28 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

हजारीबाग ओपन जेल में दो पूर्व नक्सली कमांडरों ने रचाई शादी, अफसर बने बाराती-घराती

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
हजारीबाग ओपन जेल में दो पूर्व नक्सली कमांडरों ने रचाई शादी, अफसर बने बाराती-घराती

सारांश

हजारीबाग ओपन जेल में बुधवार को एक असाधारण दृश्य — दो पूर्व नक्सली कमांडरों ने शादी रचाई और अधिकारी बने बाराती-घराती। यह प्रशासनिक पहल दिखाती है कि पुनर्वास सिर्फ कागज़ों पर नहीं, ज़मीन पर भी हो सकता है।

मुख्य बातें

सुरेश सिंह मुंडा (बुंडू, रांची) और सोमवारी हेम्ब्रम (तमाड़, रांची) ने 28 अक्टूबर 2026 को हजारीबाग ओपन जेल में विवाह किया।
दोनों पूर्व नक्सली कमांडर हैं जिन्होंने सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत हिंसा का रास्ता छोड़ा था।
जिला विवाह पदाधिकारी राजेश एक्का ने मौके पर ही मैरिज रजिस्ट्रेशन संपन्न कराया।
हजारीबाग पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बाराती और घराती की भूमिका निभाई।
ओपन जेल के अन्य बंदी भी समारोह में शामिल हुए और नवदंपती को आशीर्वाद दिया।

हजारीबाग की ओपन जेल में बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को एक असाधारण मानवीय दृश्य देखने को मिला, जब दो पूर्व नक्सली कमांडरों ने विवाह बंधन में बंधकर अपने जीवन का एक नया अध्याय शुरू किया। हिंसा का रास्ता छोड़कर सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत मुख्यधारा में लौटे इन दोनों के विवाह समारोह में हजारीबाग पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी बाराती और घराती बनकर शामिल हुए।

कौन हैं यह नवदंपती

विवाह बंधन में बंधने वाले इस जोड़े में सुरेश सिंह मुंडा शामिल हैं, जो रांची जिले के बुंडू (बारूहातू) के निवासी हैं, और सोमवारी हेम्ब्रम, जो रांची जिले के तमाड़ (अराहंगा) की रहने वाली हैं। दोनों कभी नक्सल आंदोलन में सक्रिय कमांडर के रूप में काम करते थे। सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर दोनों ने हिंसा का रास्ता हमेशा के लिए छोड़ दिया और आत्मसमर्पण के बाद से हजारीबाग ओपन जेल में पुनर्वास की प्रक्रिया से गुज़र रहे थे।

विवाह समारोह का आयोजन

जिला प्रशासन और पुलिस की मानवीय पहल पर इस विवाह का निर्णय लिया गया और इसे पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न कराया गया। हजारीबाग के जिला विवाह पदाधिकारी राजेश एक्का ने मौके पर ही विधिवत रूप से दोनों का मैरिज रजिस्ट्रेशन संपन्न कराया, जिससे उनके रिश्ते को सामाजिक के साथ-साथ पूर्ण वैधानिक मान्यता भी प्राप्त हो गई। ओपन जेल में रह रहे अन्य बंदी भी बाराती बनकर समारोह में शामिल हुए और नवदंपती को आशीर्वाद दिया।

अधिकारियों ने निभाई परिजनों की भूमिका

इस समारोह का सबसे भावुक और प्रेरणादायक दृश्य वह था जब सुरक्षा बलों और प्रशासनिक अधिकारियों ने परिजनों की कमी महसूस नहीं होने दी। हजारीबाग पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने घराती और बाराती दोनों की भूमिकाएँ निभाईं। उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ नवदंपती का स्वागत किया और उपहार देकर उनके सुखी व खुशहाल भविष्य की कामना की।

पुनर्वास की व्यापक चुनौती

नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों के पुनर्वास की चुनौती केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। रोज़गार, पारिवारिक जीवन और समाज में स्वीकार्यता ऐसे लोगों के पुनर्वास के महत्वपूर्ण पहलू माने जाते हैं। यह विवाह समारोह इस दिशा में एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ प्रशासन ने केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि एक मानवीय ज़िम्मेदारी भी निभाई। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस जोड़े के पुनर्वास की शेष प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नागरिक के रूप में देखने को तैयार है। असली कसौटी यह होगी कि क्या इस जोड़े को जेल से बाहर एक सम्मानजनक जीवन की व्यवस्था भी मिलती है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हजारीबाग ओपन जेल में शादी करने वाले पूर्व नक्सली कौन हैं?
शादी करने वाले जोड़े में सुरेश सिंह मुंडा (रांची जिले के बुंडू, बारूहातू निवासी) और सोमवारी हेम्ब्रम (रांची जिले के तमाड़, अराहंगा निवासी) शामिल हैं। दोनों पूर्व नक्सली कमांडर हैं जिन्होंने सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत हिंसा का रास्ता छोड़ा था।
यह विवाह कैसे और कहाँ संपन्न हुआ?
यह विवाह 28 अक्टूबर 2026 को हजारीबाग ओपन जेल में जिला प्रशासन और पुलिस की मानवीय पहल पर पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न कराया गया। जिला विवाह पदाधिकारी राजेश एक्का ने मौके पर ही मैरिज रजिस्ट्रेशन कराया, जिससे विवाह को कानूनी मान्यता भी मिली।
अधिकारियों ने इस शादी में क्या भूमिका निभाई?
हजारीबाग पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने बाराती और घराती दोनों की भूमिकाएँ निभाईं। उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ नवदंपती का स्वागत किया और उपहार देकर उनके सुखी भविष्य की कामना की।
आत्मसमर्पण के बाद नक्सलियों के पुनर्वास में क्या चुनौतियाँ होती हैं?
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आत्मसमर्पण करने वालों के पुनर्वास की चुनौती केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। रोज़गार, पारिवारिक जीवन और समाज में स्वीकार्यता भी पुनर्वास के महत्वपूर्ण पहलू हैं, जिन पर यह विवाह समारोह एक सकारात्मक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
हजारीबाग ओपन जेल क्या है?
ओपन जेल एक ऐसी सुधार संस्था होती है जहाँ कैदियों को सामान्य जेलों की तुलना में अधिक स्वतंत्रता दी जाती है और उन्हें पुनर्वास की प्रक्रिया से गुज़ारा जाता है। हजारीबाग की ओपन जेल में आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सली अपने पुनर्वास के दौर में रह रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले