्वीकार्यता ऐसे लोगों के पुनर्वास के महत्वपूर्ण पहलू माने जाते हैं। यह विवाह समारोह इस दिशा में एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ प्रशासन ने केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि एक मानवीय ज़िम्मेदारी भी निभाई। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस जोड़े के पुनर्वास की शेष प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।